रॉयल एनफील्ड की राह पर भारत का दामन थामतीं ब्रितानी मोटरसाइकिलें

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- Author, जस्टिन हार्पर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
क्लासिक ब्रिटिश मोटरबाइक कंपनी बीएसए ने पिछले महीने एलान किया है कि वह अपने भारतीय अरबपति मालिक के तहत खुद को फिर से खड़ा कर रही है.
एक और मशहूर ब्रिटिश ब्रैंड नॉर्टन को 2019 में एक भारतीय कंपनी ने खरीद लिया था. इस कंपनी की भी ग्रोथ को लेकर ऐसी ही योजनाएं हैं.
ये कंपनियां ऐतिहासिक रॉयल एनफील्ड के ही कदमों पर चल रही हैं.
रॉयल एनफील्ड अपने भारतीय मालिकों के हाथ आने के बाद से सफलता की नई ऊंचाइयां छू रही है. एक्सपर्ट्स को इस ट्रेंड को देखकर कोई आश्चर्य नहीं होता.
भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को मशहूर, लेकिन मुसीबतों से जूझ रहे ब्रैंड्स को खरीदने में दिलचस्पी दिखाने के लिए जाना जाता है और उन्हें यह उम्मीद होती है कि वे इन कंपनियों का कायापलट कर देंगे.

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ब्रिटेन में महिंद्रा
भारतीय अरबपति आनंद महिंद्रा ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि वे बीएसए ब्रैंड के तहत यूके में इलेक्ट्रिक बाइक्स बनाकर 'ब्रितानी मोटरबाइक इंडस्ट्री को फिर से खड़ा' कर सकते हैं.
महिंद्रा ग्रुप 2021 के मध्य से बर्मिंघम में मोटरबाइकों की असेंबली शुरू करना चाहता है.
दूसरी ओर, फिर से खड़ी की गई बीएसए जल्द ही ऑक्सफोर्डशायर के बैनबरी में एक रिसर्च इकाई तैयार करेगी ताकि इलेक्ट्रिक मोबरबाइक टेक्नोलॉजी विकसित की जा सके.
हालांकि, कंपनी पेट्रोल इंजन वाली बाइकें बनाना भी जारी रखेगी.
फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक, आनंद महिंद्रा की नेटवर्थ 1.7 अरब डॉलर है.
महिंद्रा ने कहा है कि यूके के मोटरसाइकिल प्रोडक्शन के इतिहास को देखते हुए उन्होंने यहां निवेश करने का फैसला किया है.

बीएसए की कहानी
बीएसए का मतलब है बर्मिंघम स्मॉल आर्म्स. इस कंपनी की नींव 1861 में पड़ी थी.
लेकिन, 1950 के दशक के आते-आते यह दुनिया की सबसे बड़ी मोटरसाइकिल कंपनी बन गई. ट्रायम्फ और सनबीम जैसे ब्रैंड्स इसी कंपनी के मालिकाना हक में आते हैं.
लेकिन, यह दिवालिया हो गई और 1970 के दशक में इसका उत्पादन बंद हो गया. बाद में 2016 में महिंद्रा ग्रुप ने इसे खरीद लिया था.
बीएसए पर आधिकारिक रूप से क्लासिक लीजेंड्स का मालिकाना हक है. इस कंपनी में महिंद्रा ग्रुप की 60 फीसदी हिस्सेदारी है.
इस संयुक्त उद्यम को यूके की सरकार का समर्थन मिला और सरकार ने इलेक्ट्रिक बाइक्स विकसित करने के लिए बीएसए को 46 लाख पाउंड का अनुदान दिया.
सरकार को उम्मीद है कि इस मदद से कम से कम 255 नौकरियां पैदा होंगी.

