डोनाल्ड ट्रंपः रियल एस्टेट कारोबारी से राष्ट्रपति कार्यालय तक

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अमेरिका के राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से पहले डोनल्ड ट्रंप अमेरिका के सबसे चर्चित और रंगीन अरबपतियों में शुमार थे.
कभी उनके राष्ट्रपति बनने को दूर की कौड़ी माना गया था. लेकिन अब वो राष्ट्रपति के तौर पर अपना पहला कार्यकाल पूरा करने की ओर हैं और दूसरी बार चुने जाने के लिए राष्ट्रपति पद की दौड़ में जो बाइडन से मुक़ाबला कर रहे हैं.
जब ट्रंप पहली बार चुनाव लड़ रहे थे तब उनकी उम्मीदवारी पर कई सवाल थे और उनकी कामयाबी पर शक के कई कारण.
उनके विवादित चुनाव अभियान में प्रवासी लोगों पर सख़्ती बरतना सबसे अहम मुद्दा रहा था. इसके अलावा उनका सेलिब्रिटी जीवन भी सवालों के घेरे में रहा.
लेकिन 2016 में 70 साल के रहे ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी की दौड़ में कई अनुभवी राजनेताओं को पछाड़ा था और अंततः राष्ट्रपति पद तक पहुँचे थे.
ट्रंप अब 74 साल के हैं. इस बार भी उनका चुनाव अभियान पिछली बार की ही तरह विभाजनकारी है.
ट्रंप का शुरुआती जीवन

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ट्रंप न्यूयॉर्क के रियल एस्टेट कारोबारी फ्रेड ट्रंप की चौथी संतान हैं. परिवार की बेशुमार दौलत के बावजूद उनसे पिता की कंपनियों में छोटे-मोटे काम करवाए गए. स्कूल में जब उन्होंने बदतमीज़ियां शुरू कीं तो तेरह साल की उम्र में उन्हें मिलिट्री अकादमी भेज दिया गया था.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ पेंसिलवेनिया के व्हार्टन स्कूल से उन्होंने डिग्री ली और कारोबार संभालने के लिए अपने पिता की पसंदीदा संतान बन गए. उन्हें बड़े भाई फ्रेड ट्रंप जूनियर पर तरजीह दी गई. फ्रेड बाद में पायलट बन गए और 43 साल की उम्र में अधिक शराब पीने की वजह से उनकी मौत हो गई. डोनाल्ड ट्रंप कहते रहे हैं कि भाई की मौत के बाद उन्होंने जीवन भर के लिए शराब और सिगरेट छोड़ दी थी.

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रियल एस्टेट कारोबार में आने के बारे में ट्रंप का कहना है कि वो अपने पिता से दस लाख डॉलर का क़र्ज़ लेकर कारोबार में आए थे. बाद में वो भी कंपनी का हिस्सा बन गए थे. उनके पिता रिहाइशी इमारतें बनाने का कारोबार करते थे. ट्रंप ने न्यूयॉर्क में अपने पिता के रियल एस्टेट कारोबार को बढ़ाया और फिर साल 1971 में कंपनी की कमान अपने हाथ में लेकर इसका नाम ट्रंप ऑर्गेनाइज़ेशन रख दिया. उनके पिता का देहांत साल 1991 में हो गया था. ट्रंप कहते हैं कि उनके पिता ही उनकी प्रेरणा थे.
द मुग़ल
डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रुकलिन में रिहाइशी इमारतें बनाने वाली अपनी कंपनी को मैनहेटन के चमकीले इलाक़े में पहुँचाया और यहां बड़े-बड़े प्रोजेक्ट बनाए. उन्होंने पुराने कोमोडोर होटल को द ग्रांड हयात में तब्दील कर दिया और ट्रंप कंपनी की सबसे चर्चित इमारत द ट्रंप टावर का फ़िफ़्थ एवेन्यू में निर्माण किया. इसके बाद ट्रंप के नाम से वो एक-एक करके इमारतें बनाते चले गए. ट्रंप प्लेस, ट्रंप वर्ल्ड टावर, ट्रंप इंटरनेशनल होटल एंड टावर. ये सूची लंबी है. मुंबई, इस्तांबुल और फ़िलीपींस मे भी ट्रंप टावर हैं.
ट्रंप ने होटल और केसीनो कारोबार भी किया. उनकी कंपनियों को चार बार दिवालिया होना पड़ा. ट्रंप की कंपनियां दिवालिया हुई थीं, ट्रंप नहीं.

