'जिंदा बचने पर मैं दोषी जैसा महसूस करता हूं': म्यांमार में जेड की जानलेवा तलाश

सी थू फ्यो मलबे में बचे हुए रत्न ढूंढ रहे थे, तभी उन्हें अपने आस-पास की धरती हिलती हुई महसूस हुई.
21 साल के सी थू उत्तरी म्यांमार के कचिन प्रदेश में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी जेड पत्थर या हरिताश्म यानी हरे रंग के क़ीमती रत्न की एक खदान में काम करते थे.
वो उस दिन खदान में जेड पत्थर खोज रहे सैकड़ों लोगों में से एक थे. भूस्खलन के कारण जब हादसा हुआ तो उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन जब तक वो भाग पाते, उससे पहले ही पानी, किचड़ और पत्थरों के सैलाब के नीचे दब गए.
उस दिन को याद करते हुए वो कहते हैं, "मेरे मुंह में कीचड़ भर गया था. मुझे पत्थर लग रहे थे और सैलाब में मैं नीचे दबता जा रहा था. मुझे लगा मैं मर जाऊंगा."
लेकिन सी थू कोशिश करके वहां से निकल गए. बाद में अस्पताल में उन्हें पता चला कि उनके सात क़रीबी दोस्त नहीं बच पाए. वो उन लगभग 200 लोगों में शामिल थे, जो देश के अब तक के सबसे भयानक खनन भूस्खलन में जान गंवा चुके थे.
सी थू अपने दोस्तों को याद करते हुए धीमी आवाज़ में कहते हैं, "हम भाइयों की तरह रहे. कई बार एक ही बिस्तर पर सोते थे."
वो अपने छोटे से घर में नौ सदस्यों के साथ रहते हैं. अपने घर से वो उस पहाड़ को देख सकते हैं, जहां उस दिन वो पत्थर ढूंढ रहे थे.
सी थू कहते हैं, "अकेले ज़िंदा बचने की वजह से मैं ख़ुद को अपराधी जैसा महसूस करता हूं. काश ये हादसा एक बुरा सपना होता और मैं जब जाग जाता तो कोई भूस्खलन नहीं हुआ होता और मेरे दोस्त लौट आए होते."

कचिन प्रदेश में लगभग हर साल बरसात के मौसम के दौरान विशाल खदानों में जानलेवा भूस्खलन होते हैं. इन खदानों से दुनिया भर का लगभग 70 फ़ीसदी जेड निकलता है.
चीनियों के बीच इस क़ीमती पत्थर की काफ़ी मांग रहती है और हर साल इसका अरबों डॉलर का व्यापार होता है.
पिछले महीने का भूस्खलन सबसे जानलेवा था. लोगों ने फ़ोन पर इसके वीडियो बना लिए थे.
सी थू कहते हैं, "सोशल मीडिया ने लोगों को इस बारे में जागरूक किया. जब यहां इंटरनेट और फ़ोन कनेक्शन नहीं था तब प्रशासन और कंपनियां आंखें मूंद लेती थीं."

पर्यावरण मंत्री ने मारे गए लोगों को 'लालची' बताया
दबाव की वजह से म्यांमार की सरकार ने एक जांच समूह बनाया. इसका अध्यक्ष प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण संरक्षण मंत्री ओहेन विन को बनाया गया. इस समूह को जांच कर हादसे की ज़िम्मोदारी तय करने और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवज़े का प्रबंध करने का काम सौंपा गया.
समूह की रिपोर्ट अब राष्ट्रपति के पास है. रिपोर्ट की फ़ांइडिंग अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन मंत्री ओहेन विन ने जेड ढूंढने वाले लोगों पर नाराज़गी दिखाते हुए मरने वालों को 'लालची' बताया.
उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में खदानें आधिकारिक रूप से बंद थीं और सरकार ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी. उन्होंने कहा, "ये लालच ही था."
म्यांमार की नेता आंग सांग सू ची ने बेरोज़गारी के स्तर को इसके लिए ज़िम्मेदार बताया.

