अमरीका चुनाव: कमला हैरिस को कितना मिल रहा है भारतीयों का साथ?

    • Author, सलीम रिज़वी
    • पदनाम, न्यूयॉर्क से, बीबीसी हिंदी के लिए

अमरीका में करीब एक महीने बाद 3 नवंबर को राष्ट्रपति पद के चुनाव होंगे जिसमें डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडन और मौजूदा राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है.

ट्रंप और बाइडन के बीच ऐसे काँटे की टक्कर में कई अमरीकी प्रांतों में भारतीय मूल के वोटरों की अहमियत भी बढ़ गई है.

फ़्लोरिडा, पेन्सिल्वेनिया, मिशिगन उन आठ अहम प्रांतों में शामिल हैं जहां करीब 13 लाख भारतीय मूल के वोटर रहते हैं.

यूँ तो भारतीय मूल के अमरीकी वोटर ज़्यादातर डेमोक्रेट्स के ही समर्थक रहे हैं, लेकिन इस बार डोनाल्ड ट्रंप भी भारतीय मूल के वोटरों में अपनी पैठ जमाने में एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे हैं.

जवाब में डेमोक्रेट्स ने भारतीय मूल की सीनेटर कमला हैरिस को उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है.

बाइडन की रणनीति

चुनावी मुहिम के दौरान जो बाइडन और डोनाल्ड ट्रंप दोनों गाहे-बगाहे भारतीय मूल के लोगों को रिझाने की कोशिशें करते रहते हैं. बाइडन की मुहिम की वेबसाइट पर भारत और भारतीय मूल के लोगों के प्रति उनकी नीति को विस्तार से बताया गया है.

जो बाइडन कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने का हवाला भी देते हैं और भारतीय मूल के लोगों के अमरीकी समाज और अर्थव्यवस्था में अहम योगदान का ज़िक्र भी करते हैं.

बाइडन भारतीय मूल के लोगों को यह भी याद दिलाने की कोशिशें करते रहते हैं कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भारत और अमरीका के संबंध बेहद अच्छे थे. वो ये भरोसा दिलाते हैं कि वह इन संबंधों को और मज़बूत बनाएंगे.

डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी के चेयरमैन टॉमस पेरेज़ ने हाल ही में एक भारतीय मूल के समर्थकों की संस्था इंडियन अमेरिकन्स फ़ॉर बाइडन के एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, "अहम बैटलग्राउंड स्टेट्स में एशियाई लोग खासकर भारतीय मूल के वोटर जीत और हार में निर्णायक हो सकते हैं."

भारतीय मूल के वोटर

पेन्सिल्वेनिया में करीब 2 लाख भारतीय मूल के वोटर हैं, मिशिगन में करीब 1 लाख 25 हज़ार भारतीय मूल के वोटर हैं. इसी तरह फ़्लोरिडा में भी करीब 70 हज़ार भारतीय मूल के वोटर हैं.

जब जो बाइडन ने कमला हैरिस को उप-राष्ट्रपति पद के लिए चुना था तो इन वोटरों में डेमोक्रेट समर्थक बेहद खुश हुए थे.

डेमोक्रेट कन्वेंशन के दौरान अपनी भारतीय मूल की मां श्यामला गोपालन और भारत के अनुभवों का ज़िक्र भी इन समर्थकों को रास आया था.

इंडियन अमेरिकन्स फ़ॉर बाइडन से जुड़े भारतीय मूल के अमरीकी नील मखीजा कहते हैं, "भारतीय मूल के अमरीकियों ने अमरीकी सपने को अपनाया है, जिसको बाइडन और कमला हैरिस भी अच्छी तरह समझते हैं. और अगर ट्रंप दोबारा जीत जाते हैं तो इस सपने को बहुत बड़ा खतरा है."

मोदी फैक्टर

वहीं ट्रंप ने पिछले साल सितंबर महीने में ह्यूस्टन में नरेंद्र मोदी के साथ उनके 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम में भाग लेकर भारतीय मूल के अमेरिकियों को रिझाने की कोशिश की थी.

मोदी ने भी अपने अंदाज़ में ट्रंप का समर्थन करते हुए कहा था, "अबकी बार ट्रंप सरकार."

फिर इस साल फरवरी में ट्रंप ने भारत का दौरा किया और मोदी ने उनका भव्य स्वागत भी किया.

ट्रंप की मुहिम के कई विज्ञापनों में इन कार्यक्रमों के हिस्से दिखाए जा रहे हैं.

लगता है मोदी और ट्रंप की इस दोस्ती को देखते हुए अमरीका में रहने वाले बहुत से मोदी के समर्थकों ने अब ट्रंप को समर्थन देने का मन भी बना लिया है.

