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जो बाइडन क्या अपने भाषण से जीत पाए अमरीकियों का दिल
- Author, एंथनी जर्चर
- पदनाम, नॉर्थ अमरीका रिपोर्टर
गुरुवार रात को जो बाइडेन ने एक भाषण में कहा कि ये ऐसा समय है जब लोगों को बंटने की बजाय एकजुट होना चाहिए. इसे बाइडन की ‘सामान्य स्थिति की ओर वापसी’ का भाषण कह सकते हैं.
ये वॉरेन जी हार्डिंग का नारा था जब उन्होंने साल 1920 में अमरीका के राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था. उनका चुनावी कैंपेन द्वितीय विश्व युद्ध की क्षति के बाद अमरीकियों के घावों पर मरहम लगाना और उन्हें शांत करना था.
अमरीका के 29वें राष्ट्रपित वॉरेन हार्डिंग ने घावों को भरने, शांति और वापसी करने जैसी बातों का प्रचार किया. आधुनिक शब्दों में कहें तो उन्होंने एक तरह से सभी दूसरे मुद्दों का अंत कर दिया. वॉरेने हार्डिंग रिपब्लिकन पार्टी से थे.
बाइडन ने अपने चुनावी अभियान को ‘राष्ट्र की आत्मा के लिए लड़ाई’ के तौर पर पेश किया है लेकिन, गुरुवार रात को दिया गया उनका संदेश वॉरेन हार्डिंग के संदेश से ज़्यादा अलग नहीं था.
जो बाइडन ने कहा, “ये लोगों के एकजुट होने का समय है. ये बंटने का वक़्त नहीं है. इस वक्त अमरीकियों का समय होना चाहिए.”
उन्होंने अपने कैंपन को घावों को भरने, सुधार लाने, एकजुट होने, उम्मीद व रोशनी का मार्ग बनने का अवसर कहा.
अगर वो नवंबर में होने वाले चुनाव में हारते हैं, तो उसका कारण गुरुवार रात को या पूरे हफ़्ते भर से चल रही सभाओं में जो कहा गया वो नहीं होगा. पोल्स में आगे चल रही डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए चुनावों में क्या चुनौतियां और बाइडन उनसे कैसे निपट रहे हैं.
जो बाइडन की उम्र पर निशाना
इस तरह के बड़े भाषणों में नेता के बोलने का तरीक़ा और उनका हाव-भाव भी उतना ही महत्वूपर्ण है जितना कि ये कि वो क्या बोल रहे हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के नेता अपने कैंपने में जो बाइडन की उम्र को निशाना बना रहे हैं. उनका कहना है 77 साल के जो बाइडन की क्षमताओं पर उनकी उम्र प्रभाव डाल सकती है. वो बार-बार इसका ज़िक्र करते हैं. जो बाइडन पर इसके जवाब को लेकर दबाव है और उन्होंने इसका जवाब भी दिया है.
बाइडन ने कोविड-19 की स्थिति को संभालने और 2017 में शारलेट्सविल में श्वेत वर्चस्ववादी रैली में हुई हिंसा को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की थी. तब उन्होंने दक्षिणपंथियों के गुस्से का सामाना करना पड़ा था. उन्होंने अपनों को खोने वालों और आर्थिक मुश्किलें झेल रहे लोगों की बात करके फिर इस मुद्दे को उठाया.
एक खाली अंधेरे स्टेज पर अकेले भावुक भाषण देना आसान नहीं होता. लेकिन, इन आसामन्य स्थितियों में “वर्चुअल” भाषण देना बाइडन के पक्ष में गया है. इस फॉर्मेट में उनके भाषण का टेक्स्ट कसा हुआ और छोटा था. उन्होंने 1984 के बाद से सबसे छोटा डेमोक्रेटिक भाषण दिया है.
जो बाइडन ने अपने सार्वजनिक जीवन के करीब पांच दशकों में हज़ारों भाषण दिए होंगे. गुरुवार रात को उन्होंने सशक्त तरीके से एक प्रभावशाली भाषण दिया.
मानो इस बात की पुष्टि करने के लिए बाइडन के भाषण के बीच में ट्रंप ने ट्विटर पर उनके भाषण की आलोचना की. लेकिन, ये आलोचना भाषण के कंटेंट या बोलने के तरीक़े को लेकर नहीं बल्कि ये थी कि बाइडन ने जो कहा वो सिर्फ़ कोरे शब्द हैं.
एकसाथ लेकर चलना
बराक ओबामा के कार्यकाल के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी साफतौर पर दो खेमों में बंट गई है. एक तरफ सेनेटर बर्नी सैंडर्स जैसे प्रगतिवादी हैं. ये आक्रामक सरकारी कार्यक्रमों और नीतियों की वकालत करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि आय की असमानता, नस्लभेदी अन्याय और पर्यावरण के स्तर में गिरावट को रोकने के लिए ये ज़रूरी है.