ग़रीबी और मजबूरी ने खदानों में धकेला
यांग नाइंग म्यो भी उस दिन खदानों में थे. उन्होंने एक खाली पीपे को पकड़कर अपनी जान बचाई. वो याद करते हैं, ''कई लोग तैरती लाशों को पकड़े हुए थे. पर्यावरण मंत्री के शब्दों के सुनकर उन्हें बहुत दुख हुआ है.''
वो कहते हैं, "सरकार ने उन्हें जांच करने के लिए भेजा लेकिन वो हम पत्थर ढूंढने वालों पर ही आरोप लगा रहे हैं. इससे हमें बहुत दुख हुआ, वो भी ऐसे वक़्त में जब हम पहले ही परेशान हैं."
23 साल के यांग नाइंग के सिर में 23 टांके लगे हैं और उनके शरीर पर कई गहरे घाव हैं. उनके पास बर्मी साहित्य में स्नातक की डिग्री भी है.
उन्होंने शुरू में अपने छुट्टियों के दिनों में 'जेब खर्च' के लिए खदानों में जेड ढूंढना शुरू किया था. ग्रैजुएशन के बाद वो बहुत निराश हो गए और खदानों में लौट आए. वो कहते हैं कि उन्हें लगता है कि अब उनके पास बस यही काम बचा है.
सी थू यहां तक भी नहीं पहुंच पाए थे. 2008 में तूफ़ान 'नरगिस' ने उनके परिवार की चावल की खेती को तबाह कर दिया और उनके जीवनयापन के सभी साधन नष्ट हो गए. तब उन्हें 10 साल की उम्र में स्कूल छोड़ना पड़ा था.
अब उनके परिवार के 10 सदस्य खदानों के नज़दीक एक साथ रहते हैं. सी थू आम तौर पर क़रीब सुबह पांच बजे उठ जाते हैं और कई बार पूरा दिन काम करते हैं और क़ीमती पत्थर खोजते हैं.

'पीड़ितों को दोष देना हल नहीं'
जेड ढूंढने वाले लोग बेरोज़गारी और ग़रीबी की मार झेल रहे होते हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वो खदान के नज़दीक वाले इलाक़ों में इसलिए सक्रिय होते हैं क्योंकि म्यांमार की सरकार का उन इलाक़ों पर सीमित नियंत्रण है.
प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर नज़र रखने वाले एक अंतरराष्ट्रीय वॉचडॉग, ग्लोबल विटनेस के लीड कैम्पेनर पॉल डोनोविट्ज़ कहते हैं कि पीड़ितों पर ही आरोप लगाने से समस्या का हल नहीं होगा.
डोनोविट्ज़ कहते हैं कि मोटे तौर पर इंडस्ट्री को म्यांमार सेना से जुड़ी कंपनियां नियंत्रित करती हैं और बहुत गोपनीयता के साथ काम करती हैं. सशस्त्र विद्रोही समूह, जो क्षेत्र में स्व-शासन की मांग कर रहे हैं वो भी अपनी कमाई यहां से करते हैं. साथ ही वो ड्रग्स से भी कमाते हैं.
डोनोविट्ज कहते हैं, "हमें सबूत मिले हैं कि जातीय सशस्त्र समूह और सेना भले ही युद्ध के मैदान में सशस्त्र संघर्ष में उलझे हैं. लेकिन खनन क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं."
वो कहते हैं कि सरकार जिस युद्धविराम समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रही है वो खदानों में उनके आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है.

चीन की बढ़ती चाहत
नैचुरल रिसोर्सेस गवर्नेंस इंस्टिट्यूट के 2019 के एक विश्लेषण में अनुमान लगाया गया था कि म्यांमार की खदानों से हर साल निकलने वाले जेड की क़ीमत क़रीब 15 अरब डॉलर होती है.
इसमें से ज़्यादातर जेड का खनन ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से होता है. आधिकारिक सरकारी आंकड़ों में इसकी क़ीमत लाखों में बताई जाती है.
डोनोविट्ज़ कहते हैं कि प्रदेश उस 80 से 90 प्रतिशत रेवेन्यू को खो रहा है, जो उसे कमाना चाहिए था.
माना जाता है कि कचिन प्रदेश की खदानों से निकाला गया ज़्यादातर जेड सीमा पार चीन पहुंचाया जाता है.
चीन जैसे-जैसे और अमीर हो रहा है, इस उजले क़ीमती पत्थर के लिए उसकी चाह बढ़ती जा रही है. और बाद में जाकर जेड की क़ीमत सोने से भी ज़्यादा हो सकती है.

जब सी थू को एक बड़ा जेड पत्थर मिलता है तो खनन कंपनी या सशस्त्र समूह या दोनों उसमें अपना हिस्सा लेते हैं. कुछ मामलों में वो पत्थर ही अपने कब्ज़े में ले लेते हैं.
भूस्खलन वाली जगह की ओर इशारा करते हुए वो बताते हैं, "मेरे एक दोस्त को इस खदान से एक बड़ा क़ीमती पत्थर मिला था लेकिन उसने उसे पानी में फेंक दिया क्योंकि वो हमारे साथ किए जाने वाले व्यव्हार से तंग आ चुका था."
खदान में काम करने वाले लोग ड्रग्स के भी आदी होते हैं. लोगों ने बीबीसी को बताया कि हिरोइन का एक शॉट एक डॉलर का पड़ता है.
भूस्खलन वाली जगह पर काम करने वाली चार कंपनियों में से एक है- ट्रिपल वन माइनिंग कंपनी.
यू मिन थू खनन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी और जांच टीम के सचिव भी हैं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में पुष्टि की कि कंपनी एक संयुक्त चीनी-म्यांमार वेंचर है और उसका संबंध एक जातीय सशस्त्र समूह से भी है.
उन्होंने कहा, "जिन सशस्त्र समूहों ने सरकार के साथ शांति समझौता कर लिया है, उन्हें देश में निवेश करने का अधिकार है."

