ट्रंप बनाम बाइडन: इन दो राज्यों की सबसे बड़ी भूमिका, टिकी हैं सबकी नज़रें

अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव

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    • Author, तमारा गिल
    • पदनाम, बीबीसी मुंडो संवाददाता

डेमोक्रैटिक पार्टी की पूर्व राष्ट्रपति उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन इस बात को अच्छी तरह जानती हैं कि यह ज़रूरी नहीं कि अमेरिकी चुनाव में वोटर जिसे ज़्यादा वोट दे वही व्हाइट हाउस की बागडोर संभाले.

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष तरीक़े से होता है. इसका यही मतलब है कि कुछ इलाक़ों या वोटरों की अहमियत दूसरे इलाक़ों या वोटरों से ज़्यादा साबित होती है.

इस बार के चुनाव में व्हाइट हाउस में जीत कर वही उम्मीदवार पहुँचेगा या फिर वहां वही बरक़रार रह पाएगा, जिसे 538 में से कम से कम 270 इलेक्टोरल कॉलेज के वोट मिलेंगे.

अमेरिका में आबादी के हिसाब से हर प्रांत के वोट निर्धारित होते हैं. जो भी उम्मीदवार उस इलाक़े का सबसे ज़्यादा पॉपुलर वोट हासिल कर लेता है, अमूमन वही सारे इलेक्टोरल वोट ले जाता है.

चूंकि, कुछ राज्यों में डेमोक्रैटिक या रिपब्लिकन पार्टियों की ओर रुझान रहा है, इसलिए सबकी नज़र इस बात पर रहती है कि कहां यह ट्रेंड यह साफ़ नहीं है. इसका मतलब लोग यह देखते हैं कि किसी को जिताने में यह अस्पष्ट रुझान कितना अहम रोल निभाएगा.

इन राज्यों को 'पेंडुलम स्टेट' या 'हिंज' कहा जाता है. इस बार के चुनाव में इनकी संख्या दस से भी ज़्यादा है.

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आज की रात हर किसी की नज़र इन राज्यों पर है. बीबीसी मुंडो उन छह राज्यों के बारे में आपको बताना चाहता है जो निर्णायक साबित हो सकते हैं. ये राज्य हैं- नॉर्थ कैरोलाइना, फ्लोरिडा, पेंसिलवेनिया, मिशिगन, विस्कॉन्सिन और एरिज़ोना.

दो अन्य राज्यों, जॉर्जिया और टेक्सस में आबादी के स्वरूप में बदलाव से मुक़ाबला बहुत कड़ा हो गया है.

सबस पहले फ़ैसला वाला राज्य: नॉर्थ कैरोलाइना

शुरुआत पूरब से होती है. यह अमरीका का वह इलाक़ा है, जहां पोलिंग सबसे पहले बंद होगी और शुरुआती नतीजे भी सबसे पहले यहीं आएंगे.

नॉर्थ कैरोलाइना में 15 इलेक्टोरल वोट हैं लेकिन इन चुनावों का कोई स्पष्ट विजेता नहीं है. यहीं से सबसे पहले कड़े मुक़ाबले वाले राज्यों में रुझानों और नतीजों के आंकड़े आएंगे.

2008 में यहां पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा मामूली अंतर से जीते थे. इससे पहले यह रिपब्लिकन पार्टी का मज़बूत गढ़ था. इस राज्य में अफ्रीकी-अमरीकी वोटरों की बड़ी आबादी वाले शहर हैं.

पेशेवरों और कॉलेज छात्रों की भी थोड़ी आबादी है. लेकिन यहां ग्रामीण, व्हाइट्स और कंजर्वेटिव इलाक़ों की भी ठीक-ठाक मौजूदगी है. ट्रंप 2016 में यहां चार फ़ीसद के मार्जिन से जीते थे.

डोनाल्ड ट्रंप

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2012 में अपनी दूसरी पारी की उम्मीदवारी के दौरान ओबामा यहां ट्रंप से हार गए थे. यहां से अगर ट्रंप या मौजूदा डेमोक्रैटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन जीतते हैं तो ये दोनों के लिए अच्छी शुरुआत मानी जाएगी. स्टेट इलेक्टोरल काउंसिल का आकलन है कि यहां पर 80 फ़ीसद वोट पहले ही मतपत्र के ज़रिये डाल दिए जाएंगे या डाक से भेज दिए जाएंगे. इनके नतीजे वोटिंग बंद होने के तुरंत बाद आ जाने की संभावना है.

