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कुवैत ने लगाई भारतीयों के प्रवेश पर रोक
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
कुवैत ने देश में भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी है.
कुवैत की सरकार ने फ़ैसला लिया है कि वो पिछले तक़रीबन साढ़े तीन माह से बंद पड़ी अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं को एक अगस्त से फिर से शरू करेगी.
गुरुवार सुबह कुवैत सरकार ने घोषणा की कि पहली अगस्त से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, ईरान और फिलीपींस से आने वालों को छोड़कर अन्य देशों में रहने वाले कुवैती नागरिक और प्रवासी आवाजाही कर सकते हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय को भारतीय नागरिकों पर लगाई गई इस पाबंदी की जानकारी है और वो इस मामले को प्रशासनिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश कर रहा है.
परिवारों की चिंता
कुवैत सरकार के इस फ़ैसले से वहां काम करने वाले भारतीय और उनके परिवार फ़िक्रमंद हैं.
भारतीय निर्माण कंपनी लार्सन एंड टुब्रो में काम करने वाले वार्ष्णेय प्रताप नारायन फ़रवरी में छुट्टियों में कुवैत से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में अपने घर आए थे और तब से यहीं फँसे हुए हैं, और अब ये नया मसला खड़ा हो गया है.
वार्ष्णेय कहते हैं, "चार अगस्त को दिल्ली से मेरी फ़्लाइट बुक है, जिसके पहले मुझे गोरखपुर से लखनऊ जाकर कोविड-19 (पीसीआर) टेस्ट भी करवाना है और अब ये कंफ्यूज़न पैदा हो गया है."
पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर वार्ष्णेय प्रताप नारायन कहते हैं कि पिछले चार माह से वो 'विदाउट-पे' हैं और ज़ाहिर है कि वो चाहते हैं कि मसला जल्द से जल्द हल हो.
इंडिया कम्यूनिटी सपोर्ट ग्रुप के अध्यक्ष राजपाल त्यागी ने कुवैत से फ़ोन पर कहा कि इस फ़ैसले से उन हज़ारों लोगों की नौकरियां चली जाएंगी जो भारत जाकर वहां महामारी की वजह से फँस गए हैं, ऐसे सैकड़ों परिवार हैं जिनके कुछ लोग कुवैत में रह गए हैं और कुछ भारत जाकर फँस गए हैं, और अब वो सब वापस आना चाहते हैं.
राजपाल त्यागी कहते हैं कि छुट्टियों पर गए लोग वापस नहीं पहुँचे तो उनकी नौकरियां जा सकती हैं, बहुत सारे लोगों का वीज़ा ख़ात्मे पर है अगर वो न आ पाए तो वो कैंसिल हो जाएगा, बिज़नेसमैन का यहां काम करने का लाइसेंस वीज़ा से जुड़ा है जिसकी वजह से एक के कैंसिल हो जाने से दूसरा भी समाप्त हो जाएगा, परिवार का मामला तो है जिसका मानसिक दबाव यूं समझा जा सकता है कि कई मामलों में पति भारत में फँसे हैं तो पत्नी यहां.
इंडिया कम्यूनिटी सपोर्ट ग्रुप ने इस सिलसिले में सोमवार को कुवैत दूतावास के अधिकारियों से मुलाक़ात की थी.
मंगलवार को उन लोगों ने इस सिलसिले में प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को चिट्ठी भी लिखी है और सरकार से भारत से कुवैत के लिए विमान सेवा बहाल करने की अपील की है.
कुवैत में मौजूद सूत्रों और भारत सरकार के बयानों से ये समझा जाता है कि भारतीय नागरिकों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध की एक बड़ी वजह दोनों देशों, भारत और कुवैत के बीच विमानों की उड़ान को लेकर उपजा कलह भी हो सकता है.
कुवैत ने कोरोना महामारी को देखते हुए मध्य-मार्च में अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं पर रोक लगा दी थी मगर हाल के दो माह में वहां फँसे कामगारों को उनके मुल्कों में वापस पहुंचाने या ले जाने के लिए कुछ उड़ानों को इजाज़त दी गई थी. इनमें भारत सरकार की ओर से शुरू की गईं वंदे भारत मिशन की उड़ानें भी शामिल थीं.
अब कुवैत की विमानन कंपनियां भी भारत के साथ उड़ान सेवाएं बहाल करना चाह रही हैं लेकिन वो कुछ वजहों से मुमकिन नहीं हो पा रहा.
हालांकि इस सिलसिले में भारतीय नागिरक उड्डयन मंत्रालय के सचिव और कुवैत डायरेक्टेरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन के बीच परस्पर उड़ानों के समझौतों पर बातचीत जारी है और मंत्रालय का कहना है कि इसे जल्द सुलझा लिया जाएगा.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा है कि ये टेम्पोरेरी बैन है जो सिर्फ़ भारत पर नहीं लगाया गया है और नागरिक उड्डयन मंत्रालय मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है.
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