अज़रबैजान-आर्मीनिया के बीच लड़ाई हुई तेज़ और भारी गोलीबारी की ख़बर

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आर्मीनिया और अज़रबैजान की सेनाओं के बीच रविवार को नागोर्नो-काराबाख़ में लड़ाई बढ़ गई है और दोनों तरफ़ से भारी गोलीबारी होने की ख़बरें मिल रही है.

आर्मीनिया का कहना है कि अज़रबैजान ने नागोर्नो-काराबाख़ के प्रमुख शहर स्टेप्नाकियर्ट को निशाना बनाया है. एएफ़पी के मुताबिक़ वहां लगातार धमाके हो रहे थे और शहर के कई हिस्सों से काले धुएं के बादल उठते दिखे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार अज़रबैजान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि आर्मीनिया की सेना ने उनके 3 लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहर गांजा में धमाके किए हैं. वीडियो फुटेज में कई इमारतें नष्ट हुई दिख रही हैं.

दोनों ही देश एक-दूसरे पर लड़ाई में आम लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं.

अज़रबैजान के सहयोगी देश तुर्की ने भी आर्मीनिया पर इल्ज़ाम लगाया है कि वो गांजा में आम लोगों को निशाना बना रहा है. तुर्की ने अज़रबैजान के लिए अपने सहयोग की बात फिर से दोहराई है.

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अज़रबैजान के राष्ट्रपति की चुनौती

अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने राष्ट्र के नाम संबोधन में लड़ाई रोकने के लिए कुछ शर्तें बताई हैं लेकिन आर्मीनिया के लिए उन्हें मानना लगभग नामुमकिन है.

उन्होंने कहा है कि "आर्मीनिया को उनकी ज़मीन छोड़नी होगी, ना सिर्फ़ वो ऐसा कहे बल्कि करके दिखाए और पहले पूरी तरह से इलाक़ा छोड़ देने का एक टाइमटेबल बताए."

"साथ ही वो अज़रबैजान की अखंडता को माने और अज़रबैजान के लोगों से माफ़ी मांगे और कहे कि ये इलाक़ा आर्मीनिया का नहीं है."

उन्होंने कहा, "अज़रबैजान किसी को नागोर्नो-काराबाख़ को जीतने नहीं देगा, ये अज़रबैजान की ज़मीन है. हम वापस आएंगे. मेरी आख़िरी शर्त है कि आर्मीनिया की सेना कब्ज़े वाले इलाक़े से निकलने का ख़ाका दे."

देश की राजधानी बाकू में राष्ट्रपति के सहयोगी हिकमत हजीयेव ने भी बताया कि आर्मीनिया की सेना ने अज़रबैजान के कई शहरों पर हमला किया है.

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अज़रबैजान का आरोप है कि आर्मीनियाई सेना की मिसाइलों से शहर गांजा में 20 आम नागरिकों की मौत हो गई है.

अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने दावा किया है कि सेना ने एक शहर और जबरियल ज़िले में नौ गांवों को वापस ले लिया है. ये इलाक़े नागोर्नो-काराबाख़ के दक्षिण में स्थित हैं.

क्या कहना है नागोर्नो-कराबाख़ का?

नागोर्नो-काराबाख़ का कहना है कि राजधानी स्टेपनाकियर्ट और शुशी शहर पर अज़रबैजान की सेना ने रॉकेट से हमले किए गए हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नागोर्नो-काराबाख़ के प्रमुख के प्रवक्ता वहरम पोगोस्यान ने कहा है कि, "दुश्मन सेना स्टेपनाकियर्ट और शुशी पर रॉकेट से हमले कर रही है. रक्षा के लिए हमे कदम उठाने में देर नहीं लगेगी."

स्टेपनाकियर्ट में बार-बार धमाकों की आवाज़ें सुनी जा सकती है. शहर के कई परिवारों ने चर्च के बेसमेंट में शरण ली हुई है.

चर्च में शरण लेने वालों में से एक गौहर लाल्यान ने बताया, "हम येरेवान (आर्मीनिया की ईसाई बहुल राजधानी) में रहते थे और फिर हम यहां आ गए. हमारे यहां आने के दो दिन बाद लड़ाई शुरू हो गई. मेरे भाई को जंग के मैदान में भेज दिया गया है. सप्ताह भर हो गया है हमें उसकी कोई ख़बर नहीं मिली."

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इमेज कैप्शन, नागोर्नो काराबाख़ इलाक़े में लोग लड़ाई से बचने के लिए ज़मीन खोद कर इस तरह के बंकर बना रहे हैं.

अज़रबैजान के आरोपों पर आर्मिनिया ने क्या कहा?

आर्मीनिया ने अज़रबैजान के सभी आरोपों को ग़लत बताया है.

आर्मीनिया की ईसाई बहुल राजधानी येरेवान में आम लोग रविवार को चर्च में इकट्ठा हुए. समाचार एजेंसी एएफ़पी को सेंट सर्किस चर्च पहुंची एक महिला ने बताया कि वह शांति के लिए, अपने देश और अपने सैनिकों के लिए दुआ करने आई है.

आर्मीनियाई रक्षा मंत्रालय के अधिकारी आर्त्रसन होवहानिस्यान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि, "ये बिल्कुल ग़लत और बेबुनियाद ख़बर है कि आर्मीनिया ने अज़रबैजान के ठिकानों पर हमला किया."

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और गहरा रहा संकट

आर्मीनिया और अज़रबैजान दोनों ही पक्ष युद्धविराम की बात पर किसी की नहीं सुन रहे और पिछले कुछ दिनों से ये लड़ाई और गंभीर होती जा रही है. दोनों ही पक्ष अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.

रूस, अमरीका और फ्रांस मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन कोई राजनीतिक हल अब तक नहीं निकल पाया है. इन देशों ने लड़ाई को तुरंत रोकने की बात कही है.

आर्मीनिया का कहना है कि वो मध्यस्थ देशों से बात करने के लिए तैयार है लेकिन अज़रबैजान इस बात पर अड़ा है कि पहले आर्मीनियाई सेना पहले पूरी तरह इलाक़े से पीछे हट जाए.

रूस के आर्मीनिया के साथ गहरे संबंध हैं. रूस के विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके अमरीकी समकक्ष ज़ोहराब मनात्सकैनियन ने रविवार को टेलिफ़ोन पर बातचीत के ज़रिए नागोर्नो-काराबाख़ की स्थिति पर चर्चा की.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि रूस ने आम लोगों की बढ़ती मौत की संख्या को लेकर चिंता जताईहै.

एक हफ़्ते पहले शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक कम से कम 200 लोगों की जान जा चुकी है.

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