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उन्होंने मनोरंजन जगत में भी क़दम रखा और यहां भी अपना साम्राज्य खड़ा कर लिया. साल 1996 से लेकर 2015 तक मिस यूनिवर्स में उनकी हिस्सेदारी थी. इसके अलावा मिस यूएसए, मिस टीन यूएसए जैसी सौंदर्य प्रतियोगिताओं के भी वह आयोजक थे.
साल 2003 में ट्रंप एनबीसी टीवी के शो एप्रेंटाइस में नज़र आए. इस शो में उम्मीदवार ट्रंप की कंपनी में नौकरी पाने के लिए एक-दूसरे से मुक़ाबला करते थे. उन्होंने इस शो के 14 सीज़न में काम किया और दावा किया कि इसके लिए उन्हें टीवी कंपनी की ओर से 21.3 करोड़ डॉलर का भुगतान किया गया.
उन्होंने कई किताबें लिखी हैं और उनका अपना ब्रांड भी है जो नेकटाई से लेकर पानी की बोतल तक बेचता है. फ़ोर्ब्स के मुताबिक़ ट्रंप की कुल संपत्ति की क़ीमत 2.5 अरब डॉलर है.
पिता और पति

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ट्रंप ने तीन शादियां की हैं. उनकी पहली पत्नी चेक एथलीट और मॉडल इवाना जेलनिकोवा थीं जिनसे उन्होंने साल 1990 में तलाक़ ले लिया था. इवाना से उनके तीन बच्चे हैं- डोनाल्ड जूनियर, इवांका और एरिक. ट्रंप और इवाना के बीच अदालत में चले मुक़दमे पर अख़बारों में ख़ूब सुर्ख़ियां बनी थीं. आरोप लगे थे कि ट्रंप अपनी पत्नी के साथ बदसलूकी करते थे. हालांकि इवाना ने बाद में इन आरोपों को ख़ारिज किया था.
इसके बाद साल 1993 में ट्रंप ने अभिनेत्री मार्ला मेपल्स से शादी की. 1999 में तलाक़ से पहने उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया जिसका नाम टिफ़नी है. ट्रंप ने अपनी मौजूदा पत्नी मेलानिया ट्रंप से साल 2005 में शादी की जिनसे उन्हें एक बेटा है बैरन विलियम ट्रंप. ट्रंप की पहली पत्नी से हुए बच्चे ही ट्रंप ऑर्गेनाइज़ेशन का संचालन करते हैं.
राजनीति में रूची

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ट्रंप ने साल 1987 में ही राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी में अपनी रूची दिखा दी थी. साल 2000 में वो रिफॉर्म पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर दौड़ में भी शामिल हुए थे.
साल 2008 के बाद से वो उन लोगों में शामिल हो गए थे जो बराक ओबामा के अमेरिकी होने पर शक ज़ाहिर करते थे. हालांकि वो दावे खोखले साबित हो चुके हैं. बराक ओबामा का जन्म अमेरिका के ही हवाई प्रांत में हुआ था.
ट्रंप ने बाद में ये तो स्वीकार किया कि उनके आरोपों में सच्चाई नहीं थी, लेकिन उन्होंने कभी भी बराक ओबामा से इसके लिए माफ़ी नहीं माँगी.
साल 2015 में ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर व्हाइट हाउस की दौड़ में शामिल होने की घोषणा भी कर दी थी और साल 2016 के चुनाव में उन्होंने अप्रत्याशित जीत भी हासिल की थी.
उस समय ट्रंप ने अपने आप को बाहरी और किसी तरह के दबाव से मुक्त उम्मीदवार बताते हुए कहा था कि उन्हें चुनाव लड़ने के लिए किसी और से पैसे माँगने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.
तब ट्रंप का नारा था 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन'. ट्रंप ने इस चुनाव अभियान में भी फिर से ये नारा दोहराया है. उन्होंने अमेरिका और मैक्सिको के बीच दीवार बनाने का वादा किया. मुसलमानों के अमेरिका आने पर अस्थायी रोक लगाने का वादा किया. ट्रंप सीमा पर दीवार तो नहीं बनवा सके लेकिन उन्होंने सात मुस्लिम देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर अस्थायी रोक ज़रूर लगा दी थी.
2016 के विजेता