दूसरी तरफ व्यावहारिक नेता हैं, जो अधिक वृद्धिशील परिवर्तन और द्वीदलीय सहमति की बात करते हैं. जो बाइडन इसी खेमे में आते हैं.
बाइडन अगर जीतना चाहते हैं तो उन्हें इन दोनों खेमों को साथ लाना होगा. वो जानते थे कि वो डोनल्ड ट्रंप का नाम नहीं ले सकते. गुरूवार के अपने भाषण में उन्होंने फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट के नए समझौते को श्रद्धांजिल अर्पित की. उनका भाषण बड़ी-बड़ी सरकारी बयानबाजी और महत्वकांक्षांओं की कसौटी पर हल्का था.
बाइडन का मकसद मध्यम वर्ग और असंतुष्ट रिपब्लिकन और निर्दलीय लोगों तक पहुंच बनाना था. उन्होंने कहा कि जब वो डेमोक्रेटिक उम्मीदवार होंगे तो उन्हें समर्थन ना देने वाले लोगों के लिए भी उतनी ही मेहनत से काम करेंगे जितना समर्थन देने वालों के लिए.
इस पूरे हफ़्ते बाइडन की टीम ने जॉन कैसी जैसे पूर्व रिब्लिकन गवर्नर्स और एलिज़ाबेथ वॉरेन व सैंडर्स जैसे प्रगतिवादियों को एक ही छतरी के नीचे लाने की कोशिश की.
अब उन्हें उम्मीद है कि वो आने वाले हफ़्तों में डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम की तरफ से आने पलटवार के सामने डटे रहेंगे.
ट्रंप और बाइडन में अंतर दिखाने की कोशिश
डोनाल्ड ट्रंप को हराने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों नेताओं के चरित्र में अंतर दिखाने की कोशिश कर रही है. इस हफ़्ते पार्टी के एक के बाद एक स्पीकर ये साबित करने की कोशिश कर रहे थे कि उनका उम्मीदवार निजी कठिनाइयों और संघर्ष से लड़कर मजबूत बना है जबकि डोनाल्ड ट्रंप के साथ ऐसा नहीं है.
गुरुवार शाम के उस पल ने सबका ध्यान खींचा होगा जब हकलाने वाले 13 साल के एक बच्चे ने बताया कि कैसे उसकी बाइडन के साथ दोस्ती हुई और उन्होंने उसको सलाह दी. बाइडन खुद भी बचपन में हकलाते थे.
डेमोक्रेट्स को उम्मीद है कि लोग बाइडन और ट्रंप में इस अंतर को देखेंगे क्योंकि ट्रंप लोगों का उनके रूप और क्षमताओं को लेकर मज़ाक उड़ा चुके हैं.
कई दिनों से डेमोक्रेट्स बाइडन के सहानुभूति भरे व्यवहार का प्रचार कर रहे हैं. बाइडन ने अपने भाषण में इसे दिखाने की भी कोशिश की.
उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि किसी अपने को खोना कैसा लगता है. आपके अंदर कैसे खालीपन आ जाता है और लगता है जैसे कि उस खालीपन में आपका सब कुछ गुम हो गया है. मुझे पता है कि ज़िंदगी कई बार कितनी क्रूर और निर्दयी हो जाती है.”
लेकिन, जो बाइडन इस पर बहुत कम बात करते हैं कि एक राष्ट्रपति के तौर पर वो क्या करेंगे, उनकी नीतियां और कार्यक्रम क्या होंगे. वो अक्सर सत्ता में आने पर ट्रंप के कामों को रोकने या नीतियों को पलटने की बात करते हैं लेकिन अपनी नीतियों पर बहुत कम चर्चा करते हैं.
उन्होंने एक बार कोविड-19 से निपटने की योजना पर गहराई से बात की थी. हालांकि, ये मुद्दा भी ऐसा है जिस पर अमरीकियों को इस समय सबसे ज़्यादा चिंता है.
अगर बाइडन व्हाइट हाउस की इस दौड़ में जीतते हैं तो लोगों को उनसे क्यों उम्मीदें होंगी?
कई लोगों के लिए डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता से हटाना ही काफी है. लेकिन अगर बाइडन को ज़्यादा समर्थन चाहिए तो उसके लिए स्वास्थ्य, पर्यावरण और शिक्षा की डेमोक्रेट्रस की नीतियों पर काम करना होगा ताकि उन्हें सभी का साथ मिल सके.
इस समय, बाइडन के अभियान के बारे में बोलने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं है, क्योंकि महामारी के चलते वो डेलावेयर में अपने घर के आसपास तक ही सीमित हैं.
ये एक और बात है जो कि बाइडन के ‘सामान्य स्थिति की ओर वापसी’ के कैंपने को वॉरेन हार्डिंग के कैंपेन से जोड़ती है.
1920 में, वॉरेन हार्डिंग ने ज़्यादातर समय अपने घर ओायो में बिताया था. ये 100 साल पहले उनकी जीत की रणनीति बनी थी. हो सकता है कि ये रणनीति बाइडन के लिए भी काम करें.
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