ट्रंप की चुनावी मुहिम ने भारतीय मूल के लोगों की कम से कम चार संस्थाएं बनाई हैं जिनके ज़रिए भारतीय मूल के विभिन्न धर्मों से जुड़े लोगों को साथ मिलाने की कोशिश की गई है. इनमें 'इंडियन वायसेज़ फ़ॉर ट्रंप' 'हिंदू वायसेज़ फ़ॉर ट्रंप' 'सिख्स फ़ॉर ट्रंप' और 'मुस्लिम वायसेज़ फ़ॉर ट्रंप' शामिल हैं.

ट्रंप के चुनावी टीम ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह संस्थाएं "देश भर में जो बाइडन और कमला हैरिस के सोशलिस्ट एजेंडे के खिलाफ़ और अगले चार साल के लिए विकास व सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए समुदाय के लोगों से संपर्क साधेंगी."

भारतीय मूल के लोगों की राय

भारतीय मूल के कुछ समर्थकों ने फ्लोरिडा में भी ट्रंप को समर्थन देने का मन बनाया हुआ है. पिछले 4 दशक से अमरीका में रह रहे पीयूष अग्रवाल अब फ्लोरिडा में रहते हैं.

वह कहते हैं कि कमला हैरिस ने राजनीति में आने के बाद से अपने आप को भारतीय मूल से ज़्यादा अश्वेत अमरीकी के तौर पर पेश किया है.

उनके मुताबिक, "यह तो ज़रूर लगता है कि अपना कोई है तो सही. हम कमला हैरिस के जन्म से तो सहमत हैं, कर्म से सहमत नहीं हैं. उन्होंने जो नागरिकता कानून को लेकर और कश्मीर में धारा 370 खत्म किए जाने पर जो टिप्पणी की, हम उससे आहत हुए हैं."

पीयूष अग्रवाल कहते हैं कि अगर जो बाइडन अगर जीत गए तो वह टैक्स बढ़ा देंगे जो भारतीय समुदाय के हक में नहीं है. उनकी मानें तो फ्लोरिडा में भारतीय मूल के ज़्यादातर लोगों का झुकाव डेमोक्रेट्स की तरफ है.

न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय मूल के अमरीकी अल मेसन ट्रंप की चुनावी मुहिम से जुड़े हैं. मेसन 'इंडियन वायसेज़ फ़ॉर ट्रंप' संस्था के सलाहकार भी हैं.

अल मेसन कहते हैं, "ट्रंप ने भारत का रूतबा विश्व स्तर पर बहुत बढ़ाया है. इतना किसी भी अमरीकी राष्ट्रपति ने नहीं किया. ट्रंप ने हाउडी मोदी कार्यक्रम में भाग लेकर मोदी का सम्मान बढ़ाया. कश्मीर, धारा 370 आदि के मामले में कुछ नहीं कहा. इन सारी बातों से भारतीय मूल के अमरीकी ट्रंप को लेकर बहुत खुश हैं और उनको भारी संख्या में वोट देने को तैयार हैं."

किसे वोट देंगे?

इसी तरह पेंसिल्वेनिया में रहने वाले भारतीय अमरीकी वोटर अशोक ने यह बताने से तो इंकार किया कि वह किसे वोट देंगे लेकिन उनका इशारा साफ़ था कि उनका झुकाव ट्रंप की ओर है.

"कमला हैरिस भारतीय मूल की ज़रूर हैं, लेकिन उन्होंने समुदाय के लिए क्या किया? जो बाइडन पेंसिल्वेनिया में पैदा हुए तो क्या बस उसी पर हम उन्हें वोट दे दें?" अशोक पूछते हैं.

अमरीका में विभिन्न प्रांतों में भारतीय मूल के करीब 40 लाख वोटर रहते हैं.

पेंसिल्वेनिया के एलनटाउन शहर में एक भारतीय स्टोर में काम करने वाले जिगनेश पटेल का झुकाव कमला हैरिस की ओर दिखा. वह कहते हैं, "कमला हैरिस तो जो बाइडन के साथ उप-राष्ट्रपति के लिए अच्छी उम्मीदवार हैं. वह भारतीय मूल की हैं, हमें गर्व महसूस होता है. हम तो उन्हीं को समर्थन देंगे."

लेकिन जिग्नेश पटेल यह भी कहते हैं कि भारतीय मूल के वोटर बंटे हुए हैं. उनका अंदाज़ा है कि भारतीय मूल के वोटरों में 60 प्रतिशत जो बाइडन और कमला हैरिस का समर्थन करते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)