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ट्रंप कोरोना के इलाज के लिए ख़ुद क्यों बन रहे हैं डॉक्टर
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो कोरोना वायरस से बचाव के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन नाम की दवा ले रहे हैं.
व्हाइट हाउस में हुए एक बैठक में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हाल में मलेरिया और लूपस के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन लेना शुरू किया है.
उन्होंने कहा, "क़रीब देढ़ सप्ताह से मैं ये दवा ले रहा हूं और देखिए मैं आपके सामने स्वस्थ्य हूं."
आम तौर पर इस दवा का इस्तेमाल मलेरिया के इलाज में किया जाता है.
लेकिन ये दवा कोरोना वायरस के मरीज़ों के मामले में कितनी कारगर है, अब तक इस बात के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
हालांकि इसके लिए क्लिनिकल ट्रायल फ़िलहाल जारी है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी यह कह चुका है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन कोरोना के इलाज में कितना प्रभावी है, इसे लेकर कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है.
ट्रंप ने क्या कहा?
73 साल के ट्रंप सोमवार को व्हाइट हाउस में रेस्तरां व्यवसाय से जुड़े लोगों से मुलाक़ात कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि वो हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन ले रहे हैं.
उन्होंने कहा, "आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि कितने लोग ये दवा ले रहे हैं. ख़ास कर फ्रांटलाइन वर्कर कोरोना वायरस से बचने के लिए ये दवा ले रहे हैं. मैं खुद ये दवा ले रहा हूं."
जब ट्रंप से पूछा गया कि उन्हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के इस्तेमाल के क्या सकारात्मक सबूत मिले, उन्होंने कहा, "मुझे इस संबंध में कई कॉल आए हैं. यही इसका सबूत है."
ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया
ट्रंप के इस बयान को लेकर जहां कई लोगों ने चिंता जताई है वहीं कई लोगों ने इसे डराने वाली बात कहा है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक इस बात के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं कि कोविड 19 के मरीज़ों को इस दवा के इस्तेमाल से फायदा होता है.
उनका कहना है कि इस दवा के इस्तेमाल से शरीर को नुक़सान हो सकता है, इससे गुर्दे और लिवर को भी नुक़सान पहुंच सकता है.
एक व्यक्ति ने लिखा, "मैं एक वैज्ञानिक हूं. राजनीति के बारे में मैं नहीं जानता लेकिन कृपया हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन न लें. ये नुक़सान पहुंचाने वाला हो सकता है और अब तक कोई ऐसे आँकड़े नहीं आए हैं जो बताएं कि कोविड 19 के मरीज़ इससे ठीक हुए हैं."
टॉम पोस्नान्स्की ने कहा, "वो व्यक्ति जो फ़ेस मास्क लगाने का समर्थन न करता हो, कोरोना महामारी के बीच अर्थव्यवस्था को फिर से जल्दी खोलने के बारे में सोच रहा हो और किसी ऐसी बीमारी के लिए दवा ले रहा हो जो उसे है ही नहीं और वो दवा जिस पर शोध किया जा रहा है, तो क्या ये वाकई सही है?"
मार्च में ट्रंप ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के इस्तेमाल का ज़िक्र किया था जिसके बाद से अमरीका में कई डॉक्टर अपने मरीज़ों हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और क्लोरोक्वीन दे रहे हैं. हालांकि हाल के वक्त में इसमें कुछ कमी आई है.
कुछ लोग जो इस दवा पर पूरी तरह से निर्भर हैं उनका कहना है कि दवा की मांग बढ़ने के कारण बाज़ार में इसकी उपलब्धता कम हुई है जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा है.
लीज़ा ब्राउन डूबल्स सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की और लिखा कि ये दवा लुपस से मरीज़ों के लिए ज़रूरी है. ये दवा न लेने पर "लुपस के मरीज़ों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के मरीज़ों को इस समस्या का सामना करना पड़ता है."
ट्रंप ही नहीं ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने भी इस दवा का समर्थन किया था. फ़ेसबुक ने हाल में बोलसोनारो का एक वीडियो ग़लत जानकारी फैलाने की वजह से हटा दिया था.
इस वीडियो में बोलसोनारो ने दावा किया था कि, "हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन सभी जगहों पर काम कर रही है."
लंबे समय से हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल मलेरिया के बुखार को कम करने में किया जाता रहा है और उम्मीद की जा रही है कि यह कोरोना वायरस को भी रोकने में सक्षम हो सकती है.
