हागिया सोफ़िया के मस्जिद बनने के बाद अर्दोआन दुनिया को क्या दिखाना चाह रहे हैं?

तुर्की के एक प्रसिद्ध संग्रहालय हागिया सोफ़िया को अदालत के फ़ैसले के बाद मस्जिद में बदल दिया गया है. रविवार को इस मस्जिद बने म्यूज़ियम से अज़ान सुनाई दी.

लेकिन इस बदलाव की शुरुआत अब से लगभग एक साल पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के उस चुनावी भाषण के दौरान हुई थी जब उन्होंने इस संग्रहालय को मस्जिद का दर्जा देने का चुनावी वादा किया था.

इसके बाद से लेकर अब तक अर्दोआन के इस फ़ैसले की दुनिया भर में आलोचना हो चुकी है.

लेकिन सभी आलोचनाओं को धता बताते हुए तुर्की ने इस ऐतिहासिक इमारत को एक बार फिर मस्जिद का दर्जा दे दिया है.

लेकिन अब लोग इस मुद्दे पर अपनी राय खुलकर रख रहे हैं.

क्यों हो रहा है विरोध?

इतिहास के पन्ने पलटकर देखें तो हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम असल में एक चर्च हुआ करता था जिसे छठी सदी में बाइज़ेंटाइन सम्राट जस्टिनियन ने बनवाया था.

लेकिन ओस्मानिया साम्राज्य के उदय के साथ ही इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया.

इसके बाद उस्मानिया सल्तनत के ख़ात्मे के बाद मुस्तफ़ा कमाल पाशा का शासन आया जिन्होंने 1934 में इस मस्जिद (मूल रूप से हागिया सोफ़िया चर्च) को म्यूज़ियम बनाने का फ़ैसला किया.

पाशा के इस फ़ैसले को आधुनिक तुर्की के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक माना जाता है.

तुर्की का उदारवादी तबका इसे तुर्की की धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक के रूप में देखता है क्योंकि चर्च से मस्जिद बनने और उसके बाद संग्रहालय बनने से इसके दरवाज़े सभी लोगों के लिए खुल गए और इस आलीशान इमारत से धार्मिक पहचान हट गई.

ग्रीक शैली में बना ये चर्च स्थापत्य कला का अनूठा नमूना माना जाता है और वर्तमान में यूनेस्को की विश्व धरोहरों की सूची में शामिल है.

अपने बयान को लेकर निशाने पर र्दोआन

हागिया सोफ़िया को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के ट्विटर अकाउंट से जारी एक संदेश विवाद का विषय बन गया है.

मध्य पूर्व की पत्रकार जेनान मूसा ट्विटर पर लिखती हैं कि अर्दोआन के अंग्रेज़ी और अरबी भाषा के संदेश में काफ़ी अहम अंतर है.

इसे बयां करते हुए मूसा लिखती हैं, "अंतर देखिए, अंग्रेज़ी में अर्दोआन का बयान कहता है कि हागिया सोफ़िया के दरवाज़े हमारी सभी मस्जिदों की तरह सभी के लिए खुले रहेंगे चाहें वे देशी हों या विदेशी, मुस्लिम हों या ग़ैर-मुस्लिम. अर्दोआन का अरबी भाषा में बयान हागिया सोफ़िया का रिवाइवल अल-अक्सा मस्जिद की आज़ादी की ओर एक संकेत है."

वो आगे लिखती हैं, "अर्दोआन का अंग्रेज़ी भाषा में बयान हागिया सोफ़िया के दरवाज़े धर्मावलंबियों के लिए खोलने हमारे देश के संप्रभुता के अधिकार का इस्तेमाल मात्र है. वहीं, अर्दोआन का अरबी भाषा में बयान हागिया सोफ़िया का पुनर्जन्म बुख़ारा से लेकर अंदुलुसिया जैसे शहरों के प्रति हमारा सलाम है जो कि हमारी सभ्यता के प्रतीक हैं."

मूसा के इस ट्वीट को अब तक ढाई हज़ार से ज़्यादा बार रिट्वीट किया जा चुका है.

सुल्तान जैसी भाषा

वहीं, एक शिक्षक जुहैना अल अली ट्विटर पर लिखती हैं, "दो विरोधाभासी संदेश हैं - अर्दोआन अंग्रेज़ी में 'सभी के लिए खुले' और 'मानवता की साझी विरासत' जैसे वाक्यों का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, अरबी में ये एक रोमेंटिसाइज़्ड सुल्तान जैसा भाषण लगता है जो कि एक तय फै़न बेस के लिए है जिससे अतिवादी विचारधारा और गतिविधियां शुरू हो सकें."

