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इमरान ख़ान सिर्फ़ मोहरा हैं, असल मुजरिम उन्हें लाने वाले हैं: फ़ज़लुर्रहमान
- Author, इकबाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
विपक्षी महागठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने संसद के लिए होने वाले उप-चुनाव में हिस्सा लेने का फ़ैसला किया है लेकिन संसद के ऊपरी सदन सीनेट के लिए होने वाल चुनावों में हिस्सा लेने पर अभी कोई फ़ैसला नहीं हुआ है.
दो जनवरी को पीडीएम के नेताओं की राजधानी इस्लामाबाद में बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर फ़ैसले लिए गए.
बैठक के बाद पीडीएम के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने मीडिया से बातचीत की और बैठक में लिए गए फ़ैसलों की जानकारी दी.
अख़बार जंग के अनुसार मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि बैठक में इस बात पर आम सहमति बन गई है कि उप-चुनाव में पीडीएम हिस्सा लेगी लेकिन सीनेट के चुनाव में हिस्सा लिया जाए या नहीं, इस पर फ़ैसला बाद में होगा.
मौलाना ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को 31 जनवरी तक का वक़्त दिया गया है और अगर उन्होंने उस वक़्त तक इस्तीफ़ा नहीं दिया तो लॉन्ग मार्च की तारीख़ की घोषणा की जाएगी और अभी यह तय करना बाक़ी है कि लॉन्ग मार्च राजधानी इस्लामाद की तरफ़ होगी या फिर रावलपिंडी की तरफ.
रावलपिंडी में पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है. मौलाना ने इमरान ख़ान और पाकिस्तानी सेना पर भी जमकर हमला किया.
मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा, ''इमरान ख़ान सिर्फ़ एक मोहरा हैं जिनके लिए धांधली की गई और देश पर उनको थोपा गया, एक झूठी सरकार क़ायम की गई. असल मुजरिम उन्हें लाने वाले हैं.''
उन्होंने सैन्य नेतृत्व पर हमला करते हुए कहा, ''हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि हमलोग सैन्य नेतृत्व को मुजरिम समझते हैं.''
हालांकि उन्होंने सेना और सैन्य नेतृत्व को अलग-अलग करने की कोशिश की. सेना की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा, "सेना हमारी है और हम सभी जनरलों का सम्मान करते हैं. सेना हमारी सुरक्षा करती है लेकिन सेना अगर पेशेवराना ज़िम्मेदारियों से हटकर राजनीति में हस्तक्षेप करती है तो उससे उलझनें पैदा होती हैं."
उन्होंने सैन्य नेतृत्व पर जमकर हमला किया और कहा, आज राजनीतिक, आर्थिक और संवैधानिक संकट इसी वजह से है कि वो (सेना) अपनी हद को पार करते हैं.
उन्होंने कहा कि 19 जनवरी को चुनाव आयोग और नैब (नेशनल एकाउंटिबिलिटी ब्यूरौ) के दफ़्तर के सामने विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
उन्होंने यह भी कहा कि पीडीएम में शामिल सभी पार्टियों के सांसदों और विधायकों ने अपने-अपने इस्तीफ़े पार्टी प्रमुख के सामने दे दिए हैं.
16 अक्तूबर से अब तक विपक्ष सरकार के ख़िलाफ़ गुजरानवाला, कराची, क्वेटा, पेशावर, मुल्तान और लाहौर में बड़ी रैलियां कर चुका है जिनमें हज़ारों लोग शरीक हुए थे.
उधर सरकार का कहना है कि विपक्ष सरकार और सेना के ख़िलाफ़ साज़िश कर रहा है.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि, मेरे और सेना के ख़िलाफ़ साज़िश हो रही है और पीडीएम उसका हिस्सा है. विपक्ष मुझे कठपुतली और फ़ाशिस्ट कहता है. विपक्ष बताए कि मैंने कौन सी चीज़ अपनी पार्टी के चुनावी मैनिफ़ेस्टो के ख़िलाफ़ किया है.
अख़बार के अनुसार एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "फ़ौज जानती है मैं करप्शन नहीं कर रहा है. सेना हर उस प्रधानमंत्री का साथ देगी जो देश के लिए काम करेगा.''
इमरान ख़ान ने कहा कि ''विपक्ष कभी भी जन-आंदोलन नहीं कर सकता, जनता किसी की चोरी बचाने के लिए सड़क पर नहीं उतरेगी. जनता तब सड़क पर उतरती है जब उनकी समस्या के समाधान के लिए आंदोलन किया जाता है.''