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ट्रंप का चुनावी अभियान विवादों भरा रहा था. 2005 की एक रिकॉर्डिंग भी सामने आई थी जिसमें वो भद्दी टिप्पणी करते दिख रहे थे. उनकी अपनी पार्टी के लोगों ने दावे किए थे कि वो राष्ट्रपति पद के लिए फ़िट नहीं हैं.
लेकिन वो अपने समर्थकों से लगातार ये कहते रहे कि वो सभी ओपिनियन पोल के विपरीत जीत हासिल करेंगे. उस चुनावी साल में सर्वे उनकी प्रतिद्वंद्वी हिलेरी क्लिंटन को आगे बता रहे थे.
चुनावी पंडितों के विश्लेषणों को धता बताते हुए ट्रंप ने अप्रत्याशित जीत हासिल की और 20 जनवरी 2017 को अमेरिका के पैंतालीसवें राष्ट्रपति की शपथ ली. वो ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति भी बनें जो इससे पहले किसी राजनीतिक पद पर नहीं रहा था.
राष्ट्रपति ट्रंप के दौर में कैसे बदली दुनिया?

राष्ट्रपति रहते हुए ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन को नकार दिया था. हालांकि ट्रंप इसे लेकर क्या सोचते हैं ये स्पष्ट नहीं है. ट्रंप ने कभी इसे "बेहद महंगा डर" बताया तो कभी इसे "एक गंभीर विषय" कहा है जो कि "उनके दिल के काफ़ी क़रीब है."
लेकिन एक बात जो स्पष्ट है वो ये कि दफ़्तर में आने के छह महीने के भीतर ही उन्होंने पेरिस जलवायु संधि से हाथ पीछे खींच लिए थे. इस समझौते पर क़रीब 200 देश दुनिया के तापमान में बढ़ोतरी को दो फ़ीसद से नीचे रखने के लिए राज़ी थे.
कुछ देशों के लिए बंद की सीमा