कुछ अहम बातें

  • अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के लिए पॉपुलर वोट का सबसे अधिक हिस्सा हासिल करने की ज़रूरत नहीं होती. आपको इलेक्टोरल कॉलेज के 538 में से कम कम 270 वोट हासिल करने होते हैं.
  • इस चुनाव में पहले की तुलना में कई लाख ज्यादा वोटर डाक के ज़रिये वोटिंग कर रहे हैं. लिहाज़ा चुनाव के अंतिम नतीजे आने का समय लंबा खिंच सकता है. बैलेट पेपर की छंटाई और गिनती में वक़्त लगेगा.
  • चूंकि डाक से वोटिंग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दिख रही है इसलिए शुरुआती रुझान में आगे दिखने वाले कैंडिडेट ही जीतेंगे, यह ज़रूरी नहीं. इसलिए प्रिलिमनरी नतीजों पर नज़र रखनी होगी.

नॉर्थ कैरोलाइना में अधिकारियों ने डाक के ज़रिये डाले गए वोटों को गिनने का काम शुरू भी कर दिया है. इससे गिनती की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है और यह कथित 'ब्लू मिराज' यानी डेमोक्रैटिक उम्मीदवारों की जीत की लहर पैदा कर सकती है. इससे डेमोक्रैटिक समर्थक ज़्यादा से ज़्यादा डाक के ज़रिये वोटिंग के लिए प्रेरित हो सकते हैं. लेकिन रात बीतने के साथ ही रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन बढ़ता दिख सकता है या फिर जब उनकी वोटों की गिनती होगी तो उनके वोटरों की संख्या बढ़ती दिख सकती है.

इस राज्य में 12 नवंबर तक डाक से वोट मंज़ूर की जाएगी. हालांकि इन्हें चुनाव के दिन या उसी दिन भेजना होगा. इसलिए कांटे की टक्कर हुई तो इन वोटरों के वोट काफ़ी होंगे और इससे अनिश्चितता का दौर थोड़ा और लंबा खिंच सकता है.

जो बाइडन

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राष्ट्रपति उम्मीदवार की उम्मीदों को ध्वस्त करने वाला राज्य: फ्लोरिडा

नॉर्थ कैरोलाइना भले ही जंग का पहला मोर्चा हो लेकिन इसके बाद सबकी नज़रें फ्लोरिडा की ओर होंगी. फ्लोरिडा में वोटरों के लिहाज़ से बड़ी विविधता है. यहां 29 इलेक्टोरल वोट हैं. यह राज्य राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के लिए बेहद अहम रहा है. यहां से आपको हरी झंडी मिल सकती है या फिर आपकी संभावनाएं यहीं आकर ख़त्म भी हो सकती हैं.

इस साल भी यह राज्य नतीजों के ट्रेंड की अपनी ख़ासियतों को लेकर चुनावी मैदान में मौजूद है. हाल के सर्वेक्षणों में यह कड़े मुक़ाबले वाले राज्य के तौर पर उभरा है. दूसरे राज्यों के उलट यहां इस बात के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं कि बाइडेन आगे चल रहे हैं या ट्रंप.

'न्यूयॉर्क टाइम्स' का मानना है कि यहां किसी को भी एक या दो प्रतिशत प्वाइंट से जीत मिल सकती है.

इसलिए इस बार फ्लोरिडा में एक-एक वोटर अहम है. चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि अगर ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव जीतना है तो फ्लोरिडा पर अपना परचम लहराना होगा. चुनाव से जुड़े एक ख़ास पोर्टल FiveThirtyEight के मुताबिक़ अगर ट्रंप यहां हार जाते हैं तो व्हाइट हाउस में उनके दोबारा प्रवेश की संभावना एक फ़ीसद कम हो जाएगी.

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यह ऐसा राज्य है जहां आपको शुरुआती नतीजों के बारे में भी सतर्क रहना होगा. कोरोना संक्रमण, डाक के ज़रिये होने वाली वोटिंग और शुरुआती वोटिंग (चुनाव के दिन से पहले) से लैस इस पूरी वोटिंग प्रक्रिया की तमाम चीज़ें नतीजों के रुझानों के बारे में भ्रम पैदा कर सकती हैं.

