कुलभूषण जाधव को सुरक्षित लाने के लिए सरकार सबकुछ करेगी: भारत

कुलभूषण जाधव

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पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कुलभूषण जाधव के अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ कथित तौर पर रिव्यू पिटीशन दाख़िल न करने पर भारत की प्रतिक्रिया आई है. भारत ने कहा है कि वो कुलभूषण जाधव की स्वदेश वापसी के लिए सभी उपयुक्त विकल्पों पर विचार करेगा.

बुधवार को पाकिस्तान के अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल अहमद इरफ़ान ने कहा था कि कुलभूषण जाधव अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेंगे और अपनी मर्सी पिटीशन की पैरवी जारी रखेंगे.

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में मौत की सज़ा सुना रखी है.

17 जुलाई, 2019 को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) ने अपने फ़ैसले में पाकिस्तान को आदेश दिया था कि वो जाधव की मौत की सज़ा पर पुनर्विचार करे और उन्हें काउंसुलर ऐक्सेस दे.

आईसीजे ने कहा था कि काउंसुलर एक्सेस न देकर पाकिस्तान ने वियना कन्वेंशन की अनदेखी की है.

बुधवार को राजधानी इस्लामाबाद में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय में प्रेस वार्ता में अतिरिक्त अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पाकिस्तान ने कमांडर जाधव को अपने पिता से मुलाक़ात करवाने की पेशकश की है. भारत सरकार को इसकी जानकारी दे दी गई है. कमांडर जाधव को दोबारा काउंसुलर एक्सेस की पेशकश पर भारत के जवाब का इंतज़ार है.

अहमद इरफ़ान ने कहा कि पाकिस्तान इससे पहले भी कुलभूषण जाधव के घरवालों से मुलाक़ात करवा चुका है और पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय अदालत के फ़ैसले पर अमल करने के लिए तैयार है.

भारत ने क्या कहा

पाकिस्तान के बयान के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है कि वो कूटनीतिक रास्तों के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के फ़ैसले को लागू कराने की दिशा में काम कर रहा है.

मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने मीडिया में दिए आज के बयान से साफ़ ज़ाहिर है कि वो आईसीजे के फ़ैसले को लागू करने का छलावा कर रहा है.

भारत ने कहा कि जाधव को एक हास्यास्पद ट्रायल के ज़रिए फांसी की सज़ा दी गई है, वो पाकिस्तानी सेना की हिरासत में हैं, उनको इस मामले में याचिका दायर न करने के लिए मजबूर किया गया है.

भारत ने आईसीजे के आदेश के हवाले से जाधव के लिए बेरोक-टोक मिलने की मांग की है ताकि उनकी बेहतरी के लिए बातचीत की जा सके.

विदेश मंत्रालय के बयान में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान ने आईसीजे के फ़ैसले के ज़रिए मिले अधिकारों को भी जाधव को न इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया है.

भारत ने कहा है कि वो लगातार पाकिस्तान से बाहर के वकील के लिए जाधव से मिलने देने की अनुमति मांग रहा है लेकिन उसे यह अनुमति नहीं दी गई, पाकिस्तान ने जाधव से संबंधित दस्तावेज़ भी भारत को नहीं सौंपे.

"आईसीजे पहले ही यह मान चुका है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन में शामिल है. सरकार जाधव को सुरक्षित रखने और भारत वापस लाने के लिए कुछ भी करेगा और अंत तक सभी उपयुक्त विकल्पों पर विचार करेगा."

कुलभूषण जाधव

पाकिस्तान ने क्या कहा था

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पाकिस्तान ने कई बार भारतीय उच्चायोग से कहा है कि वो कुलभूषण जाधव मामले में रिव्यू पिटीशन दाख़िल करे.

अहमद इरफ़ान ने कहा कि पाकिस्तान का क़ानून ख़ुद ही रिव्यू पिटीशन की इजाज़त देता है, लेकिन फिर भी पाकिस्तान ने 28 मई को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस रिव्यू एंड रीकंसीडरेशन ऑर्डिनेंस, 2020 जारी कर दिया.

इस अध्यादेश के तहत 60 दिनों के अंदर एक दरख़्वास्त के ज़रिए इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जा सकती है.

ये अपील ख़ुद कुलभूषण जाधव, पाकिस्तान में उनके क़ानूनी प्रतिनिधि या भारती उच्चायोग दायर कर सकते हैं.

अहमद इरफ़ान के अनुसार 17 जून को कुलभूषण जाधव को बुलाकर रिव्यू पिटीशन दाख़िल करने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया.

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कहा था कि जब तक पुनर्विचार याचिका पर फ़ैसला न हो जाए, कुलभूषण जाधव की फाँसी को रोक दी जाए.

वीडियो कैप्शन, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पहला हिंदू मंदिर बनाया जा रहा है.

कुलभूषण जाधव को मौत की सज़ा

पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में कुलभूषण जाधव को जासूसी और दहशतगर्दी के आरोप में दोषी क़रार देते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी.

इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ भारत ने मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) का दरवाज़ा खटखटाया था और माँग की थी कि कुलभूषण जाधव की सज़ा ख़त्म की जाए और उनकी रिहाई के आदेश दिए जाएं.

आईसीजे ने भारत की इस माँग को ठुकरा दिया था लेकिन पाकिस्तान को आदेश दिया था कि वो जाधव को काउंसुलर ऐक्सेस दे और उनकी सज़ा पर पुनर्विचार करे.

कुलभूषण जाधव के बारे में पाकिस्तान का दावा है कि वो भारतीय नौसेना के मौजूदा अधिकारी हैं जिन्हें 2016 में पाकिस्तान के बलूचिस्तान से गिरफ़्तार किया गया था.

पाकिस्तान एक लंबे अर्से से भारत पर आरोप लगाता रहा है कि वो बूलचिस्तान में सक्रिय पाकिस्तान विरोधी चरमपंथी गुटों की मदद करता है.

भारत इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कुलभूषण जाधव के बारे में भारत का कहना है कि वो एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और वो अपने बिज़नेस के सिलसिले में ईरान गए थे और पाकिस्तान-ईरान सीमा पर उनको अग़वा किया गया था.

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