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'क्या वायु प्रदूषण से हुई नौ साल की एला की मौत?'
श्वास रोग से पीड़ित नौ साल की बच्ची की मौत के मामले में सोमवार को फिर से जांच शुरू की गई है. एक मेडिकल रिपोर्ट में उसकी बीमारी और उसके घर के पास की ख़राब वायु गुणवत्ता के बीच सीधा संबंध होने की बात कही गई है. इस बच्ची का घर एक व्यस्त सड़क से नज़दीक ही था.
एला, ब्रिटेन और शायद दुनिया की पहली इंसान हो सकती हैं, जिनकी मौत "वायु प्रदूषण" के कारण हुई. फिलहाल इस मामले की जांच जारी है.
एला की मौत 2013 में हुई थी. इससे पहले तीन साल तक वो बीमार रही थीं. मृत्यु प्रमाण पत्र में एला की मौत का कारण 'एक्यूट रेस्पिरेटरी फेलियर' यानी सांस लेने में बेहद परेशानी बताया गया.
2014 में की गई तहकीकात में निष्कर्ष निकला कि इसकी वजह शायद "हवा में कुछ होना" हो सकता है.
उस वक़्त तक किसी ने भी एला की बीमारी का कारण वायु प्रदूषण होने की बात नहीं कही थी, लेकिन उनकी मां रोसमन्ड ने ठान लिया कि वो पता लगाएंगी की आख़िर रिपोर्ट में लिखा "हवा में कुछ" आख़िर क्या था.
10 साल पहले जब एला बीमार हुई थी, रोसमन्ड तब से सवाल पूछ रही थीं कि उनकी हंसती-खेलती, सेहतमंद बच्ची कैसे अचानक से इतनी बीमार हो गई? अस्थमा के दौरों का कारण क्या था?
अब हो सकता है कि रोसमन्ड को आने वाले 10 दिनों में अपने कुछ जवाब मिल जाएं.
रोसमन्ड को तीन साल का वो हर पल याद है जब उनकी बच्ची बीमार थी. कितनी बार एला की हालत बिगड़ी. उन्हें कैसे क़रीब 30 बार एम्बुलेंस बुलानी पड़ी, एला को ले उन्हें लंदन के पांच अलग-अलग अस्पतालों में जाना पड़ा. चार बार कैसे उनकी बेटी को वेंटिलेटर पर रखा गया. कैसे डॉक्टरों ने उनसे कहा कि वो कोमा के दौरान उससे बात करें, ताकि वो रिकवर कर सके.
रोसमन्ड ख़ुद उत्तरी लंदन में पैदा हुई थी, लेकिन वो बताती हैं कि उनके बच्चे दक्षिण-पूर्वी लंदन के "लूईशम में पैदा और वहीं पले बढ़े". एला तीन बच्चों में उनकी सबसे बड़ी औलाद थी.
रोसमन्ड अपने घर का पता नहीं बताना चाहतीं, जो साउथ सर्कुलर से महज़ कुछ मीटर दूर है. साउथ सर्कुलर रोड लंदन की सबसे भीड़भाड़ वाली सड़कों में से एक है. एला का स्कूल घर से आधे घंटे की दूरी पर था. स्कूल भी ट्रैफिक वाली जगह के पास था.
एला जब सात साल की थी, तब रोसमन्ड को पता चला कि उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या है. ये अक्टूबर 2010 की बात है.
एला अपनी मां के साथ कोई स्मारक देखने गई थी, एला को ज़ुकाम था और वो सीढ़ियां चढ़ रही थी, बीच में ही उसने बोला कि मां मैं और नहीं चढ़ पाऊंगी.
वापस लौटने पर एला को खांसी हो गई, उसकी खांसी की आवाज़ कुछ इस तरह थी जैसे धुम्रपान करने वाले खांसते हैं. इसके कुछ हफ़्ते बाद ही एला पहली बार कोमा में चली गई.
रोसमन्ड याद करती हैं कि इसके बाद के 28 महीने बहुत बुरे थे. एला के कई टेस्ट हुए और पता चला कि उन्हें अस्थमा की गंभीर समस्या है.
एला को कई बार अस्पताल ले जाना पड़ा. एक बार जब एला इंटेंसिव केयर में थी तो रोसमन्ड से डॉक्टर ने कहा कि "वो जो भी कर सकते थे, कर चुके हैं. अब एला को ख़ुद ही इससे लड़ना होगा."