उम्मीद की जा रही है कि फ्लोरिडा उन राज्यों में से एक होगा, जहां से सबसे तेज़ नतीजे आएंगे क्योंकि यहां मेल से वोटिंग का लंबा अनुभव रहा है. इसके अलावा यहां पहले डाले गए (शुरुआती वोटिंग) वोटों की गिनती भी कई सप्ताह से चल ही रही है. चुनाव की रात इसमें अहम रुझान देखने को मिल सकता है.

FiveThirtyEight के चुनाव विश्लेषक जैफ़री स्केले ने बीबीसी मुंडो से कहा, "फ्लोरिडा में वोटिंग की जिस तरह से प्रोसेसिंग होती है उससे यहां लाल रुझान जैसा भी कुछ दिख सकता है".

लाल रुझान का मतलब यह है कि यहां वोटरों का झुकाव रिपब्लिक पार्टी की ओर हो सकता है.

स्केले ने उन सर्वे नतीजों का ज़िक्र किया, जिनमें कहा गया है कि डाक से वोट डालने वाले वोटर अमूमन डेमोक्रैटिक पार्टी के समर्थक हैं. दरअसल, ज़्यादातर रिपब्लिकन समर्थकों ने कहा है कि वे चुनाव के दिन ही वोट देंगे.

वह कहते हैं, "इसलिए मेरा मानना है कि फ्लोरिडा जैसे राज्य में यह मुमकिन है कि पहले वोटिंग करने वाले या डाक से वोटिंग के जो नतीजे आएं, वो शुरुआत में डेमोक्रैटिक पार्टी की बढ़त दिखाएं लेकिन बाद में समर्थन रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुकता दिखाई दे. ज़्यादातर रिपब्लिकन समर्थकों के चुनाव के दौरान वोटिंग करने से रिपब्लिकन पार्टी का पलड़ा भारी दिख सकता है."

फ्लोरिडा को लेकर कई क़यास चल रहे हैं. फ्लोरिडा का सबसे ज़्यादा आबादी वाला काउंटी मियामी-डाड इस मामले में निर्णायक साबित हो सकता है. 'मियामी हेराल्ड' अख़बार के मुताबिक़ इस रविवार को यहां डेमोक्रैटिक समर्थकों की तुलना में रिपलब्किन समर्थक सात फ़ीसद ज़्यादा रजिस्टर हुए.

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2016 में जहां गिर गई थी नीली दीवार: विस्कॉन्सिन, मिशिगन और पेंसिलवेनिया

अगर ट्रंप फ्लोरिडा में फ़तह हासिल कर लेते हैं तो इसके बाद पूरा ध्यान कथित 'ब्लू वॉल' पर केंद्रित हो जाएगा. यह डेमोक्रैटिक पार्टी का रंग है.

2016 के राष्ट्रपति चुनाव में जब हिलेरी क्लिंटन उम्मीदवार थीं तो विस्कॉन्सिन, मिशिगन और पेंसिलवेनिया को डेमोक्रैटिक पार्टी का मज़बूत गढ़ माना जा रहा था. लेकिन यहां ट्रंप मामूली अंतर से जीतने में सफल रहे थे.

विस्कॉन्सिन, मिशिगन और पेंसिलवेनिया उद्योग के केंद्र हैं. इन राज्यों को 'रस्ट बेल्ट' कहा जाता है. 20वीं सदी में अमेरिका की समृद्धि को बढ़ाने में इस बेल्ट का अहम योगदान रहा है लेकिन बाद में यहां से उद्योग ख़त्म होने लगे.

यहां की नौकियों पर तेज़ होती ग्लोबल प्रतिस्पर्धा और आउटसोर्सिंग की मार पड़ने लगी. इससे यहां की आबादी भी घटती चली गई.

यहां सभी राज्यों को मिला कर ट्रंप को 80 हज़ार वोट मिले थे. हर राज्य में उन्हें एक फ़ीसद से कम वोट मिले. चुनाव सर्वेक्षणों में बाइडन को आगे दिखाया जा रहा है लेकिन ट्रंप एक बार फिर से अमेरिका को औद्योगिक महाशक्ति बनाने वाली स्पीच दे रहे हैं.

अपने भाषणों में वह बार-बार इसे दोहराते हैं. चुनाव सर्वेक्षणों में यहां ट्रंप को 4 से 6 फ़ीसद की बढ़त मिलते दिखाया जा रहा है.

