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ऐपल, अमेज़न, फेसबुक और गूगल कठघरे में, जानें क्या है पूरा मामला
तकनीक की दुनिया में प्रतिस्पर्धियों को आगे बढ़ने से रोकने के मामले में इन दिनों अमरीकी कांग्रेस में सुनवाई चल रही है और फेसबुक, ऐपल और गूगल जैसी कंपनियों के प्रमुखों को अपनी फर्मों के बचाव में सफ़ाई देनी पड़ रही है. इन कंपनियों पर अपनी ताक़त के बेजा इस्तेमाल से प्रतिस्पर्धियों को दबाने का आरोप है.
हालांकि अमेज़न के जेफ बेज़ोस का कहना है कि दुनिया को 'बड़ी कंपनियों की ज़रूरत' है जबकि फ़ेसबुक, ऐपल और गूगल की दलील है कि उनकी कंपनियों ने इनोवेशंस (नई खोजों) के लिए माहौल तैयार किया है.
अमरीकी कांग्रेस में कड़े नियमों और कारोबारी प्रतिस्पर्धा में बाधा पहुंचाने के आरोपों पर सुनवाई चल रही है और टेक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की पेशी इसी सिलसिले में हुई.
कुछ आलोचक चाहते हैं कि इन कंपनियों को विभाजित कर दिया जाए.
कांग्रेस के डेमोक्रेट सदस्य कंपनी जगत के लोगों पर प्रतिस्पर्धा के मुद्दे को लेकर ज़ोर दे रहे थे जबकि रिपब्लिकन सदस्य इस बात को लेकर ज़्यादा फिक्रमंद थे कि ये कंपनियां सूचनाओं का प्रबंधन किस तरह से करती है और क्या वे कंजर्वेटिव विचारों को दरकिनार भी करते हैं?
सुनवाई कर रही समिति की अगुवाई कर रहे कांग्रेसमैन डेविड सिसिलाइन ने कहा कि एक साल की जांच के बाद ये बात सामने आई है कि ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स ने "अपने विस्तार के लिए नुक़सानदेह और दूसरों को बर्बाद करने वाले तरीके से अपनी ताक़त का इस्तेमाल" किया है.
डेविड सिसिलाइन ने कहा कि वो इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि ये कंपनियां एकाधिकारवादी मॉडल पर चल रही हैं और उन्होंने इसे रोकने के लिए कार्रवाई किए जाने की भी मांग की.
पांच घंटे तक चली सुनवाई के बाद आख़िर में उन्होंने कहा, "कुछ कंपनियों को विभाजित किए जाने की ज़रूरत है और सभी को पूरी तरह से नियम-कायदों के दायरे में लाए जाने की ज़रूरत है."
फ़ेसबुक के मार्क ज़करबर्ग, अमेज़न के जेफ़ बेज़ोस, गूगल के सुंदर पिचाई और ऐपल के टिम कुक ने ये बात ज़ोर देकर कही कि उन्होंने कुछ भी ग़ैरक़ानूनी नहीं किया है और उनकी कंपनियां अमरीकी मूल्यों का पालन करती हैं.
इन कंपनियों को लेकर क्या प्रमुख चिंताएं हैं?
सुनवाई के दौरान सासंदों ने गूगल पर छोटी कंपनियों का कॉन्टेंट चुराने का आरोप लगाया ताकि यूजर्स उनके वेब पेज पर ही टिके रहें.
अमेज़न पर अपना सामान बेचने वाले लोगों से कंपनी के बर्ताव को लेकर शिकायत है और फेसबुक पर इंस्टाग्राम जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों को खरीद लेने का आरोप है.
ऐपल के ऐप स्टोर पर भी लोगों के सवाल हैं.
डेविड सिसिलाइन ने कहा कि अमेज़न एक तरफ़ तो दूसरे विक्रेताओं को अपनी साइट पर सामान बेचने की अनुमति देता है तो दूसरी तरफ़ खुद भी वही सामान ग्राहकों को बेचता है. यूरोपीय नियामक भी अमेज़न के इस कारोबारी तौर-तरीके की जांच कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "अमेज़न की दोहरी भूमिका बुनियादी तौर पर प्रतिस्पर्धा विरोधी है और कांग्रेस को इस पर ज़रूर कार्रवाई करनी चाहिए."
हालांकि रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों ने ये संकेत दिए कि वे कंपनियों को विभाजित करने के विचार के समर्थन में नहीं है.
एक कमेटी मेंबर ने तो यहां तक कहा कि 'बड़ा होना बुरी बात नहीं' है.
दुनिया की चार बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भले ही न्यायिक समिति के सामने गवाही दे रहे थे लेकिन बुधवार दोपहर को ऐसा लग रहा था कि वे एक राजनीतिक तूफान के बीच खड़े हैं.
इस सुनवाई का आधिकारिक उद्देश्य भले ही ये बताया गया था कि मौजूदा प्रतिस्पर्धा क़ानून इन कंपनियों को नियम-कायदों से बांध कर रखने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं .
सुनवाई के दौरान ज़्यादातर सदस्य प्रतिस्पर्धियों पर कारोबारी ताक़त का इस्तेमाल और ये कंपनियां अपने प्लेटफ़ॉर्म पर अभिव्यक्ति की आज़ादी को किस तरह से मैनेज करती हैं, को लेकर सवाल उठा रहे थे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?
अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप लंबे समय से अमेज़न के आलोचक रहे हैं. उन्होंने हाल ही में इस बारे में ट्विटर पर लिखा भी है, "अगर कांग्रेस बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता नहीं लाती है और जो उन्हें साल भर पहले ही करना चाहिए था, मैं ये कार्यकारी आदेश के जरिए खुद ही कर दूंगा."
उन्होंने संवाददाताओं से ये भी कहा कि व्हॉइट हाउस के अधिकारी इस सुनवाई पर क़रीबी नज़र रखे हुए हैं. ट्रंप ने कहा, "बड़ी टेक कंपनियां जो कर रही हैं, वो बहुत बुरा है."
टेक एक्सपर्ट डैन आइव्स का कहना है कि वाशिंगटन में तूफान के बादल मंडरा रहे हैं लेकिन इस बात की संभावना कम ही है कि कांग्रेस कोई नया क़ानून लेकर सामने आएगा जो बड़ी टेक कंपनियों को बदलने पर मजबूर करेगा.
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