रोसमन्ड के लिए 15 फरवरी 2013 की वो रात किसी बुरे सपने की तरह है जब उनकी बेटी ने सांस लेना बंद कर दिया. रोसमन्ड ने एम्बुलेंस बुलाई और सुबह-सुबह अस्पताल में उनकी बेटी को मौत हो गई.
रोसमन्ड ने अस्पताल वालों से कहा कि वो उनकी बेटी का "सिर से पैर" तक टिशू सैंपल ले लें. वो कहती हैं कि उन्होंने शव को कब्र से निकालने के बारे में सुना था और वो ऐसा नहीं चाहती थीं.
उन्होंने क़ानूनी सलाह ली और कई लोगों से बात की. 2015 में प्रोफ़ेसर (अब सर) स्टीफन होल्गेट, जो एक सरकारी सलाहकार और अस्थमा व वायु प्रदूषण पर ब्रिटेन के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक हैं, उन्होंने एला के बारे में एक लेख पढ़ा और उनसे संपर्क किया.
रोसमन्ड ने उन्हें टिशू सैंपल मुहैया कराए और उन्होंने एला के मेडिकल रिकॉर्ड देखे.
उन्होंने पूरे डेटा का विश्लेषण किया, जिसमें परिवार के घर के नज़दीक के पॉल्यूशन मॉनिटर्स की रीडिंग भी शामिल थे. इसके बाद वो इस नतीजे पर पहुंचे कि एला की स्थिति का सीधा संबंध नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2), और हानिकारक वायुजनित कण जैसी विषैली गैसों से था.
जिस रात एला की मौत हुई, उस रात लूईशम एक अदृश्य लेकिन घने, ज़हरीली धुंध से ढंका हुआ था.
स्टीफन होल्गेट ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, "वायु प्रदूषण का ग़ैर-क़ानूनी स्तर नहीं होता तो एला की मौत भी नहीं होती."
रोसमन्ड ने कहा, "जब मैंने रिपोर्ट पढ़ी तो मुझे बहुत गुस्सा आया. इससे पहले किसी ने भी हमें वायु प्रदूषण के बारे में कुछ भी नहीं कहा था. हम इसका जवाब चाहते थे. ये पर्यावरण से जुड़ा जवाब था. लेकिन होल्गेट ने कहा कि वो 97 फीसदी आश्वस्त हैं, वो 40 साल से ये काम कर रहे हैं."
रोसमन्ड अब अपने दूसरे बच्चों के लिए डरती हैं. वो जैसे ही खांसते हैं, उन्हें चिंता हो जाती है.
ताज़ा जांच में सभी सबूतों को देखा जाएगा, जिसमें स्टीफन होल्गेट की रिपोर्ट भी शामिल है, और फ़ैसला किया जाएगा कि क्या प्रदूषण के ग़ैर-क़ानूनी स्तर की वजह से उनकी बच्ची की जान गई.
ये भी देखा जाएगा कि क्या केंद्र और स्थानीय सरकार लूईशम को सुरक्षित रखने के लिए और भी कुछ कर सकती थी.
सरकार का अनुमान है कि ब्रिटेन में वायु प्रदूषण के लॉन्ग-टर्म एक्सपोज़र से मरने वालों की संख्या एक वर्ष में 30,000 से अधिक रही. हालांकि, किसी व्यक्ति की मौत का कोई सीधा संबंध नहीं मिला.
तो क्या छोटी एला पहली इंसान होंगी जिनकी मौत का संबंध वायु प्रदूषण से होगा?
रोसमन्ड कहती हैं कि वो अपनी बेटी की मौत की जांच करने वाले अधिकारियों या किसी स्वास्थ्यकर्मी पर आरोप लगाने की कोशिश नहीं कर रही हैं. ना ही वो ताज़ा जांच के नतीजों को लेकर पहले से कोई राय बना रही हैं.
हालांकि इसमें कोई शक नहीं है कि वो और उनकी टीम किस नतीजे की उम्मीद कर रही है. अगर ये साबित हो जाता है कि एला (शायद दुनिया में) पहली शख़्स होंगी जिनकी मौत वायु प्रदूषण की वजह से हुई तो ये बड़े बदलाव की ओर इशारा हो सकता है.
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