यहां वोटिंग रात नौ बजे तक बंद हो जाएगी लेकिन नतीजे आने में वक़्त लगेगा क्योंकि मिशिगन में 16 इलेक्टोरल वोट हैं. यहां चुनाव से पहले डाक के ज़रिये या काफ़ी पहले डाले गए वोटों (शुरूआती वोटिंग) की गिनती की इजाज़त नहीं मिली है. इसलिए यहां देरी की गुंजाइश बनी हुई है. इसके साथ ही यहां नतीजों में बदलाव भी दिख सकता है.

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FiveThirtyEight के चुनाव विश्लेषक स्केले का कहना है, "इस बेल्ट के तहत पेंसिलवेनिया में शुरुआत में डेमोक्रैटिक पार्टी को थोड़ा झटका लग सकता है क्योंकि चुनाव अधिकारी वोटिंग के दिन सुबह सात बजे तक डाक के ज़रिये डाले गए वोटों को नहीं गिन सकते. लिहाज़ा इलेक्शन के दिन इस बात की पूरी संभावना है कि शुरुआती नतीजे रिपब्लिकन रुझान दिखाएं. इस अहम राज्य में डाक से किए गए ज्यादा वोट पोलिंग स्टेशनों में रख दिए गए हैं. इसलिए यहां वोटों की गिनती ज़्यादा रफ़्तार पकड़ सकती है.

"हालांकि 20 इलेक्टोरल वोट वाले मिशिगन के अधिकारियों और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अंतिम नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले इस राज्य में छह तारीख़ तक ज़्यादातर वोटों की गिनती पूरी हो जाएगी. इसलिए टक्कर कांटे की हुई और पेंसिलवेनिया के वोटों से ही नतीजे तय होने हों तो विजेता का नाम जानने के लिए इंतज़ार करना होगा. कहने की ज़रूरत नहीं कि नतीजों को लेकर विवाद भी होंगे और इसके लिए क़ानूनी लड़ने के लिए दोनों पक्ष के लोग तैयारी कर ही रहे हैं."

गवर्नर टॉम वुल्फ़ ने पिछले सप्ताह कहा था, "यह तय है कि इस बार नतीजे आने में वक़्त लगे. शायद हमें वोटिंग की रात नतीजों के बारे में जानकारी न मिले."

बाइडन और ट्रंप दोनों ने मिडवेस्ट के इस इलाक़े को काफ़ी तवज्जो दी है. उन्होंने इस इलाक़े के कई दौरे किए हैं. बाइडन की टीम की ओर से दो नवंबर के एजेंडे से इसकी पुष्टि भी हो रही है कि इस इलाक़े पर काफ़ी ज़ोर दिया जा रहा है.

उनके साथ उप-राष्ट्रपति पद की डेमोक्रैटिक उम्मीदवार कमला हैरिस 2 नवंबर का दिन पेंसिलवेनिया में ही प्रचार करते हुए गुज़रने वाला था. बाइडन का एक और 'पेंडुलम स्टेट' ओहायो जाने का कार्यक्रम था. इसे भविष्य बताने वाला राज्य भी कहा जाता है क्योंकि दूसरे विश्वयुद्ध के बाद इस राज्य ने जिस कैंडिडेट का समर्थन किया, उसी ने व्हाइट हाउस से राज किया.

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जहां तक ट्रंप का सवाल है तो उनका इस सोमवार को नॉर्थ कैरोलाइना, पेंसिलवेनिया और विस्कॉन्सिन में रैलियों का कार्यक्रम था.

नतीजे आने के मामले में विस्कॉन्सिन और मिशिगन की भी स्थिति भी पेंसिलवेनिया जैसी ही है. इन राज्यों के मामले में ज़्यादा संभावना इस बात की है कि चुनाव के नतीजे रात को या 4 नवंबर की सुबह आएं.

गवर्नर टोनी इवर्स ने इस महीने की शुरुआत में कहा था, "मैं समझता हूं कि विस्कॉन्सिन में हमें नतीजे चुनाव की रात या फिर अगले दिन मिल जाएंगे".

इस राज्य में 10 इलेक्टोरल वोट हैं. यहां के बारे में यह जानकारी मायने रखती है कि राज्य का क़ानून वोटों की गिनती रोकने की इजाज़त नहीं देता. लिहाज़ा बुधवार को भी वोटों की गिनती होती रहेगी. इसे कई जगहों पर पूरी रात वोटों की गिनती होती रहेगी और लोग नतीजों का इंतज़ार करते दिखेंगे.