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राष्ट्रपति ट्रंप ने पदभार संभालने के एक हफ़्ते के भीतर ही सात मुस्लिम बहुसंख्यक देशों से आने वाले आप्रवासियों के लिए अमेरिका के दरवाज़े बंद कर दिए थे. फ़िलहाल 13 देश इस तरह की ट्रैवल पाबंदियों के अधीन हैं.
दूसरे देशों में पैदा होकर अमेरिका में रह रहे लोगों की संख्या 2016 के मुक़ाबले 2019 में तीन फ़ीसद ज़्यादा थी.
मेक्सिको में पैदा हुए अमरीकी नागरिकों की फ़ीसद ट्रंप के शासन के दौरान लगातार गिरी है. दूसरी ओर, लातिन अमेरिका के बाक़ी देशों से यहां आने वालों की संख्या बढ़ी है.
अमेरिका में स्थाई रूप से बसने का अधिकार देने वाले वीज़ा में भी सख़्ती की गई है. ख़ासतौर पर जिनके रिश्तेदार पहले से अमेरिका में रह रहे थे उनके लिए ये वीज़ा हासिल करना मुश्किल हुआ है.
मेक्सिको की अमेरिका से लगती सीमा पर दीवार बनाने की शपथ राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रवासन नीति का प्रतीक है.
यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के मुताबिक़, 19 अक्तूबर तक 371 मील लंबी दीवार बनाई जा चुकी थी. लेकिन, ये दीवार अमेरिका जाने की चाहत रखने वालों को रोकने में नाकाम रही है.
मिडिल ईस्ट डील
राष्ट्रपति ट्रंप ने सीरिया से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का वादा किया और अमेरिका को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकालने की क़वायद शुरू की. लेकिन, अमेरिकी सेनाएं अभी भी उस हर जगह मौजूद हैं जहां वे उनके राष्ट्रपति बनने के दौरान थीं.
ट्रंप ने 2018 में अमेरिकी दूतावास को इसराइल के तेल अवीव से यरूशलम शिफ्ट कर दिया और इस तरह से उनके पहले के राष्ट्रपति की आपत्तियां दरकिनार कर दीं.
उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के इसराइल के साथ रिश्ते बहाल करने के समझौते करने को "एक नए मध्य पूर्व का सवेरा" क़रार दिया. ये समझौते अमेरिकी मदद से ही मुमकिन हुए और इसे ट्रंप प्रशासन की शायद सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि कहा जा सकता है.
ट्रेड डील के मास्टर

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ट्रंप ऐसी डील्स को रद्दी की टोकरी में डालने के लिए जाने जाते हैं जो उन्होंने नहीं की थीं. दफ़्तर में आने के पहले दिन ही उन्होंने ट्रांस-पैसिफ़िक पार्टनरशिप को रद्द कर दिया. यह 12 देशों की ट्रेड डील थी जिसे ओबामा ने मंज़ूरी दी थी.
ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको के साथ नॉर्थ अमेरिकन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर फिर से सौदेबाज़ी की. वे इसे "सबसे बुरी डील" मानते थे. नई डील में ज़्यादा कुछ नहीं बदला, हालांकि, लेबर प्रावधान सख़्त कर दिए.
2 दिसंबर 2016 को ट्रंप ने एक बड़ा अप्रत्याशित क़दम उठाया और ताइवान के राष्ट्रपति के साथ सीधे बातचीत की. इस तरह से 1979 में ताइवान के साथ औपचारिक संबंध तोड़े जाने की परंपरा को तोड़ दिया.
साउथ चाइना सी पर चीन के दावों को अमेरिका ने अवैध क़रार दिया. चीन के टिकटॉक और वीचैट जैसे एप्स बैन कर दिए गए और चीनी टेलीकॉम दिग्गज ख्वावे को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया.
ईरान पर सख़्त

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जनवरी 2019 में ट्रंप ने ईरान के सबसे ताक़तवर जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश दिया. ईरान ने जवाबी प्रतिक्रिया देते हुए इराक़ में दो अमरीकी ठिकानों पर दर्जन भर से ज़्यादा मिसाइलें दाग़ दीं. 100 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक इसमें घायल हुए. दोनों देश इससे युद्ध की कगार पर पहुँच गए.
इससे पहले 2018 में ट्रंप ने 2015 में ईरान के साथ हुई न्यूक्लियर डील को रद्द कर दिया. ईरान पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए.
कोरोना महामारी
ट्रंप अपने पहले कार्याकाल के दौरान सख़्त और अप्रत्याशित फ़ैसले लेने के लिए जाने जाते रहे. उन्होंने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का दावा किया.
लेकिन राष्ट्रपति काल के अंतिम महीनों में कोरोना महामारी ने अमेरिका पर गहरा और व्यापक असर किया. लॉकडाउन ने लोगों के लिए आर्थिक हालात मुश्किल कर दिए. ट्रंप महामारी को नकारते नज़र आए. अमरीका में कोरोना वायरस की वजह से दुनिया में सबसे ज़्यादा मौतें हुई.
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