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भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री वेई फ़ेंघे के बीच बैठक ख़त्म
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीन के रक्षा मंत्री वेई फ़ेंघे के बीच आज मॉस्को में मुलाक़ात हुई. दोनों रक्षा मंत्री शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए मॉस्को में हैं.
यह बैठक क़रीब दो घंटे 20 मिनट तक चली.
भारतीय मीडिया के अनुसार इस मुलाक़ात की पेशकश ख़ुद चीनी रक्षामंत्री की तरफ़ से हुई थी.
दोनों रक्षा मंत्रियों की मुलाक़ात ऐसे समय में हुई जब भारत-चीन सीमा पर पिछले कुछ महीनों से तनाव बना हुआ है और हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं.
ऑल इंडिया रेडियो की ख़बर के मुताबिक़, शंघाई सहयोग संगठन-एससीओ, सोवियत संघ से अलग हुए स्वतंत्र राष्ट्रों के संगठन-सीआईएस और संयुक्त सुरक्षा संधि संगठन- सीएसटीओ के सदस्य देशों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एक ऐसी वैश्विक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है जो मुक्त, पारदर्शी, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय क़ानून से जुड़ी हुई हो.
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया में एक-दूसरे पर भरोसा और सहयोग, अंतरराष्ट्रीय क़ायदे-कानून के प्रति सम्मान, एक-दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता तथा मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की व्यवस्था की जानी चाहिए.
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर भी ज़ोर दिया कि भारत आतंकवाद के सभी प्रारूपों और प्रकारों की निंदा करता है और उनकी भी आलोचना करता है जो इसका समर्थन करते हैं.
रक्षा मंत्री ने कहा कि अभी हम सबके लिए सुरक्षा और विकास के लक्ष्य को पूरी तरह प्राप्त करने में सफल नहीं हुए हैं और अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि भारत, अफ़ग़ानिस्तान में अफ़गान लोगों के नेतृत्व में और उन्हीं के द्वारा नियंत्रित शांति प्रक्रिया को समर्थन देना जारी रखेगा.
कोविड 19 पर भी की बात
रक्षा मंत्री ने कोविड-19 महामारी की वजह से अपनों को को खोने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त की.
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस ने दुनिया को इस बात का एहसास करा दिया है कि प्रकृति पर मनुष्य का वश नहीं है और प्राकृतिक आपदाएं सीमाओं को नहीं मानतीं. उन्होंने दुनिया के देशों को आपदाओं निपटने के लिए एकजुट हो जाने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया.
रक्षा मंत्री ने कोरोना महामारी से निपटने के रूस के प्रयासों के लिए वहां की सरकार और नागरिकों को बधाई दी. उन्होंने स्पुतनिक-5 टीके के लिए रूस के वैकानिकों के प्रयासों को भी सराहा.
भारत और चीन के बीच मौजूदा विवाद
भारतीय मीडिया के कुछ हिस्सों में ये लिखा जा रहा था कि चीनी सैनिकों ने भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मई के पहले हफ़्ते से उन हिस्सों में दाख़िल हो गए हैं जो भारत अपनी तरफ़ का हिस्सा बताता रहा है.
भारतीय नेतृत्व मीडिया की इन ख़बरों को ख़ारिज करता रहा था लेकिन एलएसी पर गलवान घाटी में 15-16 जून को हुई हिंसक झड़प ने सबकी आँखें खोल दीं.
इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 सैनिक मारे गए थे. भारत के अनुसार इसमें कुछ चीनी सैनिक भी मारे गए थे लेकिन उनकी संख्या के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया था.
चीन ने भी उस झड़प में चीनी सैनिकों के मारे जाने के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया था.
इस हिंसक झड़प से पहले और बाद में सैन्य स्तर पर भारत और चीन से बातचीत होती रही है लेकिन ये भी सच है कि सीमा पर तनाव बना हुआ है.
हाल ही में ख़बर आई थी कि 29-30 अगस्त को भी सीमा पर झड़प हुई थी, लेकिन इसमें किसी के हताहत होने की कोई पुष्टि नहीं हुई थी.
भारत और चीन ने एक दूसरे पर आरोप लगाया कि वो उकसाने की कार्रवाई कर रहे हैं.
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