माली में सेना का विद्रोह, राष्ट्रपति ने इस्तीफ़ा देकर संसद भंग की

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माली के राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकार केटा ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. ये जानकारी माली के सरकारी टीवी चैनल से मिली है.
केटा ने टीवी पर अपने संबोधन में कहा कि वो संसद और सरकार भी भंग कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि मेरे शासनकाल में ख़ून-खराबा हो. अगर आज हमारे सशस्त्र बलों के कुछ लोग मेरे शासन को अपने दख़ल से ख़त्म करना चाहते हैं तो मेरे पास विकल्प ही क्या है?"
इस ऐलान से महज कुछ घंटे पहले माली के विद्रोही सैनिकों ने राष्ट्रपति इब्राहिम बुबाकार केटा और प्रधानमंत्री बोबू सिसे को हिरासत में ले लिया था.
सेना के इस विद्रोह की शुरुआत मंगलवार को माली की राजधानी बामाको के नज़दीक एक अहम सैनिक कैंप में गोलियों की आवाज़ के साथ शुरू हुई थी.

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बामाको से 15 किलोमीटर दूर स्थित काटी कैंप में असंतुष्ट जूनियर अफसरों ने कंमाडरों को हिरासत में लिया और उसके बाद कैंप पर कब्जा जमा लिया. इसके बाद युवाओं ने शहर की सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया. माली में राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी चल रहा था.
माली की सेना में जिहादी चरमपंथियों से लगातार चल रहे संघर्ष और अपने वेतन को लेकर लंबे वक़्त से ग़ुस्सा था. केटा ने साल 2018 में लगातार दूसरी बार चुनाव जीता था लेकिन उनके शासन में भ्रष्टाचार, अर्थव्यवस्था की बदइंतज़ामी और सांप्रदायिक हिंसा बढ़ने के आरोपों के बीच ग़ुस्सा भी बढ़ा था.
इन वजहों से हाल के कुछ महीनों में माली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद रूढ़िवादी इमाम महमूद डिको की अगुवाई में एक नए विपक्षी गठबंधन का उदय हुआ. ये गठबंधन नए सुधारों और मिली-जुली सरकार की मांग कर रहा था.
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