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तेल के लिए क्यों लड़ रहे हैं मिस्र, यूनान और तुर्की?
कुछ दिन पहले मिस्र की संसद ने लीबिया में सेना तैनात करने के एक प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी जिसके बाद इस छोटे से मध्यपूर्व के देश को लेकर मिस्र और तुर्की के बीच सशस्त्र संघर्ष की संभावना बनने लगी.
तुर्की, संयुक्त राष्ट्र की मदद से बनी लीबिया की त्रिपोली में मौजूद सरकार (गवर्नमेन्ट ऑफ़ नेशनल अकॉर्ड, जीएनए) का समर्थन करता है जिसका मिस्र लगातार विरोध करता रहा है.
मिस्र के विदेश मंत्री सामेह शुक्रे ने लीबिया की स्थिति को लेकर यूरोपीय संघ के विदेशी मामलों से प्रतिनिधि और संघ के कुछ और सदस्यों से फ़ोन पर चर्चा की है. उनका कहना है कि "ग़ैर-ज़िम्मेदार तरीके से लड़ाकों और आतकंवादियों को लीबिया भेजा जा रहा है जिससे वहां स्थिति गंभीर होती जा रही है."
लीबिया को लेकर मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फतेह अल सिसि और यूनान के प्रधानमंत्री किर्याकोस मित्सोताकिस ने भी आपस में चर्चा की है और दोनों नेता इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि लीबिया में किसी तरह के बाहरी हस्तक्षेप का विरोध किया जाना चाहिए.
गुरुवार को मिस्र के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि फ़ोन पर हुई इस चर्चा के दौरान सिसि और मित्सोताकिस ने लीबियाई संकट के मद्देनज़र मिस्र की स्थिति पर चर्चा की और दोनों पक्षों ने कहा कि वो लीबियाई मामलों में "अवैध विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करते हैं."
मिस्र का कहना है कि इसके साथ जुड़े सशस्त्र विद्रोहियों के कारण मिस्र और अरब के पूरे इलाक़े के लिए ख़तरा पैदा हो गया है.
लेकिन तुर्की का कहना है कि वो लीबिया में स्थायी सरकार की उम्मीद करता है.
तुर्की की ड्रिलिंग की योजना से नाराज़ मिस्र?
लेकिन तुर्की और मिस्र के बीच तनाव केवल लीबिया के कारण नहीं. भूमध्यसागर में तेल के लिए तुर्की की ड्रिलिंग की योजना को लेकर भी दोनों के बीच तनाव है.
तुर्की ने मंगलवार में अपने दक्षिण में मौजूद एक द्वीप के पास ड्रिलिंग सर्वे करने के लिए जहाज़ भेजने का ऐलान किया था. ये द्वीप मिस्र के नज़दीक है.
तुर्की ने कहा है कि ये जहाज़ समंदर में उसके इलाक़े में ड्रिलिंग का काम करेंगे लेकिन तुर्की की इस घोषणा के बाद मिस्र ने मंगलवार को चेतावनी जारी की और कहा कि इस इलाक़े में उसके जहाज़ भी लगातार निगरानी करेंगे.
यहीं से विवाद शुरू हुआ है जिसने अब गंभीर रूप अख्तियार कर लिया है.
तुर्की की चेतावनी के विरोध में यूरोपीय संघ भी सामने आया है जिसने कहा कि "उसकी घोषणा से ग़लत संदेश गया है."
बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार तुर्की का जहाज़ ओरुक रीज़ बंदरगाह अंताल्या पर खड़ा है. लेकिन नैवटेक्स (चेतावनी देने की एक तकनीक) पर दिए गए तुर्की के अलर्ट से मिस्र की सेना में हलचल शुरू हो गई. मिस्र ने तुर्की के इस कदम को ग़ैर-क़ानूनी करार दिया.
कैसे बिगड़ते गए आपसी संबंध?
तुर्की अपना ये ड्रिलिंग सर्वे भूमध्यसागर में साइप्रस और क्रेट के इलाक़ों के बीच करना चाहता है.
मिस्र से मिल रही अपुष्ट ख़बरों के अनुसार तुर्की और यूनान के नेवी के जहाज़ यूनानी द्वीप कास्टेलोरिज़्ज़ो की तरफ जाते देखे गए हैं. ये द्वीप तुर्की के नज़दीक है.
यूनान और तुर्की के बीच हाल के दौर तक रिश्ते बेहतर नहीं थे. भूमध्यसागर पार कर यूनान आ रहे प्रवासियों को लेकर दोनों देश पहले भी कई बार आपस में भिड़ चुके हैं.
इस महीने की शुरुआत में तुर्की ने कहा था कि वो इस्तांबुल में मौजूद ऐतिहासिक हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलेगा. ये मस्जिद सालों पहले ऑर्थोडॉक्स परंपरा को मानने वाले ईसाइयों का अहम केंद्र था. तुर्की के इस फ़ैसले को यूनान ने ग़ैर-ज़रूरी बताया था.
अब भूमध्यसागर में तुर्की की ड्रिलिंग की योजना योजना के बारे में उसका कहना है कि इसके ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ को भी कदम उठाने की ज़रूरत है.
तुर्की और यूनान दोनों देश नैटो देशों के समूह के सदस्य हैं लेकिन भूमध्यसागर से कच्चा तेल लेने की होड़ में दोनों एक दूसरे के ख़िलाफ़ खड़े हैं.
