पाकिस्तान: इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण को लेकर कोर्ट ने सुरक्षित रखा फ़ैसला

- Author, शहज़ाद मलिक
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पाकिस्तान की राजधानी में मंदिर के निर्माण रोकने से संबंधित दायर अर्ज़ियों पर सुनवाई होने या ना होने के बारे में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.
इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस आमिर फ़ारुक़ ने सोमवार को इन अर्ज़ियों की सुनवाई की.
इस्लामाबाद के डेवेलपमेंट अथॉरिटी यानी सीडीए के शहरी मामलों के निदेशक ने अदालत को बताया कि इस मंदिर का बिल्डिंग प्लान ना होने की वजह से इसका काम रुकवा दिया गया है.
अदालत ने सीडीए अधिकारी से पूछा कि प्लॉट किस जगह स्थित है और किस मक़सद के लिए इस्तेमाल होगा.
सीडीए अधिकारी ने जवाब दिया कि प्लॉट मंदिर कंपलेक्स के लिए इस्लामाबाद के सेक्टर H92 में है.
हिंदू समुदाय के विकास के लिए काम करने वाली संस्था की तरफ़ से साल में 2016 में प्लॉट देने के लिये दी गई अर्ज़ी पर कार्रवाई शुरू हुई है.
अधिकारी ने बताया कि इस अर्ज़ी पर क़ानूनी कार्रवाई के लिए इसे विभिन्न एजेंसियों को भिजवाया गया जिसमें ख़ुफ़िया एजेंसी भी शामिल थीं.
2017 में सरकार से मिली थी ज़मीन
उन्होंने कहा कि साल 2017 में 4 कनाल (ज़मीन की माप) के क़रीब यह ज़मीन मंदिर, कम्युनिटी सेंटर या श्मशान घाट के लिए हिंदू समुदाय को अलॉट हुई थी.
सीडीए डायरेक्टर (शहरी मामला) ने अदालत को बताया कि धार्मिक मामलों को देखने वाले मंत्रालय और पुलिस की स्पेशल ब्रांच के अलावा इस्लामाबाद के ज़िला प्रशासन की सिफ़ारिश को ध्यान में रखते हुए हिंदू समुदाय की अर्ज़ी को मंज़ूर किया गया. और उन्हें इस्लामाबाद के सेक्टर H92 में मंदिर कंपलेक्स के निर्माण के लिए ज़मीन दी गई है.
सीडीए की तरफ़ से मंदिर के निर्माण के संदर्भ में जो नोटिफ़िकेशन जारी किया गया है उसके अनुसार इस ज़मीन की कोई क़ीमत नहीं ली गई.
यह प्लॉट 33 साल की लीज़ पर दिया गया है जिसे लगातार इतने ही समय के लिए दो बार बढ़ाया जा सकता है.
उन्होंने अदालत को बताया कि हिंदू पंचायत के नाम यह प्लॉट अलॉट हुआ है और इसके अलावा इस्लामाबाद में रहने वाले दूसरे अल्पसंख्यकों के लिए भी 90 के दशक के शुरू में क़ब्रिस्तान बनाने के लिए प्लॉट अलॉट किए गए थे.
सीडीए के अधिकारी ने अदालत को बताया कि इस क्षेत्र में मुसलमानों के लिए क़ब्रिस्तान की जगह आवंटित करने के साथ-साथ इस्लामाबाद में बसने वाले अल्पसंख्यकों के लिए भी उनके धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार के लिए जगह अलॉट की गई है.
जस्टिस आमिर फ़ारूक़ ने सीडीए के डायरेक्टर से सवाल पूछा कि क्या मंदिर की बिल्डिंग का नक़्शा मंज़ूरी के लिए आया है?
जवाब में सीडीए के अधिकारी का कहना था कि यह बात वह प्रमाणिकता से नहीं कह सकते लेकिन उनकी जानकारी के अनुसार नक़्शा अभी तक मंज़ूरी के लिए सीडीए के संबंधित विभाग में नहीं आया है.

मंदिर निर्माण के लिए सरकारी फ़ंडिंग नहीं हुई
डिप्टी अटार्नी जनरल राजा ख़ालिद महमूद ने अदालत को बताया के सरकार ने अभी तक मंदिर के निर्माण के लिए कोई फ़ंडिंग नहीं की.
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता चौधरी तनवीर के इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि मंदिर के निर्माण के लिए सरकार की तरफ़ से 10 करोड़ रुपए दिए गए हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार ने मंदिर के लिए फ़ंडिंग के मामले पर इस्लामी नज़रियाती काउंसिल से सिफ़ारिश मांगी है.
डिप्टी अटार्नी जनरल ने कहा कि इस मंदिर के निर्माण को रुकवाने के लिए अदालत में अर्ज़ी दायर करने वाले क़दम से दुनिया में अच्छा मैसेज नहीं जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान का संविधान भी ग़ैर-मुस्लिमों को अपने धार्मिक कार्यक्रम करने की इजाज़त देता है.
याचिकाकर्ता का कहना था कि मंदिर के निर्माण के लिए जगह आवंटित करना और उसके लिए फ़ंडिंग देना दो अलग-अलग बात है. उन्होंने कहा कि सरकार ना फ़ंडिंग दे सकती है और न ही मंदिर बनाने की मंज़ूरी दे सकती है.
अदालत ने दोनों फ़रीक़ों की दलीलों को सुनने के बाद इस याचिका पर सुनवाई करने या न करने के बारे में फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.
मंदिर का निर्माण विवादित होने की वजह से स्थानीय पुलिस ने इस इलाक़े में पुलिस की पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है.

