ईरान पर पाबंदी को लेकर अड़ा अमरीका, चीन और रूस विरोध में

डोनाल्ड ट्रंप

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमरीका माँग करेगा कि ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के सभी प्रतिबंधों को दोबारा लगाया जाए.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान इसकी घोषणा की.

पिछले सप्ताह ईरान के हथियार रखने पर पाबंदी लगाने के अमरीकी प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ख़ारिज कर दिया था. उसके बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ये फ़ैसला किया है.

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ट्रंप ने प्रेस वार्ता में 'स्नैप बैक' का ज़िक्र किया और कहा कि विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो गुरुवार को न्यूयॉर्क जाएँगे. संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है.

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अमरीका ने अभी तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि वो स्नैप बैक के लिए कब ज़ोर देगा, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा है कि उन्हें इस बात की सूचना दी गई है कि वो गुरुवार को होगा.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के एक प्रवक्ता ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो गुरुवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर दो बजे के क़रीब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेज़ के आवास पर उनसे मुलाक़ात करेंगे.

सुरक्षा परिषद में मतभेद

स्नैप बैक एक विवादास्पद प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल करके ईरान पर दोबारा प्रतबिंध लगाया जा सकता है, लेकिन अमरीका के यूरोपीय सहयोगी इसका विरोध कर रहे हैं.

अगर अमरीका अपनी बात पर अड़ा रहता है तो इससे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गतिरोध पैदा हो सकता है.

साल 2015 में अमरीका समेत छह शक्तिशाली देशों (P5+1) और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा दिए गए थे, लेकिन अब अमरीका चाहता है कि वो सभी प्रतिबंध दोबारा लागू किए जाएँ.

ट्रंप ने साल 2018 में ईरान से हुए समझौते से अमरीका को ख़ुद ही अलग कर लिया था और ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा दिया था.

अमरीका का कहना है कि समझौते से ख़ुद ही अलग होने के बावजूद, समझौते का एक पक्ष होने के कारण उसे ये अधिकार प्राप्त है कि वो संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए पारित सभी प्रतिबंधों को ईरान पर दोबारा लगा सके.

हसन रूहानी

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साल 2015 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसके तहत पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और ईरान के बीच हुए परमाणु समझौते को मंज़ूरी दी गई थी, लेकिन उस प्रस्ताव में ये भी कहा गया था कि समझौते में शामिल देश (P5+1) ख़ुद से ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगा सकते हैं अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता है.

स्नैप बैक का प्रावधान इससे पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल किया जाता है तो 30 दिनों के अंदर ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लागू किया जा सकेगा.

सुरक्षा परिषद के यूरोपीय सदस्य अमरीका की इस दलील को चुनौती देते हैं और कहते हैं कि अगर ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाया जाता है, तो परमाणु समझौत ख़त्म हो जाएगा जिसको बचाने के लिए वो लोग संघर्ष कर रहे हैं.

पिछले सप्ताह अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने को जो प्रस्ताव लाया था उसमें उसे बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी.

सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 11 अनुपस्थित थे, चीन और रूस ने प्रस्ताव का विरोध किया था, जबकि केवल डॉमिनिक गणराज्य ने अमरीका का समर्थन किया था. प्रस्ताव पारित करने के लिए कम से कम नौ देशों के समर्थन की ज़रूरत थी.

यहाँ पर मिली नाकामी के बाद ही अमरीका स्नैप बैक के प्रावधान का इस्तेमाल करना चाहता है.

लेकिन चीन और यूरोपीय देश अमरीका की इस दलील को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि अमरीका ख़ुद ही इस समझौते से अलग हुआ है, इसलिए वो ईरान पर दोबारा प्रतिबंध नहीं लगा सकता है.

रूस का आरोप है कि अमरीका राजनीति से प्रेरित होकर ईरान के ख़िलाफ़ एक अभियान चला रहा है. चीन का कहना है कि अमरीका जब इस संधि का हिस्सा है ही नहीं तो वो ईरान पर दोबारा प्रतिबंध की माँग कैसे कर सकता है.

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