हाल के सालों में साइप्रस के नज़दीक समंदर में कच्चे तेल के बड़े भंडारों का पता चला है, जिसके बाद इसके इस्तेमाल को लेकर साइप्रस, इसराइल, यूनान और मिस्र के बीच अहम सहमति बनी है.
इस समझौते के तहत यहां से मिलने वाले कच्चे तेल को भूमध्यसागर से गुज़रने वाली 2,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के ज़रिए यूरोप भेजा जाएगा.
लेकिन बीते साल तुर्की ने साइप्रस से पश्चिम में ड्रिलिंग का काम बढ़ा दिया. इस द्वीप के इलाक़े पर साल 1974 से ही विवाद है. तुर्की के नियंत्रण वाले पूर्वी साइप्रेस को केवल तुर्की ही मान्यता देता है. तुर्की ने इस सप्ताह इस विवाद को एक तरह से स्वीकार करते हुए कहा कि इस द्वीप के संसाधनों का साझा इस्तेमाल किया जाना चाहिए.
नवंबर 2019 में तुर्की ने लीबिया के साथ एक करार किया था जिसके बारे में तुर्की का कहना था कि उसके दक्षिणी तट से लेकर लीबिया के उत्तर पूर्वी तट तक एक एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन बनाया गया था.
मिस्र ने इसका विरोध किया था और कहा था कि इस पूरी प्रक्रिया में इस जगह के बीच में पड़ने वाले यूनान के क्रेट द्वीप को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया गया था.
मई के आख़िर तक तुर्की ने ऐलान कर दिया कि वो आने वाले महीनों में दूर पश्चिम तक ड्रिल करने की योजना बना रहा है. उसके इस ऐलान से यूरोपीय संघ के सदस्य, यूनान और साइप्रस ने नाराज़गी जताई.
यूनान के रोड्स और क्रीट द्वीपों समेत भूमध्यसागर के पूर्वी इलाक़े में ड्रिलिंग का काम करने के लिए तुर्की पेट्रोलियम को कई लाइसेंस भी जारी किए गए हैं.
तुर्की के उप राष्ट्रपति का कहना है कि "सभी को तुर्की और उत्तरी साइप्रस के तुर्की गणराज्य को स्वीकार करना चाहिए और उसे इस इलाक़े के संसाधनों के इस्तेमाल की आज़ादी होनी चाहिए."
इस मुद्दे को लेकर क्या है क़ानूनी पेंच?
ईजियन में कई यूनानी द्वीप और पूर्वी भूमध्यसागर का इलाक़ा तुर्की तट से क़रीब है और इसलिए यहां क्षेत्रीय जल के मुद्दे जटिल हैं. इन मुद्दों को लेकर दोनों देश अतीत में युद्ध की कगार तक भी पहुंच गए हैं.
अगर यूनान अपने समुद्रतट से लगी समुद्री सीमा को छह मील से बढ़ाकर अधिकतम 12 तक कर देता है (जो कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य है) तो तुर्की का कहना है कि उसके समुद्री मार्ग बुरी तरह प्रभावित होंगे.
समुद्री सीमा के अलावा तुर्की और लीबिया के बीच, साइप्रस और लेबनान के बीच और मिस्र और इसराइल के बीच एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन हैं जिनकी सीमाओं का भी करीब 200 नॉटिकल मील तक विस्तार किया जा सकता है.
तो ऐसे में यूनानी द्वीप कास्टेलोरिज़्ज़ो का क्या होगा, जो तुर्की से केवल दो किलोमीटर की दूरी पर है?
यूनान का कहना है तुर्की की चेतावनी कास्टेलोरिज़्ज़ो के एक बड़े कॉन्टिनेल्टल शेल्फ़ तक पहुंचती है. हालांकि तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुत चोवाशुग्लू का कहना है कि जो द्वीप तुर्की के बेहद करीब हैं उनका अपना कॉन्टिनेल्टल शेल्फ़ नहीं हो सकता.
तुर्की की दलील है कि वो संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुसार ही काम कर रहा है.
इस पूरे मामले को लेकर क्या है यूरोप की प्रतिक्रिया?
यूनान के यूरोपीय मित्र देश उसकी दलील का समर्थन करते हैं.
जर्मनी के विदेश मंत्री हेइको मास ने हाल में यूनान का दौरा किया था. उन्होंने कहा था कि तुर्की से "पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उकसावे" को रोकने की अपील की थी.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी गुरुवार को इस इलाके के दौरे पर थे. उन्होंने साइप्रस और यूनान को अपना पूरा समर्थन दिया और कहा कि तुर्की ने "उनकी संप्रभुता का उल्लंघन" किया है और जो कोई "यूरोपीय संघ के सदस्य के समुद्री मार्गों को लेकर आक्रामक होगा उन पर प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए."
फ्रांस और तुर्की के बीच हाल में संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, ख़ास कर लीबिया को लेकर दोनों में तनाव बढ़ा है.
बुधवार को, यूरोपीय संघ के एक प्रवक्ता ने कहा कि तुर्की का ये कदम "दूसरे देशों के ग़लत संदेश दे रहा है."
यूरोपीय संघ ने बार-बार एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन की सीमित शक्तियों का हवाला देते हुए कहा है कि कॉन्टनेन्टल शेल्फ़ के मुद्दे को देशों को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए.
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