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निवार: किसने दिया इस तूफ़ान को यह नाम?
- Author, भरनी धरन
- पदनाम, बीबीसी तमिल
मौसम विभाग ने तमिलनाडु और पुद्दुचेरी के तटीय इलाक़ों में निवार चक्रवाती तूफ़ान की वजह से भारी बारिश की आशंका जताई है.
इस तूफ़ान के दौरान हवा की रफ़्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक हो सकती है. इस दौरान बहुत तेज़ बारिश (क़रीब 20 सेंटीमीटर प्रति दिन) भी हो सकती है.
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ घंटों के दौरान यह चक्रवाती तूफ़ान करायकल और मामल्लापुरम के बीच से गुज़रेगा.
निवार इस साल बंगाल की खाड़ी से उठने वाला दूसरा बड़ा तूफ़ान है. इससे पहले मई के महीने में अम्फन तूफ़ान आया था.
निवार को नाम किसने दिया?
इस तूफ़ान का नाम ईरान की ओर से सुझाया गया है. यह 2020 में उत्तर हिंद महासागर से उठे चक्रवातों के लिए जारी नामों की सूची से इस्तेमाल किया गया तीसरा नाम है. निवार का मतलब है रोकथाम करना.
तीन दिन पहले (22 नवंबर को) सोमालिया में जो चक्रवाती तूफ़ान आया था उसे भारत ने नाम दिया था. इसे 'गति' नाम दिया गया था जिसका आशय रफ़्तार से है.
एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) और विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) ने साल 2000 में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने चक्रवातों को नाम देने की पद्धति शुरू की.
इसके तहत बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों के एक समूह ने बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के लिए 13 नामों की एक सूची सौंपी. 2018 में इन देशों के पैनल में ईरान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन का नाम भी जुड़ गया. इस पैनल का काम चक्रवातों के नाम तय करना है.
इन देशों की ओर से सुझाए गए नाम देश के नाम की वर्णमाला के हिसाब से सूचीबद्ध किए जाते हैं. इस सूची की शुरुआत बांग्लादेश से होती है.
फिर इसके बाद इसमें भारत, ईरान, मालदीव, ओमान, पाकिस्तान का नाम आता है.
इस क्रम के हिसाब से ही चक्रवातों के नाम रखे जाते हैं. निवार के बाद जिन चक्रवातों के नाम सुनाई पड़ने वाले हैं वो हैं बुरेवी (मालदीव), तौकते (म्यांमार), यास (ओमान) और गुलाब (पाकिस्तान). अप्रैल 2020 में इन नामों वाली नई सूची सदस्य देशों की ओर से स्वीकृत की गई है.
चक्रवात के नाम रखने के पीछे मक़सद
पूरी दुनिया में क्षेत्रवार छह विशेष मौसम केंद्र और पाँच चक्रवात चेतावनी केंद्र हैं. इन केंद्रों का काम चक्रवात से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करना और उनके नाम रखना है. छह विशेष मौसम केंद्रों में से एक भारतीय मौसम विभाग भी है जो चक्रवात और आंधी को लेकर एडवायज़री जारी करता है.
नई दिल्ली स्थित इस केंद्र का काम उत्तर हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का नामकरण करना भी है. उत्तर हिंद महासागर के तहत ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर आते हैं.
चक्रवातों के नाम रखने की वजह से वैज्ञानिक समुदाय, आपदा प्रबंधकों, मीडिया और आम लोगों में हर चक्रवात को अलग-अलग पहचानने में मदद मिलती है. इससे जागरूकता फैलाने में भी आसानी होती है.
क्षेत्र में एक ही वक़्त पर दो चक्रवात आने की स्थिति में कोई उलझन नहीं पैदा होती है. किस चक्रवात की बात हो रही है इसे आसानी से याद किया जा सकता है. चक्रवात से संबंधी चेतावनी को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँचाने में मदद मिलती है.
इसलिए अलग-अलग महासागरीय क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नामकरण उस क्षेत्र में मौजूद विशेष मौसम केंद्र या चक्रवात चेतावनी केंद्र करते हैं. मस्कत में साल 2000 में ईएससीएपी और डब्लूएमओ के 27वें सम्मेलन के बाद चक्रवातों के नाम रखने को लेकर सैद्धांतिक तौर पर रज़ामंदी हुई है और साल 2004 के सितंबर महीने से सदस्य देशों के बीच लंबे विमर्श के बाद इसकी शुरुआत हुई.
उस वक़्त सूची में आठ देशों की ओर से सुझाए गए नाम शामिल थे. इस सूची में अब तक इस्तेमाल हुए लगभग सभी नाम थे सिर्फ़ आख़िरी अम्फन को छोड़कर.
2018 में ईएससीएपी और डब्लूएमओ के 45वें सम्मेलन में चक्रवातों के नाम वाली नई सूची तैयार की गई. इसमें पाँच नए सदस्य देशों के भी सुझाए गए नाम शामिल किए गए थे.
ये देश थे ईरान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन. इसके बाद कुल 13 सदस्य हो गए थे. इस सम्मेलन में भारतीय मौसम विभाग के डॉक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा को विभिन्न सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई ताकि सभी तय मापदंडों का पालन करते हुए चक्रवातों का नामकरण किया जा सके.