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मोटर स्पोर्ट्स कंसल्टेंट स्कॉट लुकाइटिस कहते हैं, "एक क्लासिक ब्रिटिश मशीन का आकर्षण युवा खरीदारों को अपनी ओर खींचेगा. अगर वे लुक और फील को बरकरार रखते हुए एक परफॉर्मेंस देने वाली इलेक्ट्रिक बाइक बना पाए तो शायद वे सफल रहेंगे."
आनंद महिंद्रा ने बीबीसी को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि यह छोटा वेंचर पूरे यूके के बाइक बनाने के कारोबार में आए पुनर्जागरण का संकेत देगा.
अप्रैल में नॉर्टन को भारतीय मैन्युफैक्चरर टीवीएस मोटर ने 1.6 करोड़ पाउंड की डील में खरीद लिया था. नॉर्टन की नींव 1898 में पड़ी थी और यह उन चुनिंदा ब्रिटिश मोटरसाइकिल ब्रैंड्स में से है जो अभी भी जिंदा हैं. इसे मोटरस्पोर्ट बाइक्स बनाने के लिए खासतौर पर जाना जाता है.
इसके सबसे मशहूर मॉडल्स में डोमिनेटर और कमांडो शामिल हैं. 1980 के दशक में नॉर्टन इंटरपोल का इस्तेमाल यूके की पुलिस करती थी. विंटेज मॉडल्स को कलेक्शन वाले आइटमों के तौर पर देखा जाता था.
पिछले महीने नॉर्टन ने एक सीमित मात्रा में कमांडो क्लासिक बाइक्स के साथ बाइक्स को फिर से बनाना शुरू कर दिया. कंपनी 2021 की शुरुआत में अपनी पूरी ताकत से उत्पादन शुरू करना चाहती है.

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कंपनी के अंतरिम चीफ एग्जिक्यूटिव जॉन रसेल कहते हैं, "इसके बाद हम कछ मॉडल्स का प्रोडक्ट साइकिल शुरू कर देंगे. हम कुछ और नए मॉडल्स का भी खुलासा करेंगे."
उन्होंने कहा, "अत्याधुनिक नए प्लांट्स के साथ उत्पादन में तेज रफ्तार से इजाफा होगा."
कंसल्टेंसी फर्म फ्रॉस्ट एंड सुलीवान में ऑटोमोटिव एक्सपर्ट विवेक वैद्य कहते हैं, "ये ब्रिटिश ब्रैंड्स भारतीय सड़कों पर नियमित रूप से दिखाई देते थे. पुरानी फिल्मों में आप इन्हें देख सकते हैं. इन्हें पुलिस भी इस्तेमाल करती थी."
वे कहते हैं कि भावनात्मक वजहों को हटा भी दिया जाए तो भारतीय कंपनियां मजबूत कारोबारी वजहों के चलते इनमें निवेश कर रही हैं.

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वे कहते हैं, "ये ब्रैंड्स मुश्किलों से जूझ रहे हैं, ये घाटे में चल रहे हैं या इन्हें आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है. भारतीय कंपनियां इसे एक मशहूर ब्रैंड को खरीदने के मौके के तौर पर देख रही हैं जिससे उन्हें पश्चिमी बाजारों में पैर रखने में मदद मिल सकती है."
वैद्य जगुआर लैंड रोवर की ओर संकेत करते हैं जिसे टाटा ग्रुप ने 2008 में खरीद लिया था और इसे एक मुनाफा कमाने वाली कंपनी में बदल दिया.
वे कहते हैं, "यह भारतीय कंपनियों की एक जांची-परखी रणनीति है. वे एक ब्रैंड खरीदते हैं और इसे फिर नए देशों में ले जाते हैं और इसके मुनाफे और कारोबार में इजाफा करते हैं. इन ब्रैंड्स को इसी तरह से बढ़ाया जाना चाहिए."

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ब्रिटिश कंपनी रही रॉयल एनफील्ड आक्रामक तरीके से विस्तार कर रही है और कंपनी का मकसद एशिया में मोटरबाइक्स खरीदारी के दुनिया के सबसे बड़े बाजार पर पकड़ बनाना है.
दुनिया के सबसे पुराने बाइक ब्रैंड्स में से एक रॉयल एनफील्ड पर 1994 से भारत के आयशर ग्रुप का मालिकाना हक है. हाल में ही कंपनी ने थाइलैंड में नई फैक्टरी खोलने की योजनाओं का एलान किया है.
नया प्लांट एक साल के भीतर ही काम करना शुरू कर देगा और यह भारत के बाहर कंपनी की सबसे बड़ी फैक्टरी होगी.
इस इलाके में 250 से 750 सीसी सेगमेंट में रॉयल एनफील्ड की बिक्री पिछले एक साल में 88 फीसदी बढ़ी है.
हालांकि, ये ऐतिहासिक ब्रैंड्स 1950 और 60 के दशक के बाद से भले ही मुश्किलों से गुजर रहे हैं, लेकिन ये ब्रैंड्स खत्म नहीं हुए हैं. ये बात अलग है कि इन पर अब पूरी तरह से ब्रिटिश कंपनियों का मालिकाना हक नहीं रहा.
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