चीन से दो ऑस्ट्रेलियाई पत्रकारों की क्यों हुई विदाई

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ऑस्ट्रेलिया के दो मीडिया संस्थानों ने अपने संवाददाताओं को चीन से वापस बुला लिया है. उन्होंने कहा है कि ऐसा कूटनीतिक कारणों से करना पड़ा है. मंगलवार को चीन में काम करने वाले दो आख़िरी ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार भी अपने देश लौट गए.
पिछले कुछ सालों में ऑस्ट्रेलिया और चीन के रिश्ते ख़राब हुए हैं और हाल के समय में कोरोना महामारी को लेकर संबंध और बिगड़े जब ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि इस बात की अंतरराष्ट्रीय जाँच होनी चाहिए कि महामारी की शुरुआत कैसे हुई.
ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) के पत्रकार बिल बर्टल्स और ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू (एएफ़आर) के माइक स्मिथ काफ़ी कूटनीतिक कोशिशों के बाद मंगलवार को सिडनी पहुंच गए.
उनके देश छोड़ने पर चीन ने ये कहते हुए रोक लगा दी थी कि जब तक वो हिरासत में लिए गए एक अन्य पत्रकार के बारे में जानकारी नहीं देते तब तक वो चीन से बाहर नहीं जा सकते.
ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू के अनुसार चीनी अधिकारियों ने पत्रकारों से चेंग ली के बारे में पूछताछ की थी. ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार चेंग ली चीन की सरकारी मीडिया में काम करती थी और वे पिछले महीने से चीन की हिरासत में हैं.
बाद में इन पत्रकारों ने अपने दूतावास से मदद मांगी और ऑस्ट्रेलियाई कूटनयिकों की पाँच दिनों तक की गई कोशिश के बाद पत्रकारों को बाहर निकाला जा सका.
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मरीस पेन ने कहा, "बीजिंग में हमारे दूतावास और शंघाई में हमारे महावाणिज्यिक दूतावास ने चीन के अधिकारियों से बात कर ये सुनिश्चित किया कि वे (पत्रकार) ठीक हों और ऑस्ट्रेलिया लौट आएं."
चीन इस साल अब तक 17 विदेशी संवाददाताओं को निष्कासित कर चुका है.
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अब तक क्या पता है?
एबीसी के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलियाई राजनयिकों ने एबीसी प्रबंधन को पिछले हफ़्ते ये सलाह दी थी कि बर्टल्स चीन छोड़ दें. उसके बाद पिछले हफ़्ते गुरुवार के लिए उनकी फ़्लाइट बुक करवा दी गई.
लेकिन उससे पहले बुधवार को स्थिति और ख़राब हो गई जब सात चीनी पुलिसकर्मी पत्रकार के घर में आधी रात को पहुंच गए. उस वक्त वे अपने दोस्तों के साथ थे जो उन्हें विदाई देने आए थे.
एबीसी के मुताबिक़ पुलिस अफसरों ने बर्टल्स को कहा कि वे देश छोड़ कर नहीं जा सकते और उनसे राष्ट्रीय सुरक्षा के एक केस में पूछताछ की जाएगी.
पत्रकार बर्टल्स ने तुरंत ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्यिक अधिकारियों से बात की जिन्होंने वहां से उन्हें ऑस्ट्रेलियाई दूतावास पहुंचाया. अगले चार दिन वे दूतावास में ही रहे.
उस दौरान चीन में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत ग्राहम फ्लैचर के मौजूदगी में ही चीन के पुलिसकर्मियों ने उनसे पूछताछ भी की.

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एएफ़आर के पत्रकार माइक स्मिथ शंघाई में रहते थे और उनके घर भी पुलिसवाले आए जिसके बाद उन्होंने भी ऑस्ट्रेलियाई वाणिज्यिक दूतावास से संपर्क किया.
एबीसी के मुताबिक़ संवाददाता बर्टल्स से ये नहीं पूछा गया कि चीन में उनकी रिपोर्टिंग या आचरण कैसा था.
एएफ़आर के मुताबिक़ दोनों ही पत्रकारों से पत्रकार चेंग ली के बारे में पूछताछ की गई.
उन्हें कहा गया कि अगर वे पुलिस को इंटरव्यू देने को तैयार होते हैं, तो वे देश छोड़ सकते हैं.
इस पूरे मामले पर कैसी प्रतिक्रिया हुई?
सिडनी में पत्रकार बर्टल्स ने कहा, "इस तरह की परिस्थितियों में लौटना अच्छा नहीं लगा."
"ये राहत की बात है कि मैं देश वापस आ गया हूं जहाँ सही में कानून का राज है. लेकिन ये एक बवंडर जैसा था और ये अच्छा अनुभव नहीं था."
एएफ़आर के एडिटर्स माइकल स्टचबैरी और पॉल बेली ने कहा कि वे खुश हैं कि दोनों पत्रकार सुरक्षित हैं.
एक संयुक्त बयान में उन्होंने कहा, "अपना काम कर रहे दो पत्रकारों को इस तरह से निशाना बनाना खेदजनक और परेशान होने वाली बात है और ऑस्ट्रेलिया-चीन संबंधों के हित में नहीं है."

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बीबीसी की ऑस्ट्रेलियाई संवाददाता शाएमा ख़लील का विश्लेषण
बिल बर्टल्स और माइक स्मिथ आख़िरी दो ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार थे जो चीन में काम कर रहे थे. उनके वापस लौटने के बाद 1970 के दशक के बाद ये पहली बार होगा कि चीन में कोई ऑस्ट्रेलिया का पत्रकार नहीं है.
चीन न सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया का व्यापारिक पार्टनर है, न सिर्फ़ कोयले और लोहा अयस्क का सबसे बड़ा ख़रीदार है बल्कि चीन कवरेज ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे बड़ा मुद्दा भी है. अब जब दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ रहा है तब चीन में ऑस्ट्रेलिया के पत्रकारों का होना ज़्यादा महत्वपूर्ण था.
एबीसी के न्यूज़ डायरेक्टर गेवेन मोरिस ने कहा, "चीन और इसका ऑस्ट्रेलिया के साथ संबंध, चीन की हमारे क्षेत्र और दुनिया में भूमिका के बारे में जानना ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है और हम चाहते हैं कि हमारे लोग वहां इसे कवर करने के लिए मौजूद हों."
लेकिन जब दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक बयानबाज़ी चल रही है और चीन पश्चिमी देशों के पत्रकारों को टारगेट कर रहा है तो ये बड़ा मुश्किल है कि ऑस्ट्रेलियाई पत्रकारों को वापस चीन जाने की इजाज़त मिलेगी.
ये घटना दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण अंक की तरह तो है ही, साथ ही ऑस्ट्रेलिया की मीडिया कवरेज पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा.

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