वो एक तस्वीर जिसने नौकरी छीन ली

    • Author, मरियाना सांशेश
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील, वॉशिंगटन

तीन जून को इमैनुएल कैफर्टी अमरीकी शहर सैन डियागो में ज़मीन के नीचे गैस और बिजील की जांच का काम करके वापस लौट रहे थे.

47 साल के मैक्सिकन अमरीकी इमैनुएल कंपनी के ट्रक से वापस आ रहे थे.

गर्म दोपहर थी इसलिए उन्होंने गाड़ी का एक शीशा खोल रखा था और उससे दायां हाथ बाहर निकाला हुआ था.

लेकिन, अगले कुछ घंटों में कुछ ऐसा होने वाला था जिसमें उनकी नौकरी चली गई और वो नस्लवादी ठहरा दिए गए.

और ये सब सिर्फ़ उनकी अंगुलियों से एक खास संकेत मिलने के कारण हुआ.

एक वायरल पोस्ट और बर्खास्तगी

कैफर्टी ने बीबीसी को बताया कि ड्राइव करते हुए वो ऐसे ही अपने उल्टे हाथ की अंगुलियां चटका रहे थे.

वह कहते हैं, "लेकिन, उस पल में मोबाइल फोन लिए हुए और ट्विटर अकाउंट रखने वाले एक अनजाने शख़्स ने उनकी पूरी ज़िंदगी ही पलट दी."

उस शख़्स के लिए कैफर्टी के हाथ से बना संकेत गोरे रंग के वर्चस्व से जुड़ा था. दरअसल, अक्सर अंगुठी और तर्जनी उंगली को मिलाकर जो 'ओके' का संकेत (सिंबल) बनता हैं वो गोरे रंग की ताकत दिखाने वाला नस्लवादी संकेत भी माना जाता है.

कैफर्टी याद करते हैं, ''वो शख़्स ज़ोर-ज़ोर से हॉर्न बजाने लगा और गुस्सा होने लगा. वो चिल्लाया कि क्या तुम ऐसा ही करते रहोगे. तभी उसने अपना फोन निकाला और मेरी फोटो ले ली. मैं कुछ समझ ही नहीं पाया.''

इस घटना के दो घंटे बाद कैफर्टी के सुपरवाइज़र का फोन आया. उन्होंने बताया कि कैफर्टी को सोशल मीडिया पर नस्लवादी कहा जा रहा है और उन्हें बिना वेतन नौकरी से निलंबित किया जाता है.

इसके एक घंटे बाद कुछ सहकर्मी उनके घर आए और कंपनी का ट्रक और कंप्यूटर ले गए.

पांच दिनों बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.

कैफर्टी कहते हैं, ''इस तरह मैंने वो नौकरी खो दी जो मुझे सबसे ज़्यादा पसंद थी.''

इमैनुएल की मां एक मैक्सिको से आईं एक प्रवासी थीं और वो एक बेहतर ज़िंदगी का सपना देख रहे थे.

अपनी इस नौकरी में वो 41 डॉलर प्रति घंटा कमाते थे जो उनकी पिछली नौकरी के वेतन का दुगना था. साथ ही उन्हें ज़िंदगी में पहली बाहर हेल्थ इंश्योरेंस और पेंशन प्लान भी मिला था.

जब छह महीनों पहले उन्हें सैन डियागो गैस एंड इलैक्ट्रिसिटी कंपनी में नौकरी मिली थी तो उन्होंने अपनी बेटियों और उनके बच्चों को सेलिब्रेट करने बुलाया था.

कैफर्टी कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि अंगुलियों को इस तरह मोड़ना एक नस्लवादी संकेत है.

एक अमरीकी एनजीओ एंटी-डिफेमेशन लीग के मुताबिक 'ओके' का संकेत (सिंबल) साल 2017 में नस्लवादी भेदभाव से जुड़ा था. ऑनलाइन फोरम्स पर लोग व्हाइट पावर (White Power- WP) के लिए इस संकेत का इस्तेमाल करने लगे. ये संकेट व्हाइट पावर के W और P को दर्शाता है.

एंटी-डिफेमेशन लीग ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, ''अधिकतर इस संकेत का इस्तेमाल अन्य अर्थों में भी किया जाता है, जैसे स्वीकृति और सहमति. इसलिए हम ये नहीं मान सकते कि जिसने भी इस संकेत का इस्तेमाल किया है वो नस्लवाद के संदर्भ में ही किया है जब तक कि इसके समर्थन में अन्य प्रासंगिक साक्ष्य ना हों. साल 2017 के बाद से कई लोगों पर इस संकेत के चलते नस्लवाद के झूठे आरोप लगाए गए हैं.''

आरोप लगाने वाले को खेद

कैफर्टी के साथ भी यही हुआ था.

वह कहते हैं, ''मेरे मामले में, ये कोई संकेत भी नहीं था. मैं बस अपनी अंगुलियां चटका रहा था. लेकिन, एक गोरे शख़्स ने इसे नस्लवादी संकेत समझ लिया और मेरे बॉस को बता दिया, जो खुद भी गोरे हैं.''

वह अपनी बांह को रगड़ते हुए उसका रंग दिखाकर कहते हैं, ''उन्होंने उस शख़्स पर भरोसा किया, मुझ पर नहीं जबकि मैं खुद गोरा नहीं हूं.''

