अमरीका के दबाव में चीन को ब्रिटेन ने दिया कड़ा झटका, 2027 तक ख्वावे के सभी 5जी किट हटाने का फ़ैसला

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इमेज कैप्शन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन
    • Author, गॉर्डन कॉरेरा
    • पदनाम, सुरक्षा संवाददाता

ब्रिटेन की सरकार ने छह महीने पहले इस बात पर सहमति ज़ाहिर की थी कि चीनी कंपनी ख्वावे की ब्रिटेन के 5जी नेटवर्क में सीमित भूमिका रहेगी. मगर अब सरकार ने अपना मन बदल लिया है.

ब्रिटिश सरकार के नए फ़ैसले के मुताबिक देश के मोबाइल प्रोवाइडरों पर 31 दिसंबर के बाद से चीनी कंपनी ख्वावे से कोई उपकरण ख़रीदने पर पाबंदी लगा दी है. इसके साथ ही 2027 तक ब्रिटिश मोबाइल प्रोवाइडर अपने नेटवर्क से ख्वावे के सभी 5जी किट हटाना होगा.

सरकार के इस फ़ैसले की जानकारी हाउस ऑफ़ कॉमन्स को तकनीकी मामलों के मंत्री ओलिवर डाउडेन ने दिया है. उन्होंने यह भी बताया कि इस फ़ैसले को लागू करने से देश भर में 5जी की व्यवस्था मुहैया कराने में एक साल की देरी होगी. इतना ही नहीं इस फ़ैसले से देश पर दो अरब पाउंड का अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा.

माना जा रहा है कि अमरीका के दबाव में आकर ब्रिटेन की सरकार ने यह निर्णय लिया है.

जनवरी 2020 में, एक लंबी देरी और कठिन लड़ाई के बाद, यूके सरकार ने घोषणा की थी कि चीनी कंपनी ख्वावे को 5जी नेटवर्क के संवेदनशील कोर से बाहर रखा जाएगा और अन्य भागों में 35% बाज़ार तक ही ख्वावे की हिस्सेदारी सीमित रहेगी.

मगर ब्रिटेन सरकार अब उस निर्णय पर दोबारा विचार कर उसे बदल दिया है.

सरकार में एक बड़े अधिकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन का इस चीनी कंपनी पर 'अविश्वसनीय दबाव' बनाने के लिए ज़ोर देना यूके सरकार की सोच में आए बदलाव का एक बड़ा कारण है.

अमरीकी अधिकारी यह दावा करते रहे हैं कि चीन ख्वावे की मदद से जासूसी, चोरी और यूके पर हमला तक कर सकता है. हालांकि, चीनी कंपनी ख्वावे इन दावों को बेबुनियाद बताती रही है.

ख्वावे के संस्थापक यहां तक कह चुके हैं कि 'अपने ग्राहकों को नुक़सान पहुँचाने से बेहतर होगा कि वे अपनी कंपनी को ही बंद कर दें.'

मई में लगे नए प्रतिबंधों के बाद ख्वावे की अमरीकी चिप टेक्नोलॉजी पर सीमित पहुँच रह गई है जिसकी वजह से यूके के सामने भी तकनीक से संबंधित कुछ ज़रूरी सवाल उठ खड़े हुए हैं.

लेकिन यूके में ख्वावे के भविष्य से जुड़ा यह निर्णय तकनीकी कारणों से जितना महत्वपूर्ण होगा, उतना ही भू-राजनीतिक और घरेलू राजनीति की वजह से भी होगा.

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टेलीकॉम कंपनियों की चेतावनी

पिछले छह महीनों में चीन के प्रति कुछ अन्य देशों के रवैये में भी कठोरता आई है.

कोरोना वायरस संकट और चीन सरकार द्वारा इसे संभालने के तरीक़े से चीन पर निर्भरता के बारे में चिंताएं बढ़ गई हैं. फिर हॉन्ग-कॉन्ग पर चीन की मनमानी ने भी यह चिंता बढ़ा दी है कि क्या चीन ज़्यादा ही दबंग या अधिनायकवादी हो रहा है.

यूके में ऐसी आवाज़ें पिछले कुछ महीनों में बढ़ी हैं जो चीन के ख़िलाफ़ कठिन नीतियाँ लागू करने की इच्छुक हैं.

लेकिन ख्वावे पर चर्चा शुरू होने के बाद टेलीकॉम कंपनियों ने यह चेतावनी दी है कि 'अगर ख्वावे के उपकरणों को तेज़ी से हटाने के लिए मजबूर किया जाता है तो मोबाइल कवरेज ब्लैकआउट यानी मोबाइल कवरेज में अस्थायी बाधा हो सकती है.'

इसे देखते हुए सरकार अब इस पहलू पर भी चर्चा कर रही है कि ख्वावे को हटाए जाने की गति कितनी हो और इस काम को कितने समय में पूरा किया जाए.

क्या हो सकता है असर?

ख्वावे किट को पूरी तरह से हटाने में अगर सात से दस साल का समय लगता है तो इससे आलोचक बहुत नाख़ुश होंगे, पर व्यवधान बहुत कम पैदा होगा. और अगर यह काम तीन से पाँच साल में किया जाता है, तो उसमें ख़र्च बहुत ज़्यादा आएगा.

इसके अलावा, अगर टेलीकॉम कंपनियाँ को इस वजह से 5जी शुरू करने में देर होती है तो सरकार के लिए भी यूके में कनेक्टिविटी से जुड़े अपने वायदों को पूरा करने में परेशानी होगी. यूके सरकार ने लोगों से वादा किया है कि आने वाले वर्षों में वो कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार करेगी.

ज़ाहिर है कि अगर यूके ऐसा कुछ करता है तो चीन भी यूके को दण्ड देने के लिए कुछ करेगा ताकि अन्य देश भी उसके क़दमों पर ना चलें.

इसलिए जो भी परिस्थिति बनेगी, उसके लिए अगले कुछ महीनों में होने वाली एक गंभीर चर्चा की यह शुरुआत है.

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