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बेरूत धमाका: हज़ारों नाराज़ लोग सड़कों पर उतरे
लेबनान की राजधानी बेरूत में हुए भयानक धमाके के चार दिन बाद अपने नेताओं से नाराज़ लेबनान के हज़ारों लोग फिर से सड़कों पर उतरे.
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं.
मंगलवार को बंदरगाह पर हुए धमाके की घटना के बाद कई लोगों के मन में दबा गुस्सा फिर उबलने लगा है. ये वो लोग हैं जो वहां के राजनीतिक वर्ग को अयोग्य और भ्रष्ट मानते हैं.
धमाका, अमोनियम नाइट्रेट के एक विशाल भंडार के कारण हुआ था जिसे एक शिप से ज़ब्त किया गया था, लेकिन इस भंडार को कभी वहां से हटाया नहीं गया.
सरकार ने इस घटना के ज़िम्मेदार लोगों की पहचान करने का वादा किया है.
लेकिन लेबनान में बड़े स्तर पर अविश्वास का माहौल है. इससे पहले पिछले साल अक्टूबर में आर्थिक संकट और मुद्रा के कमज़ोर होने के बाद लेबनान में सरकार विरोधी आंदोलन शुरू हो गए थे.
पिछले दिनों भी जब दो मंत्री बुरी तरह से प्रभावित इलाक़ों का दौरा करने गए तो उन्हें वहां से वापस भेज दिया गया.
शनिवार के प्रदर्शनों से पहले 28 साल के एक्टिविस्ट फारेस हलाबी ने एएफ़पी न्यूज़ एजेंसी से कहा, 'मलबा हटने और हमारे घावों का दर्द कम होने के बाद अब वक़्त है कि हम अपना गुस्सा दिखाए और उन्हें सज़ा दें.'
एक मार्च वहां से भी निकलेगा जहां सबसे ज़्यादा नुक़सान हुआ है, ये इलाक़ा उस मार्टर स्क्वायर के पास है जहां से पिछले साल के सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे. कुछ प्रदर्शनकारियों ने मार्टर स्क्वायर पर फांसी के तख्ते भी लटकाए.
शहर का गुस्सा दिखाने के अलावा, मार्च का मक़सद विस्फोट के पीड़ितों को याद करना भी था. जिसमें कम से कम 154 लोगों की मौत हुई, 5 हज़ार से ज़्यादा लोग घायल हुए और क़रीब तीन लाख लोग बेघर हो गए.
लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल ऑन धमाके की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग को खारिज कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन इस बात की जांच करेगा कि कहीं ये घटना 'बाहरी हस्तक्षेप' जैसे किसी बम की वजह से तो नहीं हुई.
इस बीच वैश्विक नेता, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की ओर से रविवार को बुलाई गई एक वर्चुअल डोनर कॉन्फ्रेंस में हिस्से लेने वाले हैं.
मैक्रों जब इस हफ़्ते की शुरुआत में धमाके के बाद बेरूत आए थे तो बाहरी हस्तक्षेप की उनकी मांग का वहां मौजूद भीड़ ने स्वागत किया था.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप उन वैश्विक नेताओं में शामिल हैं जो वर्चुअल डोनर समिट में हिस्सा लेंगे.
शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने लेबनान में मानवीय संकट खड़ा होने को लेकर चेतावनी दी थी. चेतवानी में कहा गया था कि देश में खाने की कमी हो सकती है और कोविड-19 महामारी से लड़ने की क्षमता पर भी असर पड़ेगा.
कई देश अपनी ओर से मदद दे चुके हैं. अमरीका ने शुक्रवार को घोषणा की कि वो तुरंत 15 मीलियन डॉलर का खाना और दवाइयां भेजेगा.
ब्रिटेन ने पांच मीलियन पाउंड की आपात मदद भेजी और लेबनान में एक रॉयल नेवी शिव तैनात कर दी.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन ने शनिवार को लेबनान के राष्ट्रपति ऑन से बातचीत की और ब्रिटेन की ओर से 'लेबनान के लोगों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट की.'
पीड़ितों के बारे में हम और क्या जानते हैं?
सीरिया के दूतावास के मुताबिक़, धमाके में जान गंवाने वालों में 43 सीरिया के नागरिक थे. ख़बरों के मुताबिक़, कुछ बंदरगाह पर काम करने वाले लोग थे.
लेबनन में 10 लाख से ज़्यादा सीरियाई लोग रहते हैं, जो सीरिया में चल रहे लंबे संघर्ष की वजह से शरणार्थी के रूप में आए थे.
जान गंवाने वालों में नीदरलैंड्स के राजदूत की पत्नी भी शामिल थीं. लेबनान के प्रशासन का कहना है कि 60 लोग अब भी लापता हैं, जिनके मलबे के नीचे ज़िंदा होने की उम्मीद धुंधली होती जा रही है.
जांच कहां तक पहुंची?
लेबनान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट - जिसे आम तौर पर खेती के लिए उर्वरक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, इसके अलावा निर्माण या खनन कार्यों में विस्फोटक के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है - इतने अमोनियम नाइट्रेट को 2014 से अबतक बिना किसी सुरक्षा के बंदरगाह पर वेयरहाउस में रखा गया था.
लेबनान के लोगों में इस बात को लेकर अविश्वास है कि शहर के केंद्र के पास एक गोदाम में इतनी विस्फोटक सामग्री रखी हुई थी.
बुधवार को राष्ट्रपति ऑन ने वादा किया कि लेबनान का प्रशासन इस घटना की पारदर्शी तरीक़े से जांच करेगा. साथ ही उन्होंने कहा है कि लापरवाही के ज़िम्मेदार लोगों की पहचान की जाएगी और उन्हें कड़ी सज़ा दी जाएगी.
हालांकि तभी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग उठ रही है. लेकिन इस मांग को राष्ट्रपति ने शुक्रवार को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि "सच को कमज़ोर करने के लिए बंदरगाह मामले में अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की जा रही है."
राष्ट्रपति ऑन ने ये भी कहा कि सरकार तीन संभावनाओं की जांच कर रही है: लापरवाही, दुर्घटना या रॉकेट या बम या किसी और चीज़ से बाहरी हस्तक्षेप.
अधिकारियों का कहना है कि ऐसा लगता है कि धमाका आग लगने की वजह से हुआ. अधिकारियों के मुताबिक़, राष्ट्रपति ऑन की कही तीसरी संभावना के कोई सबूत नहीं मिलते हैं.
इस मामले में 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें लेबनान कस्टम अथॉरिटी के डायरेक्टर जनरल भी शामिल हैं.
इस बीच सरकार का समर्थन करने वाले ईरान समर्थक हिज़्बुल्लाह मूवमेंट ने धमाके में अपना हाथ होने से इनकार किया है. समूह ने कहा कि बंदगाह उसके नियंत्रण में नहीं है और उसने वहां कोई हथियार या गोला-बारूद जमा नहीं किया है.
हिज़्बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह ने घोषणा की, "ना हथियार का कोई गुप्त भंडार, ना कोई मिसाइल फैक्ट्री, ना एक भी मिसाइल, ना एक भी राइफल, ना एक भी बम, ना एक भी बुलेट, ना नाइट्रेट. कुछ भी नहीं. ना अभी, ना पहले."
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