पुतिन बेलारूस में क्या करने वाले हैं? विरोध प्रदर्शन के बीच बढ़ा संदेह

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बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको का कहना है कि रूस बाहरी सैन्य ख़तरों से सुरक्षा सहायता देने पर सहमत हो गया है.
लुकाशेंको ने पड़ोसी देश पोलैंड और लिथुआनिया में हो रहे नेटो सैन्य अभ्यास को लेकर भी चिंता जताई.
यह ख़बर ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति 9 अगस्त को विवादित चुनावों को लेकर लोगों के विरोध का सामना कर रहे हैं. प्रदर्शनों के लाइव कवरेज की माँग को लेकर शनिवार को हज़ारों की संख्या में लोग नेशनल टीवी के कार्यालय के बाहर भी जमा हुए.
राष्ट्रपति लुकाशेंको ने पिछले सप्ताह हुए चुनावों में शानदार जीत का दावा किया था, जिसके बाद से ही अशांति का माहौल है. वोटों में धांधली के आरोप लग रहे हैं.
राष्ट्रीय चुनाव आयोग का कहना है कि साल 1994 से सत्ता में रहे लुकाशेंको को 80 फ़ीसदी वोट मिले हैं. वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी की उम्मीदवार स्वेतलाना तिखानोव्सना को 10.12 फ़ीसदी वोट ही मिले हैं.
लेकिन स्वेतलाना तिखानोव्सना ने ज़ोर देकर कहा है कि अगर वोटों की गिनती सही तरीक़े से की गई होती तो उन्हें साठ से सत्तर फ़ीसदी तक वोट मिलते.

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बेलारूस कहीं रूस न बन जाए
देश में अराजकता का माहौल है. तनाव को देखते हुए लुकाशेंको ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मदद की अपील की थी.
लुकाशेंको ने कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन ने उन्हें मदद का भरोसा दिया है.
उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति ने बेलारूस को बाहरी सैन्य ख़तरे की स्थिति में व्यापक सुरक्षा का आश्वासन दिया है.
यह बयान यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों के बेलारूस में धोखाधड़ी के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों को लगाने की घोषणा के ठीक बाद आया है.
वहीं दूसरी ओर अमरीका ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होने को लेकर निंदा की है. इस बीच एक संयुक्त बयान में बाल्टिक गणतंत्र (लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया)के प्रधानमंत्रियों ने हिंसक विरोध और तनातनी को लेकर चिंता ज़ाहिर की है.

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लिथुआनिया और लातविया पहले ही कह चुके हैं कि वे बेलारूस में मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं लेकिन पहले अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकना होगा और सिविल सोसायटी के सदस्यों के एक परिषद का गठन करना होगा.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि इसके अलावा कोई भी दूसरा विकल्प नहीं है.
नेताओं का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव ना तो स्वतंत्र तरीक़े से हुए और ना ही वे निष्पक्ष थे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की निगरानी में पारदर्शी वोटिंग की मांग की है.
बयान में यह भी कहा गया है कि कि प्रधानमंत्रियों ने बेलारूस के अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा ना करने और राजनीतिक क़ैदियों को और जिनको भी हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा करने का आग्रह किया है.
मुख्य विपक्षी दल की उम्मीदवार स्वेतलाना तिखानोव्सना चुनावों के बाद लिथुआनिया के लिए रवाना हो गईं. हालांकि उन्होंने इन परिणामों की सार्वजनिक तौर पर निंदा ज़रूर की है. उनके बच्चे लिथुआनिया में ही हैं जिन्हें उन्होंने सुरक्षा दृष्टिकोण से चुनावों के पहले ही वहां भेज दिया था.
चुनावों के मद्देनज़र क़रीब छह हज़ार सात सौ से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और जिनमें से कइयों ने सुरक्षाकर्मियों के अत्याचार की शिकायत की है.
इस मामले में एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि जिन लोगों को रिहा किया गया है उन्होंने अत्याचार की बात कही है.