जुहैना आगे लिखती हैं, "अरबी में वह कहते हैं कि हागिया सोफ़िया का पुनरुद्धार अल-अक्सा मस्जिद की आज़ादी का संकेत है. हागिया सोफ़िया का पुनरुद्धार सभी मुस्लिम के लिए एक नई शुरूआत है जिससे वे सभी अंधकार भरे दौर से बाहर आ सकें. इसके बाद वह कहते हैं कि ये बुख़ारा से लेकर अंदुलुसिया तक सभी शहरों के लिए संकेत है जो कि हमारी सभ्यता के प्रतीक रहे हैं और अब वह 'महमद द्वितीय के वादे को पूरा कर रहे हैं."

जुहैना के मुताबिक, "ये किसी राष्ट्रपति का भाषण नहीं है. बल्कि ये उस नेता का भाषण है जो कि खुद को उस्मानिया सुल्तान, मुसलमानों के ख़लीफ़ा के रूप में देखता है. किसी भी अरबी भाषा बोलने वाले के लिए ये भाषण काफ़ी जाना-पहचाना और परेशान करने वाला है. क्योंकि आतंकी संगठन भी किसी काल्पनिक कैलिफ़ेट को पाने की बात इसी अंदाज में करते हैं."

जाने माने इतिहासकार इरफ़ान हबीब ट्विटर पर लिखते हैं, "हागिया सोफ़िया कई बार जा चुका हूँ और इसकी शानदार स्थापत्य कला और इतिहास का आनंद ले चुका हैं. कभी नहीं लगा कि इस जगह को एक सक्रिय मस्जिद में तब्दील हो जाना चाहिए. पूरी दुनिया में इतिहास से छेड़छाड़ करना दक्षिणपंथ के लिए नशे जैसा है. धर्म के ग़लत प्रयोग से ही वे अपना अस्तित्व बचाए रख पाते हैं."

पाकिस्तानी पत्रकार मेहर तरार लिखती हैं, "हागिया सोफ़िया अब एक म्यूज़ियम है और वही रहना चाहिए."

लेखक मुस्तफ़ा अक्योल ट्विटर पर लिखते हैं, "ये एक व्यक्तिगत बयान है - मुझे अपने उस्मानिया सल्तनत पर गर्व है. मुझे हमेशा से गर्व था. लेकिन मेरे लिए इसका मतलब संघर्ष नहीं है. मेरे गर्व का आशय बहुवाद, सहिष्णुता, राष्ट्रवादी धर्मांधता की कमी है. मैं सुल्तान महमद द्वितीय का सम्मान करता हूं."

ब्रितानी संगीतकार दामियान विल्सन ने ये कहते हुए विरोध जताया है कि "तुर्की का ये क़दम राष्ट्रपति अर्दोआन को कुछ इस्लामी दोस्तों का समर्थन दिलाएगा लेकिन इस्तांबुल के पूर्व ऑर्थोडोक्स क्रिश्चियन केथेड्रल हागिया सोफ़िया को मस्जिद में तब्दील करके एक कमज़ोर धार्मिक संतुलन और एक प्रमुख सांस्कृतिक स्थान की अवहेलना की गई है."

यूनेस्को ने जताया विरोध

संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक समिति ने अपने बयान में कहा है, "यूनेस्को तुर्की सरकार से मांग करती है कि इस मामले में तत्काल बातचीत शुरू की जाए जिससे इस असाधारण विरासत के सार्वभौमिक महत्व को कम होने से रोका जा सके. वर्ल्ड हेरिटेज कमेटी इस विरासत के रखरखाव को लेकर अपने अगली सभा में विचार करेगी."

अमरीका-यूरोपीय संघ ने किया विरोध

यूरोपीय संघ के विदेश नीति विभाग के प्रमुख जोसेफ़ बोरेल ने इस फ़ैसले को खेदपूर्ण बताया है.

उन्होंने कहा है, "आधुनिक तुर्की के ऐतिहासिक फैसलों को बदलने वाला तुर्की सरकार का ये फ़ैसला और राष्ट्रपति अर्दोआन द्वारा इस स्मारक को एक धार्मिक मामलों की समिति के हवाले किया जाना काफ़ी खेदजनक है."

वहीं, अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा है, "हम तुर्की सरकार के हागिया सोफ़िया का दर्जा बदलने के फैसले से काफ़ी निराश हैं. हम समझते हैं कि तुर्की सरकार हागिया सोफ़िया में सभी लोगों को प्रवेश करने देने के प्रति समर्पित रहेगी और सरकार की ओर से उन योजनाओं की प्रतिक्षा में है जिनकी मदद से हागिया सोफिया को सभी लोगों के लिए उपलब्ध रखा जा सके."

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