यहां आ सकते हैं चौंकाने वाले अहम नतीजे: जॉर्जिया, एरिज़ोना, टेक्सस

जॉर्जिया, एरिज़ोना और टेक्सस की आबादी का स्वरूप काफ़ी बदल गया है. अब यहां समाज में ज़्यादा विविधता है. अलग-अलग तरह के लोग हैं. यह विविधता डेमोक्रैटिक पार्टी को एक नई उम्मीद बंधा रही है. यहां के तीनों राज्यों में 65 इलेक्टोरल वोट हैं.

यहां लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी को वोट डालने की परंपरा रही है. तीनों राज्यों ने 2016 में डोनाल्ड ट्रंप पर दांव लगाया था. इस बार भी इन तीनों राज्यों की अहम भूमिका होगी.

इसमें शायद सबसे चौंकाने वाला नतीजा या सबसे अलग नतीजा टेक्सस में दिख सकता है. 1976 से इसने अब तक किसी डेमोक्रैटिक उम्मीदवार के पक्ष में वोट नहीं दिया है. लेकिन हाल के दिनों में यह ख़ुद को 'युद्ध क्षेत्र' मानने लगा है.

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विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव सर्वेक्षणों में जिस एरिज़ोना में बाइडन को 1.1 फ़ीसद की बढ़त दिखाई जा रही है, वहां चुनाव की रात को ही नतीजे आ जाएंगे. लेकिन एक या दो उम्मीदवारों को मिल रही बढ़त स्पष्ट नहीं हुई तो नतीजे आख़िर तक साफ़ नहीं होंगे.

FiveThirtyEight के विश्लेषकों का मानना है जॉर्जिया और टेक्सस में ज़्यादातर वोटों की गिनती तीन नवंबर को हो जानी चाहिए. लेकिन यह बुधवार और गुरुवार तक चल सकती है. टेक्सस ने दूसरे राज्यों के उलट डाक से वोटिंग करने के नियमों में कोई ढील नहीं दी है.

यहां बड़ी संख्या में लोग डाक से वोटिंग करेगे. लेकिन यहां शुरुआती वोटिंग की वजह से 2016 की तुलना में वोटरों की संख्या बढ़ गई है. चुनावी सर्वेक्षणों में बाइडन को यहां दो प्वाइंट से पिछड़ते दिखाया गया है.

अगर बाइडन ग्रेट टेक्सस में जीतते हैं तो वह अपने खाते में 38 इलेक्टोरल वोट जोड़ कर इतिहास रच सकते हैं.

सेंटर फ़ॉर इलेक्टोरल रिसर्च एंड इनोवेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और जस्टिस डिपार्टमेंट के पूर्व अधिकारी डेविड बेकर ने बीबीसी मुंडो से कहा, "वोटिंग में लोगों की भागीदारी अचंभे में डालने वाली है".

इससे पहले हमारे इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ. चुनाव के दिन 9.40 करोड़ लोगों ने भी वोट डाले हैं. साल 2016 के जिस चुनाव में ट्रंप जीते थे उसमें 13.80 करोड़ लोगों ने वोट डाले थे.

बेकर कहते हैं, "इसका मतलब वोटरों ने इन चुनावों की चुनौतियों को समझा है और यही वजह है कि चुनाव बेहद कम अड़चनों के साथ संपन्न करा लिए जाते हैं."

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किसी को निर्णायक जीत नहीं मिली तो क्या होगा?

  • अगर तीन नवंबर को कोई साफ़ नतीजा नहीं निलकता है तो हमें कोई दिनों और सप्ताह तक इंतज़ार करना होगा. आख़िरी जांच के बाद ही कोई निर्णायक नतीजा आएगा.
  • अमेरिकी चुनाव में सभी वोटों का चुनाव की रात ना गिना जाना सामान्य बात है. लेकिन इस बार वोटों की गिनती में पहले से ज़्यादा वक़्त लग सकता है.
  • इसके साथ ही चुनाव नतीजों को लेकर क़ानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं. इससे चुनावी प्रक्रिया की अनिश्चितता और बढ़ जाएगी और आख़िर में अदालत को निर्णायक भूमिका अदा करनी होगी. जैसा साल 2000 में अल-गोर बनाम बुश के चुनाव में हुआ था.

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