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लेबनान की राजधानी बेरुत में धमाके: 'यहां हर तरफ़ घायल लोग हैं या फिर लाशें'
लेबनान की राजधानी बेरुत में हुए जानलेवा धमाकों के बाद गुमशुदा लोगों की तलाश का काम अभी भी जारी है.
राहत कार्यों में जुटे लोग 100 से भी ज़्यादा लोगों की तलाश कर रहे हैं जिनकी धमाके के बाद से कोई खोज खबर नहीं है.
मंगलवार को हुए इन धमाकों में कम से कम सौ लोगों की मौत हो गई और चार हज़ार से भी ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.
बेरुत के बंदरगाह इलाके में हुए इन धमाकों से पूरा शहर ही हिल गया था.
तटीय इलाके में धमाके के बाद आसमान में धूल और धुएं का गुबार छा गया था.
राष्ट्रपति माइकल इयोन ने बताया कि असुरक्षित गोदामों में रखे गए 2750 टन अमोनियम नाइट्रेट की वजह से ये धमाका हुआ.
अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल खेतीबारी के काम में उर्वरक के तौर पर होता है या फिर विस्फोटक के रूप में.
उन्होंने बुधवार को कैबिनेट की आपातकालीन बैठक बुलाई है और कहा है देश में दो हफ़्ते के लिए इमर्जेंसी लागू कर दिया जाना चाहिए.
बुधवार से देश में तीन दिनों के लिए आधिकारिक शोक की घोषणा की गई है.
बेरुत में क्या हुआ?
मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम छह बजे बंदरगाह पर आग लगने की एक घटना के बाद ये धमाके हुए थे.
घटना के चश्मदीद रहे हादी नसराल्लाह ने बताया कि उन्होंने आग लगते हुए तो देखा लेकिन उन्हें ये उम्मीद नहीं थी कि धमाका हो जाएगा.
बीबीसी से उन्होंने कहा, "कुछ लम्हों के लिए लगा कि मैंने अपने सुनने की ताक़त खो दी है. मैं जानता था कि कुछ गलत हुआ है लेकिन तभी मेरी कार, अगल-बगल की गाड़ियों, दुकानों के ऊपर हर तरफ़ से कांच के टुकड़े अचानक से आकर बिखर गए. पूरी इमारत से ही कांच के टुकड़े गिरकर नीचे आ रहे थे."
बीबीसी की अरबी सेवा की संवाददाता मरियम ताउमी घटना के वक़्त बेरुत में 'मोरक्कन एजेंसी फ़ॉर सस्टेनेबल एनर्जी' नाम की एक संस्था के एक सदस्य का इटरव्यू कर रही थीं.
इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मरियम धमाके की ताक़त के कारण किस तरह से अपनी कुर्सी से नीचे गिर पड़ीं. अब वे सुरक्षित हैं.
साइप्रस तक सुनी गई गूंज
बीबीसी की लीना सिन्जाब का घर बंदरगाह के इलाके से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर है. उन्होंने बताया कि वे धमाके को महसूस कर रही थीं.
"मेरे घर की इमारत हिल रही थी. लग रहा था कि वो गिर ही जाएगा. सभी खिड़कियां अपने आप खुल गई थीं."
बेरुत में जिस जगह पर ये धमाके हुए वहां से 150 मील की दूरी पर पूर्वी भूमध्य सागर के द्वीपीय देश साइप्रस में भी धमाके की गूंज सुनी गई.
वहां के लोगों को लगा कि जैसे कोई भूकंप आया हो.
बीबीसी के पत्रकार रामी रूहायेम ने बताया कि धमाके के बाद हर तरफ़ अफरातफरी का माहौल और ऐम्बुलेंस के सायर की गूंज सुनाई दे रही थी. ट्रैफिक जाम हो गया था और घायलों तक पहुंचने के लिए ऐम्बुलेंस को मशक्कत करनी पड़ रही थी. सड़क पर कांच के टुकड़े बिखरे हुए थे.
'बहुत बड़ी तबाही का मंज़र'
लोकल मीडिया में मलबे में दबे हुए लोगों, धमाके से बर्बाद हो गई इमारतों और गाड़ियों के वीडियो फुटेज दिखाये जा रहे थे.
रिपोर्टें थीं कि अस्पतालों में क्षमता से ज़्यादा घायलों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया था. लेबनान रेड क्रॉस के चीफ़ जॉर्ज केट्टानी ने इसे एक 'बहुत बड़ी तबाही का मंज़र' करार दिया.
जॉर्ज ने कहा, "यहां हर तरफ़ घायल लोग हैं या फिर लाशें."
उनके संगठन ने बताया कि राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है और 100 से ज़्यादा गुमशुदा लोगों की खोज की जा रही है.
राजधानी बेरुत के रफीक हरीरी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के प्रमुख फिरास आबियाद ने बीबीसी को बताया कि धमाके के बाद 'भीषण अफरातफरी' का माहौल था.
"एक ही वक़्त में अस्पताल के इमर्जेंसी रूम में दसियों घायल लाए गए थे. शुरू में आए लोगों में ज़्यादातर को कांच की वजह से हुए ज़ख़्म थे. हम बच गए लोगों को खोज लेने की उम्मीद कर रहे हैं लेकिन हर गुजरते लम्हे के साथ-साथ ये मुश्किल होता जा रहा है."
