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कोरोना वायरस को लेकर ट्रंप के दावों में कितनी सच्चाई है?
- Author, रिएलिटी चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह से कोरोना महामारी से निपटने की कोशिश की है, वो आने वाले चुनाव में एक अहम मुद्दा बना हुआ है. अब तक अमरीका में कोरोना से दो लाख से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. दुनिया में कोरोना के कारण सबसे अधिक मौतें अमरीका में ही हुई हैं.
ट्रंप ने शुरू में कोरोना वायरस के ख़तरे को कम करके आंका था. इसे लेकर उनकी ख़ूब आलोचना भी हुई थी.
सबसे कम मृत्यु दर के ट्रंप के दावे में कितना दम है?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमरीका में कोरोना से होने वाली मृत्य दर को कहीं और से कम बताया है. लेकिन कोरोना वायरस को लेकर जो अलग-अलग देशों के डेटा उपलब्ध हैं, उनकी सीधे तौर पर तुलना नहीं की जा सकती है. उनकी तुलना करने के अलग-अलग तरीक़े हैं.
संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामलों और संक्रमण से होने वाली मौतें, दोनों ही मामलों में अमरीका दुनिया के सभी देशों से आगे है.
हालांकि इसे अगर आप जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से देखें तो फिर अमरीका सूची में नंबर एक पर नहीं दिखेगा लेकिन वो दुनिया के 10 सबसे बुरी तरह से प्रभावित देशों की सूची में ज़रूर नज़र आएगा.
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूरोप में संक्रमण के नए बढ़ते मामलों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा था, "साफ़ तौर पर कहूँ तो उनकी संख्या जिस स्तर पर है वो यहाँ से भी बदतर है."
निश्चित तौर पर यूरोप के कुछ देशों में संक्रमण के नए मामलों में उछाल दिखा है लेकिन यह अमरीका के कुछ हिस्सों पर भी लागू होता है.
क्या ट्रंप ने टेस्टिंग कम करने को कहा?
जून में हुई एक रैली के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था, "मैंने अपने लोगों से कहा कि कृप्या टेस्ट की रफ़्तार कम कर दें."
लेकिन उन्होंने बाद में अपनी इस टिप्पणी को 'व्यंग्य' में कही बात कहा था.
व्हाइट हाउस के शीर्ष संक्रामक बीमारी विशेषज्ञ डॉक्टर एंथोनी फ़ाउची का कहना है, "मेरी जानकारी में कभी भी हमें टेस्ट कम करने को नहीं कहा गया."
हालांकि राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस टेस्टिंग को 'दोधारी तलवार' ज़रूर बताया था और कहा था कि टेस्टिंग के बढ़ते मामलों से यह अवधारणा बन सकती है कि संक्रमण के मामलों में इज़ाफ़ा हो रहा है.
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर ट्रंप का दावा कितना सही?
मई में ट्रंप ने यह घोषणा की थी कि कोविड-19 से बचने के लिए उन्होंने मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन ली है.
लेकिन इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि यह दवा कोरोना वायरस पर प्रभावी हो सकता है.
डॉक्टर फ़ाउची की सलाह को नहीं मानते हुए राष्ट्रपति लगातार इस दवा के इस्तेमाल पर ज़ोर देते रहे हैं.
डॉक्टर फ़ाउची कहते हैं, "हम जानते हैं कि किसी भी सही अध्ययन में इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोविड-19 के इलाज में कारगर है. सही अध्ययन से मेरा मतलब ऐसे अध्ययन से है जिसमें विश्वसनीय डेटा का इस्तेमाल किया गया हो."
अमरीकी फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़डीए) ने इस दवा को कोरोना के मरीज़ों पर इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है. कई मामलों में ऐसी रिपोर्ट आई हैं कि मरीज़ों को इस दवा की वजह से "गंभीर दिल की समस्या" और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा हुई हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि, "अभी इसके कोई सबूत मौजूद नहीं है कि ये दवा कोविड-19 के इलाज में कारगर है."
क्या ट्रंप राहत पैकेज कम करने की कोशिश कर रहे थे?
सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने राष्ट्रपति के साथ लॉकडाउन और कई दूसरे फ़ैसलों पर असहमति जताई है. सीडीसी अमरीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था है.
राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन ने ट्विटर पर जुलाई में यह टिप्पणी बिना किसी संदर्भ और सबूत के की थी.
उस समय अमरीकी सांसद कोरोना वायरस को लेकर एक राहत पैकेज पर विचार कर रहे थे तब अमरीकी मीडिया में यह रिपोर्ट आई थी कि ट्रंप प्रशासन सीडीसी को देने वाले फ़ंड को कम करने पर विचार कर रही है.
हालांकि व्हाइट हाउस ने इन दावों से इनकार करते हुए कहा है कि, "बाइडन की टीम का दावा ग़लत है. हमारे हालिया बजट में सीडीसी को मिलने वाले फ़ंड में 635 मिलियन डॉलर का इज़ाफ़ा किया गया है जो कि आठ फ़ीसद का इज़ाफ़ा है."
यह सच है कि महामारी के दौरान सीडीसी को ज़्यादा पैसे मिले हैं. ट्रंप प्रशासन के बजट में सीडीसी के लिए आवंटित फ़ंड में वित्तीय वर्ष 2021 के लिए शुरू में कटौती की गई थी लेकिन बाद में फ़ंड में बढ़ोत्तरी कर दी गई थी.
नर्सिंग होम में टेस्टिंग बढ़ाने का दावा
केयर होम में टेस्टिंग की ज़रूरत ज़्यादा है क्योंकि बुज़ुर्गों में कोरोना वायरस के संक्रमण का जोखिम ज़्यादा होता है. महामारी के शुरुआती चरण में अमरीका के केयर होम्स में कोरोना से बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं.
व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रंप का दावा सही था और 14,000 नर्सिंग होम में 49 लाख रैपिड टेस्ट हुए हैं.
सीडीसी के आंकड़ों के मुताबिक़ 15,600 केयर होम में 13 लाख लोग रहते हैं.
कैलिफ़ोर्निया के बेट्टी इरीन मूर स्कूल ऑफ़ नर्सिंग की प्रोफ़ेसर डेबरा बेकरजियान का कहना है, "नर्सिंग होम में रहने वाले लोगों और स्टाफ़ की टेस्टिंग करना एक चुनौती भरा काम है. हालांकि कोशिश जारी है और इसमें कामयाबी भी मिल रही है लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है."
क्या डेमोक्रेटिक पार्टी वाले राज्यों में ज़्यादा मौतें हुई हैं?
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि जिन राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकारें हैं वहां कोरोना वायरस से ज़्यादा मौतें हुई हैं. इन राज्यों को ब्लू स्टेट के नाम से भी जानते हैं.
उन्होंने कहा, "अगर आप ब्लू स्टेट को बाहर निकाल देते हैं तो फिर मुझे लगता है कि हम वहाँ होंगे जहाँ दुनिया का कोई दूसरा देश नहीं होगा. हमारे यहाँ वाक़ई में बहुत कम मामले होंगे."
"न्यूयॉर्क और दूसरे डेमोक्रेटिक पार्टी वाले राज्यों को हटा दीजिए फिर आप अविश्वसनीय संख्या देखेंगे."
डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने इसके जवाब में ट्वीट किया है कि कोविड रेड स्टेट या फिर ब्लू स्टेट का मसला नहीं है.
पाँच राज्यों जिनमें कोरोना से सबसे ज़्यादा मौतें हुई हैं, उनमें से दो राज्यों टेक्सास और फ्लोरिडा में रिपब्लिकन पार्टी की सरकारें हैं. इन्हें रेड स्टेट कहा जाता है.
यह सच है कि शुरुआती दौर में न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी के शासन वाले राज्यों में बहुत बुरे हालात थे लेकिन जैसे-जैसे वक़्त गुज़रता गया रिपब्लिकन पार्टी वाले राज्यों में ज़्यादा मौतें होनी शुरू हो गईं.
वॉशिंगटन पोस्ट में छपे हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है कि ब्लू स्टेट में जहां 53 फ़ीसद मौतें कोरोना से हुई हैं तो वहीं रेड स्टेट में 47 फ़ीसद मौतें कोरोना से हुई है.
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