इमेज स्रोत, Shiraz Hassan
मंदिर निर्माण के मैटेरियल की चोरी नहीं हुई
एसपी इंडस्ट्रियल एरिया ज़ुबैर अहमद के अनुसार हिंदुओं के कॉम्पलेक्स के निर्माण पर काम करने वाले ठेकेदार ने चोरी के डर से अपना बिल्डिंग मैटेरियल कहीं दूसरी जगह पहुंचा दिया है.
उन्होंने कहा कि जब ठेकेदार वहां से अपना सामान हटा रहे थे तो पुलिस वहां पर मौजूद थी और जाच के बाद ठेकेदार को अपना सामान ले जाने की इजाज़त दी गई.
ग़ौरतलब है कि इससे पहले सोशल मीडिया पर ऐसी ख़बरें चल रही थी जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि मंदिर के निर्माण के लिए रखा लाखों रुपए का बिल्डिंग मैटेरियल चोरी कर लिया गया है.
इस्लामाबाद में अल्पसंख्यकों को प्लाट देने की पॉलिसी क्या है?
सीडीए के अधिकारी के अनुसार सेक्टर H92 में ईसाई समुदाय के अलावा पारसियों और बहाई समुदाय से संबंध रखने वालों के लिए भी जगह आवंटित की गई है.
सीडीए के जनसंपर्क विभाग के डायरेक्टर मज़हर हुसैन के अनुसार सीडीए के इस सेक्टर का इस्तेमाल रिहाइश और कमर्शियल संस्थानों के लिए नहीं होता बल्कि इस सेक्टर में शैक्षणिक संस्थान बनाए गए हैं और इसके साथ-साथ अल्पसंख्यकों को अपने धार्मिक कार्यक्रम करने के लिए भी प्लॉट दिए गए हैं और सभी को एक ही साइज़ के प्लाट अलॉट हुए हैं.
उन्होंने कहा कि मंदिर के निर्माण के संबंध में 2011 में हिंदू समुदाय की तरफ़ से अर्ज़ी दी गई थी.
उन्होंने कहा कि पांच साल के बाद यह अर्ज़ी 2016 में मानवाधिकार मंत्रालय के ज़रिए सीडीए को भिजवाई गई थी और एक साल तक इस फ़ाइल पर काम होता रहा जिसके बाद साल 2017 में यह प्लॉट हिंदू कम्युनिटी को अलॉट किया गया.
उन्होंने कहा कि प्लॉट अलॉट करने के सन्दर्भ में नोटिफ़िकेशन जारी किया गया है उसके अनुसार इस जगह पर मंदिर के अलावा श्मशान घाट और कम्युनिटी सेंटर का भी निर्माण होना था.

मज़हर हुसैन के अनुसार इस्लामाबाद में उस समय तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता जब तक के संबंधित विभाग से उस बिल्डिंग का नक़्शा मंज़ूर ना करवाया जाए.
उन्होंने कहा कि इस बिल्डिंग का निर्माण कार्य इसलिए रोक दिया गया था क्योंकि इस इमारत का नक़्शा मंज़ूर नहीं हुआ था.
उन्होंने कहा कि अभी भी इस्लामाबाद के विभिन्न सेक्टर्स में अलग-अलग अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सेंटर काम कर रहे हैं जिनमें आग़ा ख़ानियों के सेंटर के अलावा डिप्लोमेटिक एनक्लेव में बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए पूजास्थल का निर्माण किया गया है.
इस्लामाबाद के सेक्टर I8 में बहाई समुदाय से संबंध रखने वाले लोगों के लिए कम्युनिटी सेंटर बनाया गया है.
सीडीए के जनसम्पर्क विभाग के डायरेक्टर का कहना था कि मुसलमानों और राजधानी में बसने वाले अल्पसंख्यकों को धार्मिक कार्यक्रम के लिए जो ज़मीन आवंटित की जाती है उसकी कोई क़ीमत वसूल नहीं की जाती.
उन्होंने कहा कि H9 सेक्टर में जिन अल्पसंख्यकों को ज़मीन अलॉट की गई है उनसे कोई रक़म वसूल नहीं की गई.
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