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पुतिन की योजना क्या है?
2014 में क्राइमिया प्रायद्वीप को रूस में मिलाने और पूर्वी यूक्रेन में अलगाववादियों के समर्थन के कारण बेलारूस में पुतिन को लेकर संदेह बढ़ा है. पुतिन पिछले दो दशक से रूस की सत्ता में हैं. यह कार्यकाल भी उनका 2024 तक रहेगा. बेलारूस में पुतिन को लेकर संदेह बढ़ रहा है.
पिछले महीने आठ दिसंबर को पुतिन और लुकाशेंको ने 'यूनियन स्टेट ऑफ रूस और बेलारूस' की बीसवीं वर्षगाँठ मनाई थी. दोनों देशों के बीच यह संधि आठ दिसंबर 1999 में हुई थी.
'यूनियन स्टेट ऑफ रूस और बेलारूस' का मतलब है कि बेलारूस को रूस में मिलाने की बात थी लेकिन यह काग़ज पर ही रह गया था.
एक बार फिर से दोनों देशों में बातचीत शुरू हुई तो बेलारूस के लोगों में डर बढ़ा है. यूनियन स्टेट ऑफ रूस और बेलारूस को सुपरनेशनल एंटटी भी कहा जाता है. मतलब दोनों देशों में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक मेल-मिलाप बढ़ेगा.
अमरीकी ब्रॉडकास्टिंग ऑफ गवनर्स के साथ काम करने वाले बेलारूस के पत्रकार फ़्रानक विकोर्का 20 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान मौजूद थे. वो कहते हैं, ''प्रदर्शन अप्रत्याशित था. मैंने सालों से ऐसा प्रदर्शन नहीं देखा. इस प्रदर्शन को 2011 के प्रदर्शन की तरह देख सकते हैं.''

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इन विरोधों में नया क्या है?
शुक्रवार को विपक्षी पार्टी की उम्मीदवार स्वेतलाना तिखानोव्सना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था और लोगों का प्रदर्शन अब भी जारी है.
समाचार एजेंसी एएफ़पी की ख़बर के मुताबिक़, शनिवार को स्टेट टेलीविज़न बिल्डिंग के बाहर क़रीब सौ कर्मचारी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि वे सोमवार को हड़ताल पर भी जाने की योजना बना रहे हैं. उनके अलावा दर्जनों की संख्या में लोगों ने हड़ताल के समर्थन वाले एक पत्र पर हस्ताक्षर किए.
एक कर्मचारी आंद्रेई योरोशेविच ने न्यूज़ एजेंसी से कहा 'हर किसी की तरह हम भी स्वतंत्र चुनाव और विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों की रिहाई का मांग कर रहे हैं.'
चुनाव के दिन बेलारूस के राष्ट्रीय चैनलों ने लुकाशेंको के समर्थन में प्रसारण किया था और उस दौरान हो रहे प्रदर्शनों को कवर नहीं किया था. बाद में स्टेट टीवी ने प्रदर्शनकारियों की हिंसा वाली फुटेज दिखाईं और लोगों से अपील की कि वे इसमें शामिल ना हों.
इस कवरेज के बाद कई पत्रकारों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.
शनिवार को हज़ारों की संख्या में लोगों ने विरोध में झंडे लहराए, मोमबत्तियां जलाईं और मेट्रो के नज़दीक उस जगह पर फूल बिछाए जहां एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी.
विपक्षी पार्टी के कई समर्थकों ने लुकाशेंकों और पुलिस की बर्बरता के ख़िलाफ़ नारे भी लगाए.
हालांकि प्रदर्शनकारी तारिकोवस्की की मौत किन परिस्थितियों में हुई, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है.
चुनाव होने के एक सप्ताह बाद रविवार को शहर के केंद्र में मार्च फ़ॉर फ्रीडम के आयोजन की भी योजना है.
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