उनकी तैयार की गई रिपोर्ट को म्यांमार में हुए 46वें सम्मेलन में पेश किया गया और फिर उस पर विचार-विमर्श करने के बाद अप्रैल 2020 को मंज़ूर किया गया.
नामकरण में किन मापदंडों का पालन किया जाता है?
- प्रस्तावित नाम किसी भी राजनीतिक पार्टी, शख्सियत, धर्म, संस्कृति और लिंग के आधार पर नहीं होने चाहिए.
- नाम ऐसा होना चाहिए जिससे किसी समूह या तबक़े की भावना आहत न हो.
- यह सुनने में बहुत क्रूर या रुखा नहीं लगना चाहिए.
- यह कम शब्दों का और आसानी से बोला जाने वाला होना चाहिए और किसी भी सदस्य देशों के लिए आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए.
- यह अंग्रेज़ी के सिर्फ़ आठ अक्षरों का होना चाहिए.
- प्रस्तावित नाम उसके उच्चारण और वॉयस ओवर के साथ होने चाहिए.
- पैनल के पास किसी भी नाम को ख़ारिज करने का अधिकार है, अगर किसी मापदंड पर वो नाम खड़ा नहीं उतरता है.
- किसी तरह की आपत्ति दर्ज करने की स्थिति में तय नामों की फिर से वार्षिक सम्मेलन में पैनल की मंज़ूरी से समीक्षा की जा सकती है.
- एक नाम का दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. इसलिए हर बार नया नाम होना चाहिए. प्रस्तावित नाम दिल्ली स्थित केंद्र के अलावा दुनिया के किसी भी मौसम केंद्र में दर्ज नहीं होना चाहिए.
आठ देशों ने 2004 में जो सूची तैयार की थी, उसमें दर्ज नाम अम्फन तूफ़ान के आने तक समाप्त हो गए थे.
भारतीय मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल कहते हैं कि उत्तर हिंद महासागर के क्षेत्र में हर साल आम तौर पर पाँच चक्रवात उठते हैं तो उस हिसाब से अगले 25 सालों तक जो नई सूची तैयार हुई है, उसमें शामिल नामों से ही काम चलता रहेगा.
नई सूची में प्रत्येक देश ने 13 नाम दिए हैं. अर्नब (बांग्लादेश), शाहीन और बहार (क़तर), लुलु (पाकिस्तान) और पिंकू (म्यांमार) इस सूची में शामिल कुछ ऐसे ही नाम हैं.
भारत की ओर से प्रस्तावित तूफ़ानों के नाम हैं गति, तेज़, मुरासु (तमिल का एक वाद्य यंत्र), आग, नीर, प्रभांजन, घुरनी, अंबुद, जलाधि और वेगा.
हर महासागरीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली समिति ही उसके नाम का निर्धारण करती है. वो अपनी सालाना बैठकों में यह तय करते हैं. ये वो पांच चक्रवात संबंधित क्षेत्रीय समितियाँ हैं जो इसके नाम का निर्धारण करती हैं.
1. ईएससीएपी/डब्लूएमओ चक्रवात समिति
2. चक्रवात पर डब्ल्यूएमओ/ईएससीएपी पैनल
3. आरए I चक्रवात समिति
4. आरए IV तूफ़ान समिति
5. आरए V चक्रवात समिति
नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशिष्ट मौसम केंद्र (आरएसएमसी) का काम मौसम में होने वाले परिवर्तनों पर नज़र रखना और चक्रवात से जुड़े दिशा-निर्देशों को डब्लूएमओ/ईएससीएपी पैनल के सदस्य देशों के लिए जारी करना है. इस क्षेत्र में चक्रवातों के नामाकरण की ज़िम्मेदारी भी इस केंद्र के ऊपर है.
भारतीय मौसम विभाग ने 28 अप्रैल, 2020 को 169 नए नामों की सूची जारी की है. इसमें डब्लूएमओ/ईएससीएपी पैनल के प्रत्येक देश ने 13 नाम दिए हैं.
आम लोग भी नाम सुझा सकते हैं
आम लोग भी भारतीय मौसम विभाग को सूची में शामिल करने के लिए नए नामों का सुझाव दे सकते हैं. बशर्ते की प्रस्तावित नाम कुछ बातों का ख्याल रखकर दिए गए हों. मसलन ये नाम छोटे और आसानी से समझ में आने वाले हो. सांस्कृतिक रूप से संवेदनाओं का ख्याल रखकर सुझाए गए हों और किसी भी तरह की भावनाओं को भड़काने वाले नहीं हों.
ये नाम इस पते पर भेजे जा सकते हैं-
महानिदेशक, भारतीय मौसम विभाग, मौसम भवन, लोदी रोड, नई दिल्ली-110003
तूफ़ान और चक्रवात क्या अलग हैं?
दक्षिण प्रशांत और हिंद महासागर में उठने वाले तूफ़ान को चक्रवात के नाम से जाना जाता है. उत्तरी अटलांटिक, मध्य उत्तरी प्रशांत और पूर्वी उत्तरी प्रशांत महासागर क्षेत्र में इसके लिए हरिकेन शब्द का इस्तेमाल किया जाता है तो वहीं उत्तर पश्चिमी प्रशांत महासागर क्षेत्र में इसे टाइफून कहते हैं.
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