जॉर्जिया: जो बाइडन को सत्ता संभालने से पहले ही मिली बड़ी जीत

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- Author, एंथनी जर्चर
- पदनाम, उत्तरी अमेरिका रिपोर्टर
अमेरिका में साल 2020 में शुरू हुआ राष्ट्रपति चुनाव अब नए साल में अपने अंत की ओर बढ़ रहा है.
जो बाइडन के राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत से पहले ही राजनीतिक स्थिति उनकी पक्ष में जाती दिख रही है.
अमेरिकी मीडिया ने जॉर्जिया सीनेट सीटों पर राफेल वॉरनॉक और जो ओसोफ की जीत की घोषणा की है.
अगर किसी को जॉर्जिया में जो बाइडन की जीत पर संदेह है तो वो इन दो डेमोक्रेटिक नेताओं के चुनाव में प्रदर्शन के बाद दूर हो जाना चाहिए. इन दोनों नेताओं का प्रदर्शन राष्ट्रपति चुनाव की जीत से आगे निकल गया है.
जॉर्जिया में जीत के साथ ही अमेरिकी सीनेट में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स की संख्या समान हो गई है. सीनेट में 100 सदस्य होते हैं अब दोनों पार्टियों की 50-50 की बराबरी हो चुकी है. पहले अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन्स का बहुमत था.
साथ ही उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के शपथ लेते ही पार्टी के पास सीनेट का नियंत्रण भी आ जाएगा. उपराष्ट्रपति के पास किसी विधेयक पर बराबर वोट मिलने की स्थिति में फ़ैसला लेने का अधिकार होगा.
लेकिन, इसके क्या मायने हैं? मंगलवार को आए इन नतीजों के क्या प्रभाव हो सकते हैं-

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बाइडन के एजेंडे के लिए उम्मीद
पिछले राष्ट्रपति कार्यकाल में दो सालों तक डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाले हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स से रिपब्लिकन्स के नियंत्रण वाले सीनेट में आने वाले सभी विधेयकों में अड़चनें आती रही हैं. लेकिन, जॉर्जिया में हुई जीत से अब ऐसा नहीं हो पाएगा.
इससे जो बाइडन के लिए हेल्थकेयर, पर्यावरण, सरकारी सुधार और अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपने विधेयकों को पास कराना आसान हो जाएगा.
लेकिन, इस 50-50 बराबरी का ये मतलब नहीं है कि ग्रीन न्यू डील और पब्लिक हेल्थ इंश्योरेंस जैसे प्रस्ताव जल्द ही लागू हो जाएंगे.
डेमोक्रेट्स के लिए इसमें अब भी रुकावटें आ सकती हैं क्योंकि प्रमुख विधेयकों के लिए 60 वोटों की ज़रूरत होती है.
यहां तक कि जो विधेयक सामान्य बहुमत से पास हो सकते हैं उनमें भी पहले मध्यमार्गी प्रमुख डेमोक्रेट्स जो मांचिन (वेस्ट वर्जिनिया) और एरिज़ोना से आने वाले दो सीनेटरों को संतुष्ट करना होगा.
हालांकि, कोरोना वायरस राहत के दूसरे दौर के लागू होने की संभावना है. इसके तहत सभी अमेरिकियों को राहत राशि दी जाएगी.
वहीं, ट्रंप प्रशासन के दौरान अंतिम महीनों में लागू किए गए नियमों को कांग्रेस में सामान्य बहुमत से भी रद्द किया जा सकता है.

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बाइडन प्रशासन में नियुक्तियां होंगी आसान
जो बाइडन को अपने प्रशासन के लिए अधिकारी नामित करने में विधेयकों को पास कराने जैसी रुकावटें नहीं आएंगी.
इसका फ़ैसला सिर्फ़ डेमोक्रेट्स के वोट के आधार पर हो सकता है.
ये उन प्रत्याशियों के लिए अच्छी ख़बर है जिनका नामांकन विवादित रहा है जैसे नीरा टंडन, उन्हें बाइडन के बजट ऑफ़िस के लिए चुना गया है.
यही बात न्यायिक नियुक्तियों पर भी लागू होगी जैसे सुप्रीम कोर्ट में होने वाली नियुक्तियां.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चार साल के कार्यकाल में फेडरेल बेंच पर 234 न्यायाधीशों की नियुक्ति की है. इनमें सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीश भी शामिल हैं.