कोरोना के इलाज में मलेरिया की दवा के प्रभाव पर रिपोर्ट लिखने वाले ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी के कोम गेबनिगी का कहना है, "यह दवा कितना कारगर है, यह जानने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रैंडम क्लिनिकल ट्रायल की ज़रूरत है."
अमरीका, ब्रिटेन, स्पेन और चीन में 20 से ज्यादा परीक्षण चल रहे हैं. कैबिनेट मंत्री माइकल गोव बताते हैं कि ब्रिटेन में मलेरिया-रोधी दवा की कोरोना वायरस के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों पर लगातार क्लिनिकल परीक्षण किए जा रहे हैं.
अमरीका में भी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाओं को साथ मिलाकर इसके कोरोना के इलाज में प्रभावी होने के ऊपर कई परीक्षण किए जा रहे हैं.
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) अमरीका में किसी दवाई के इस्तेमाल की अनुमति देती है. उसने इन दवाइयों को आपातस्थिति में कोरोना के सीमित मामलों में उपयोग की इजाज़त तो दी लेकिन ये भी कहा कि किसी ख़ास परिस्थिति में अस्पताल अनुरोध करके इन दवाइयों का इस्तेमाल कोरोना के मरीज़ों पर कर सकता है.
डॉक्टर की सलाह पर
फ़्रांस ने भी अपने डॉक्टरों को कोरोना के मरीज़ों को यह दवा देने की सलाह की इजाज़त दी लेकिन साथ ही में इसके साइड इफेक्ट को लेकर चेताया भी.
भारत के स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वालों कर्मियों को ऐहतियातन हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन लेने की सलाह तो दी है, इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह पर उन परिवारवालों को भी ये दवा खाने को कहा है जिन परिवारों में कोरोना के किसी मामले की पुष्टि हुई है.
हालांकि भारत सरकार की शोध संस्था ने इसके प्रयोग को लेकर चेतावनी दी है और कहा है कि यह 'प्रयोग' के स्तर पर है और आपतकालीन स्थिति में ही केवल इसका इस्तेमाल करना चाहिए.
मध्य-पूर्व के कई देशों ने भी अपने यहां इसके इस्तेमाल को इजाज़त दी है. इन देशों में बहरीन, मोरोक्को, अल्जीरिया और ट्यूनिशिया शामिल हैं. बहरीन का दावा है कि उसने सबसे पहले अपने यहां कोरोना के मरीज़ पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का इस्तेमाल किया है.
क्लोरोक्विन और इससे जुड़ी दवाइयां विकासशील देशों में पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं. इन देशों में मलेरिया के इलाज में इन दवाओं का इस्तेमाल होता आया है.
हालांकि धीरे-धीरे मलेरिया के ज़्यादा प्रतिरोधी होने की वजह से इस दवा का प्रभाव मलेरिया के मामले में कम होता गया है.
जॉर्डन ने जमाखोरी रोकने के लिए दवाई दुकानों में इसकी ब्रिक्री पर प्रतिबंध तक लगाया तो कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी निजी दवा दुकानों से इसे वापस ले लिया और सरकारी केंद्रों और अस्पतालों तक इसकी उपलब्धता को सीमित कर दिया. कीनिया में सिर्फ़ डॉक्टर की पर्ची पर ही इस दवा को बेचने का नियम बना दिया गया.
भारत इन दवाइयों का एक बड़ा उत्पादक देश है. लेकिन भारत ने इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी है.
2005 में इस दवा पर पाबंदी लगने के बावजूद नाइजीरिया में लोग अभी भी मलेरिया की दवा के रूप में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. चीन में फरवरी के महीने में इस बात का ज़िक्र होने के बाद कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन कोरोना वायरस के मामलों में काम करती है.
नाइजीरिया के रोग नियंत्रक केंद्रों ने लोगों से अपील की है कि वो इस दवा को लेना बंद करें और कहा है कि, "विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस के इलाज में इस दवा के प्रभाव की पुष्टि नहीं की है."
बीबीसी के डैनियल सेमेनिओरिमा ने बताया है कि लागोस में लोग इस सलाह को अनसुना कर रहे हैं और अपने आप को सुरक्षित करने में लगे हुए हैं. इसके गंभीर नतीजे भी भुगतने पड़ रहे हैं. लागोस के अधिकारियों का कहना है कि कई लोग हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के ओवरडोज से गंभीर रूप से बीमार पड़े हैं.
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