पत्रकार सुनीवा रोज़ ने बताया कि बेरुत के आसमान में अभी भी धुएं का गुबार देखा जा सकता है.
उन्होंने कहा, "पूरा शहर ही स्याह लग रहा था. लोग ख़ून से लथपथ थे. आसपास चलना तक मुश्किल हो रहा था. मैंने एक डॉक्टर को 86 साल की एक महिला का इलाज करते देखा. वो धमाके के बाद अपने घर से फर्स्ट एड किट लेकर दौड़ा चला आया था."
धमाका कैसे हुआ?
अधिकारियों ने बताया कि वे दुर्घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं.
ये पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आख़िर किस तरह से अमोनियम नाइट्रेट के स्टोर में धमाका हुआ.
साल 2013 में ज़ब्त किए गए एक जहाज से ये अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया गया था और तभी से ये नजदीक के एक वेयरहाउस में रखा गया था.
अमोनियम नाइट्रेट
अमोनियम नाइट्रेट एक औद्योगिक रसायन है जिसका इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में उर्वरक के तौर पर होता है.
माइनिंग इंडस्ट्री में अमोनियन नाइट्रेट का इस्तेमाल विस्फोटक के रूप में भी होता है.
अमोनियन नाइट्रेट अपने आप में विस्फोटक नहीं है लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में ये ज्वलीनशील पदार्थ है.
जब इसका विस्फोट होता है तो ये नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया जैसी जहरीली गैस रिलीज करता है.
इसके भंडारण के लिए सख़्त नियम होते हैं. जिस जगह ये रखा जाता है, वो फायर प्रूफ होना चाहिए. इसके रखने की जगह पर किसी तरह का कोई नाला या पाइप या कोई अन्य रास्ता नहीं चाहिए.
ब्रिटेन के पूर्व खुफिया अधिकारी फिलिप इंग्राम ने बीबीसी को बताया कि अमोनियम नाइट्रेट ख़ास परिस्थितियों में ही विस्फोटक पदार्थ का स्वरूप ले सकता है.
उन्होंने कहा कि अगर ये ठीक से रखा जाए तो ये तुलनात्मक रूप से सुरक्षित है लेकिन अगर इसमें फ़्यूल ऑयल जैसी चीज़ मिल जाए तो धमाका हो सकता है.
लेबनान के सुप्रीम डिफेंस काउंसिल ने कहा कि इस धमाके के लिए जिम्मेदार लोगों अधिकतम सज़ा दी जाएगी.
लेबनान के हालात
लेबनान में ये धमाके एक बहुत ही संवेदनशील समय में हुए हैं. देश में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. अस्पतालों में पहले से जगह की कमी है.
और अब उन्हें हज़ारों घायल लोगों का इलाज भी करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ़ ये देश एक बड़े आर्थिक संकट से भी गुजर रहा है.
लेबनान अपनी ज़रूरत की खाने-पीने की चीज़ें आयात करता है और ये सामान बंदरगाह के पास के गोदामों में रखे हुए थे जो धमाके के कारण तबाह हो गए हैं.
इस घटना से देश में खाद्य असुरक्षा की स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है. बेरुत पोर्ट के भविष्य को लेकर भी संदेह का आलम है.
इलाके की कई इमारतें तबाह हो गईं हैं या फिर रहने लायक नहीं रह गई हैं. बहुत से लोग बेघर हो गए हैं.
राष्ट्रपति ने घोषणा की है कि वे 66 मिलियन डॉलर की रकम आपातकालीन फंड से जारी करेंगे लेकिन इस धमाके का अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक असर रहने वाला है.
रफीक हरीरी की हत्या का मामला
धमाका जिस जगह पर हुआ, 15 साल पहले उसी जगह पर पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की हत्या कर दी गई थी.
नीदरलैंड की एक स्पेशल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है और इसका फ़ैसला भी जल्द ही आने वाला है.
हरीरी की हत्या के लिए जिम्मेदार चार लोगों पर ये मुकदमा चलाया जा रहा है.
धमाके से पहले भी लेबनान में तनाव के हालात थे और देश की ख़राब होती जा रही अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर विरोध प्रदर्शन जारी थे.
साल 1975-1990 तक चले गृह युद्ध के बाद लेबनान की अर्थव्यवस्था अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है.
बहुत से लोग इसके लिए सत्ता में बैठे कुलीन वर्ग के राजनीति को जिम्मेदार मानते हैं जिनकी अपनी दौलत तो लगातार बढ़ी है लेकिन वे लोग देश की समस्याओं का निदान निकालने में नाकाम रहे हैं. लोगों को न तो पर्याप्त बिजली मिल पा रही है और नही अस्पतालों की सुविधा ही संतोषजनक है. यहां तक कि देश में साफ पीने का पानी भी बहुत से लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
इसराइल के साथ तनाव
लेबनान इसराइल की सीमा पर भी तनाव का माहौल है. पिछले हफ्ते ही इसराइल ने कहा था कि हेज़बुल्लाह की ओर से सीमा के अतिक्रमण की कोशिशें नाकाम कर दी गई हैं.
हेज़बुल्लाह शिया मुसलमानों का एक सशस्त्र संगठन है जिसका लेबनान में अच्छा खासा प्रभाव है.
हालांकि इसराइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि बेरुत के धमाकों से इसराइल का कोई लेनादेना नहीं है.
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