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बड़ी जांच का ख़तरा नहीं
जो बाइडन के लिए इसमें एक और फ़ायदा ये है कि कांग्रेस के दोनों सदनों पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होने से रिपब्लिकन्स की जांच संबंधी शक्तियां बहुत कम हो जाएंगी.
डेमोक्रेट्स के सीनेट कमिटियों के प्रभारी होने से शर्मिंदगी से भरी और विस्फोटक किस्म की जांचें हो पानी मुश्किल होंगी.
विस्कॉन्सन से रिपब्लिकन सीनेटर रॉन जॉनसन सरकारी पर्यवेक्षण समिति संचालित नहीं करेंगे. ऐसे में जो बाइडन के बेटे हंटर बाइडन के चीनी समझौतों और उसके नए राष्ट्रपति से किसी भी संबंध के मामले में उनका पहले जैसा दखल नहीं होगा.
यही बात लिंडसे ग्राहम और न्यायपालिका समिति पर भी लागू होती है, जिसके 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस के दखल के मामले में और सुनवाई आयोजित करने की संभावना थी.
ऐसे में किसी डेमोक्रेटिक घोटाले से बहुत बड़ा राजनीतिक नुक़सान होने से भी बचा जा सकता है. डोनाल्ड ट्रंप को भी अपने कार्यकाल के पहले दो साल में ये फ़ायदा मिला है लेकिन अगले दो सालों में उन्होंने इसे खो दिया.

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रिपब्लिकन्स की संख्या
साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन्स की हार की अब पुष्टि हो चुकी है. पार्टी ने राष्ट्रपति पद और कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण खो दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक अगर चुनावी गड़बड़ी का मसला नहीं भी उठाते हैं तो वो तर्क देंगे कि रिपब्लिकन की हार राज्यों में पार्टी के नेतृत्व के कारण हुई है. वो कह सकते हैं कि गवर्नर ब्रायन केंप राष्ट्रपति के लिए पूरी तरह वफादार नहीं थे.
पार्टी के अंदर डोनाल्ड ट्रंप के आलोचकों की संख्या बढ़ेगी. जॉर्जिया में रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर हमला करके संभावित जीत गंवाने के लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.

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जॉर्जिया किस तरफ़
पिछले 28 सालों से कोई डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति उम्मीदवार के हिस्से जॉर्जिया नहीं आया है. पिछले 20 सालों से किसी डेमोक्रेट ने जॉर्जिया से सीनेट की सीट नहीं जीती है और जॉर्जिया में कोई भी जीत हासिल किए डेमोक्रेट्स को 14 साल हो गए हैं.
वहीं, रिपब्लिकन्स ने जॉर्जिया में लंबे समय से कोई भी चुनाव नहीं हारा है.
लेकिन, इस बार डेमोक्रेट्स की जीत से क्या ये माना जा सकता है कि दक्षिणी अमेरिका का कारोबारी केंद्र जॉर्जिया भी डेमोक्रेट्स का गढ़ बन गया है.
मंगलवार को एक चुनाव विश्लेषण वेबसाइट fivethirtyeight.com ने आकलन किया था कि क्या जॉर्जिया वर्जीनिया की तरह डेमोक्रेटिक पार्टी के दबदबे वाला राज्य बन जाएगा या नॉर्थ कैरोलीन की तरह स्विंग स्टेट बनेगा जो ज़्यादातर रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में जाता है.
मौजूदा नतीजों को देखें तो जॉर्जिया के डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ बनने की संभावना अधिक है. अगर ऐसा होता है तो जॉर्जिया दक्षिणी राज्य एरिज़ोना के साथ अमेरिकी राजनीति का नक्शा बदल सकता है.
सीनेट में बहुमत या इलेक्टोरल कॉलेज के ज़रिए राष्ट्रपति पद पाना पार्टी के लिए आसान हो जाएगा.
जल्द ही डेमोक्रेट्स के लिए जॉर्जिया में फिर से परीक्षा की घड़ी आने वाली है. वॉरनॉक रिटायर सीनेटर जॉनी इसाकसन का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं. लेकिन, ये कार्यकाल अगले दो सालों में पूरा हो जाएगा. इसके बाद उनके फिर से चुनावी मैदान में उतरना होगा.
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