उन्होंने बताया, ''2019 का एक क़ानून विदेशियों को जेड खदानों में निवेश करने से रोकता है. लेकिन चीनी खनन कंपनियां संयुक्त वेंचर बना सकती हैं. फिर दोनों में मुनाफे का बंटवारा होता है. सरकार को 25% मिलता है और कंपनी को 75%."
अधिक पारदर्शिता लाने की कोशिश में सरकार ने पिछले साल के आखिर में खनन कंपनियों के स्वामित्व और संभावित हितों के टकराव को लेकर जानकारी प्रकाशित की थी.
लेकिन आंकड़ों का विश्लेषण करती एक नई रिपोर्ट में ग्लोबल विटनेस ने पाया कि हिस्सा लेने वाली 163 में से सिर्फ आठ कंपनियों ने बताया कि उनके मालिकों के सेना के मौजूदा या पूर्व बड़े अधिकारियों या जातीय सशस्त्र समूहों के नेताओं से क़रीबी संबंध हैं.
ग्लोबल विटनेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, म्यांमार सेना के स्वामित्व वाली MEHL कंपनी के लिए एंट्रीज़ 'अधूरी और गलत' थी और ट्रिपल वन माइनिंग कंपनी तो लिस्ट में ही नहीं थी.

'धुंधली होती उम्मीद'
जिस खदान स्थल पर सी थू के दोस्तों की मौत हुई, वहां पिछले महीने की आखिर में काली और धुमैली मिट्टी में फूल रखे गए और धूप लगाई गई.
ये सब जान गंवाने वाले और लापता लोगों की याद में किया गया. इस कार्यक्रम का नेतृत्व देश के सबसे प्रमुख साधु सितगु सयादव ने किया.
200 से ज़्यादा साधुओं ने सैंकड़ों दूसरे लोगों के साथ बौद्ध संस्कार का जप किया. ताकि जान गंवाने वाले लोगों का एक बेहतर जीवन के साथ पुनर्जन्म हो.

लापता बेटे को ढूंढती मां
भीड़ में डॉ मू मू भी थीं. जो मांडले से 20 घंटे का सफर कर अपने 37 साल के लापता बेटे को ढूंढने आई थीं.
वो कहती हैं, "जब भी हर बार में सुनती हूं कि कोई शव मिला तो मैं भागकर देखने के लिए खदान के अंदर जाती हूं." बार-बार चढ़ और उतरकर उनके घुटने सूज गए थे.
अपने बेटे का शव मिलने के बाद ही उन्हें 2,500 डॉलर का मुआवज़ा मिलेगा. जो सरकार और सहायता एजेंसियां, हादसे में मारे गए पीड़ितों के परिवार वालों को दे रही हैं.
वो कहती हैं, "मैं जानती हूं कि मैं उसे खो चुकी हूं और उसके शव मिलने की उम्मीद भी धुंधली होती जा रही है. अब मैं बस उसके कमरे में सो रही हूं जो शोक में डूबा है, अच्छी बातों को याद कर रही हूं और उसके उन कपड़ों को देखकर खुदको सांत्वना दे रही हूं जो वो ज़िंदा होने के समय पहनता था."

हादसे के एक महीने बाद लोग खदानों में लौटने लगे हैं. काम पर वापस लौटने वालों में बच्चे भी हैं जो अपने मां-बाप के साथ कड़ी मेहनत करते हैं, नाज़ुक चट्टानों पर क़ीमती पत्थर खोजते हैं, ये जानते हुए कि उनके चारों ओर की चट्टानें गिर भी सकती हैं.
भूस्खलन के 10 दिन बाद एक बरसाती दिन पर सी थू पैदल खदान की ओर निकल गए. वो अपने ज़ख्म ठीक होने का इंतज़ार कर रहे थे. वो कहते हैं कि वो काम पर लौटेंगे.
जहां उनके दोस्त मरे, उस खान के किनारे पर खड़े होकर वो दूर तक देखते हैं और कहते हैं, ''अगली बार कुछ बुरा होने से पहले ही मैं भाग जाऊंगा."
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