जिस शख़्स ने कैफर्टी की तस्वीर ट्विटर पर डाली थी उसने बाद में टीवी चैनल एनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि उस वक़्त उन्हें जो लगा था, वो बात बहुत ज़्यादा आगे बढ़ गई.

उस शख़्स ने अपने ट्वीट में सैन डियागो एंड इलेक्ट्रिसिटी कंपनी को टैग किया था लेकिन अब उनका कहना है कि वो नहीं चाहते थे कि कैफर्टी की नौकरी चली जाए.

उन्होंने अपना पोस्ट और ट्विटर अकाउंट दोनों डिलीट कर दिए. लेकिन, बहुत देर हो चुकी थी और उनका पोस्ट वायरल हो गया था.

कैफर्टी के पूर्व बॉस ने अपने फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया है और कहा है कि कंपनी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और वो अपने फैसले पर कायम हैं.

बढ़ रहा है 'कैंसलिंग कल्चर'

कैफर्टी कहते हैं कि उन्होंने उन जगहों पर भी संपर्क किया जहां पर उन्होंने पहले नौकरी की थी लेकिन कोई काम नहीं मिला.

वह बताते हैं, ''लोगों ने मुझे ट्विटर पर कैंसल कर दिया है. कोई भी कंपनी भर्ती करने से पहले गूगल पर आपका नाम चैक करती है. अब मेरा नाम इस घटना से जुड़ गया है, भले ही में निर्दोष हूं या नहीं. मुझे नहीं पता कि अब मैं आगे क्या करूंगा. तीन जून की उस घटना से बाहर निकलने के लिए मैंने थेरेपी भी ली है.''

कैफर्टी का मामला 'कैंसल कल्चर' के दुष्प्रभावों का एक उदाहरण है.

जो आंदोलन सेलिब्रिटीज़ के विचारों और व्यवहार से विरोध प्रकट करने के लिए शुरू हुआ था वो अब आम लोगों तक भी पहुंच गया है. अगर लोगों को कुछ गलत लगता है तो वो उसे रिकॉर्ड करके पोस्ट कर देते हैं. उसके साथ किसी कंपनी, प्रभावी व्यक्ति या किसी प्राधिकरण को टैग भी कर देते हैं.

ऐसे पोस्ट हज़ारों हज़ार की संख्या में शेयर होते हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स में स्तंभकार रॉस डाउथैट कहते हैं, ''आपको सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होने के लिए लोकप्रिय और राजनीतिक होने की ज़रूरत नहीं है. इसके लिए बस एक बुरा दिन हो जिसके परिणाम आपको तब तक भुगतने पड़ सकते हैं जब तक गूगल है.''

कंपनियां ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई करती हैं लेकिन ज़रूरी नहीं कि जो शख़्स इसमें फंसा हो वो ठीक से अपना बचाव कर पए.

कैफर्टी कहते हैं, ''मेरे मामले में कंपनी ने बस एक बार मेरी बात सुनी और उसके बाद मुझे निकाल दिया. ऐसा लगा कि जैसे उन्होंने मान लिया हो कि मैं नस्लवादी हूं.''

'कैंसिलेशन' के और भी मामले

29 जून को न्यूयॉर्क कॉलेज की एक ड्रामा टीचर को नस्लीय समानता पर एक वीडियो कांफ्रेंस के दौरान झपकी आ गई. इसके बाद लोगों का गुस्सा उन पर टूट पड़ा.

उन्हें नस्लवादी बताकर नौकरी से निकालने की मांग करते हुए एक ऑनलाइन पिटिशन शुरू की गई जिस पर 2000 लोगों ने साइन किए.

वो टीचर इस आरोप से इनकार करती हैं. उनका है कि जब वो स्क्रीन से अपनी नज़रें हटा रही थीं तभी वो फोटो ले ली गई.

जुलाई अंत में करीब 150 पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और कलाकारों ने एक खुला पत्र लिखा था जिसमें कहा गया था कि सूचना और विचारों की आज़ादी एक उदार समाज के लिए बेहद ज़रूरी है लेकिन उस पर प्रतिबंध बढ़ता जा रहा है.

लेकिन, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और कलाकारों के एक अन्य समूह ने दूसरा खुल पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उस पत्र को लिखने वालों ने अल्पसंख्यकों जैसे काले लोग और एलजीबीटी की समस्याओं की उपेक्षा की है.

आगे क्या करेंगे कैफर्टी

कैफर्टी अपनी ज़िंदगी को फिर से संभालने की कोशिश कर रहे हैं.

वो सैन डियागो गैस एंड इलैक्ट्रिसिटी कंपनी और उनकी तस्वीर लेने वाले शख़्स के ख़िलाफ़ कोर्ट में केस करेंगे. लेकिन, एक साल से पहले इस मामले में कोई फैसला आने की उम्मीद नहीं है.

कैफर्टी कहते हैं कि वो नस्लवाद के विरुद्ध चल रहे आंदोलन से सहानुभूति रखते हैं लेकिन वो ज़िंदगी में कभी भी राजनीतिक मामलों में शामिल नहीं रहे.

वो बताते हैं, ''मेरे 'कैंसल' होने से पहले मेरा ट्विटर पर अकाउंट भी नहीं था.'' कैफर्टी ने इस घटना के बाद ट्विटर अकाउंट बनाया है.

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