इमरान ख़ान ने विपक्ष से कहा कि वो भ्रष्टाचार के ज़रिए लूटे हुए पैसे वापस दे या फिर जेल जाए. उन्होंने कहा कि नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी का पैसा देश में वापस आ जाए तो देश की कई समस्या सुलझ सकती है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार केंद्रीय गृहमंत्री शेख़ रशीद ने विपक्षी गठबंधन पर हमला करते हुए कहा, ''खोदा पहाड़, निकला चूहा.''
गृहमंत्री ने आगे कहा, ''पीडीएम वाले मायूस और नाकाम हो चुके हैं. जहां जी चाहता हैं वहां आ जाएं, धमकियों से डरने वाले नहीं हैं.''
गृहमंत्री शेख़ रशीद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ का पासपोर्ट 16 फ़रवरी को रद्द कर दिया जाएगा. नवाज़ शरीफ़ भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी क़रार दिए जा चुके हैं लेकिन अपनी बीमारी के इलाज के सिलसिले में वो पिछले कुछ महीनों से लंदन में हैं.
सूचना एंव प्रसारण मंत्री शिब्ली फ़राज़ ने भी पीडीएम पर हमला करते हुए कहा कि मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) में इस्तीफ़ों को लेकर एक राय नहीं है, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के पास भी प्रांत में एक सरकार है, वो इस्तीफ़ा देना नहीं चाहती.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी पीडीएम पर तंज़ करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री की कुर्सी किसी लाडले या लाडली के लिए इंटर्नशिप नहीं. इमरान ख़ान ब्लैकमेल नहीं होंगे. विपक्ष को हिसाब देना होगा.''
ख़्वाजा आसिफ़ की गिरफ़्तारी पर हंगामा
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और मुस्लिम लीग(नवाज़) के वरिष्ठ नेता ख़्वाजा आसिफ़ को आय से अधिक संपत्ति के मामले में नैब ने गिरफ़्तार कर लिया है. नैब अदालत ने उन्हें 14 दिनों की नैब हिरासत में भेज दिया है.
उनकी गिरफ़्तारी पर ऊपरी सदन में जमकर हंगामा हुआ. विपक्ष का कहना है कि लोगों की पगड़ियां उछाली जाती हैं, उन्हें बदनाम किया जाता है और फिर कुछ भी साबित नहीं होता, नैब ब्लैकमेल करने की संस्था बन गई है.
वहीं सरकार का कहना है कि नैब एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है और मौजूदा सरकार ने यह साबित कर दिया है कि क़ानून से ऊपर कोई नहीं.
नवाज़ शरीफ़ ने भी ख़्वाजा आसिफ़ की गिरफ़्तारी पर विरोध जताया था. उन्होंने ट्वीट किया था, "ख़्वाजा आसिफ़ की गिरफ़्तारी सेलेक्टर्स (सेना) और सेलेक्टेड (प्रधानमंत्री इमरान ख़ान) के गठजोड़ की अत्यंत निंदनीय कार्रवाई है. ऐसी हरकतों से सरकार की बौखलाहट का अंदाज़ा लगाया जा सकता है, लेकिन इस तरह की हरकतों से यह अपने अंजाम को और क़रीब ला रहे हैं. अंधे राजनीतिक इंतक़ाम के दिन गिने जा चुके हैं.''
अफ़ग़ान शांति वार्ता का अगला दौर पाँच जनवरी से दोहा में
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान सरकार के बीच बातचीत का अगला दौर दोहा में पाँच जनवरी से शुरू होगा. अफ़ग़ान शांतिवार्ता की शुरूआत दोहा में 12 सितंबर को हुई थी. इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने कहा था कि शांतिवार्ता देश के अंदर ही होनी चाहिए लेकिन अब वो भी दोहा में बातचीत जारी रखने के लिए रज़ामंद हो गए हैं.
हालांकि राष्ट्रपति के दफ़्तर से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार का अब भी यही मानना है कि बातचीत का अगला दौर और भविष्य में तमाम बातचीत अफ़ग़ानिस्तान के अंदर होनी चाहिए. लेकिन तालिबान अफ़ग़ानिस्तान के अंदर शांतिवार्ता कराने के सख़्त ख़िलाफ़ हैं और उन्होंने इस तरह की सरकार की हर पेशकश को अब तक ठुकरा दिया है.
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