चीन पाकिस्तान के साथ जिसे हर हाल में अंजाम देना चाहता है वही बना 'गले की फांस'
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Author, मारिया एलीना नवास
पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड
इसे इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक माना गया था. चीन की 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना जिसे 'न्यू सिल्क रोड' के नाम से भी जाना जाता है.
साल 2013 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुनियादी ढांचा विकास की इस परियोजना की शुरुआत की थी. इसके तहत पूर्वी एशिया से यूरोप, अफ्ऱीका और लातिन अमरीका तक विकास और निवेश की बड़ी परियोजनाओं की एक पूरी श्रृंखला पर काम किया जाना है.
चीन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ये प्रमुख रणनीति है.
लेकिन आलोचकों की राय इससे अलग है. उन्हें लगता है कि चीन कर्ज देने की कूटनीति का इस्तेमाल दुनिया भर के देशों पर अपने असर को बढ़ाने के लिए कर रहा है.
लेकिन वो परियोजना जिसका मक़सद प्रोडक्ट, पूंजी और टेक्नॉलजी के वैश्विक प्रवाह के ज़रिए आर्थिक विकास को बढ़ावा देना था, अचानक कोरोना महामारी के कारण रुक गई है.
चीन से बड़े पैमाने पर क़र्ज़ लेने वाले बहुत से देश अब कई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. और इनमें से कई देशों ने एक-एक करके चीन को बता दिया है कि वे क़र्ज़ चुका पाने की स्थिति में नहीं हैं.
क्या राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी 'न्यू सिल्क रोड' परियोजना का अंत है? या फिर कोरोना महामारी महज एक बाधा है जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ चीन भी उबर जाएगा.
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'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना
साल 2013 में 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना की शुरुआत के बाद से चीन ने अफ्रीका, दक्षिण पूर्वी और मध्य एशिया, यूरोप और लातिन अमरीका के 138 देशों को पावर प्लांट्स, गैस पाइपलाइंस, बंदरगाह, हवाई अड्डे बनाने और रेलवे लाइन बिछाने के नाम पर सैंकड़ों करोड़ डॉलर की रक़म क़र्ज़ या मदद के तौर पर दिया है या फिर देने का वादा कर रखा है.
हालांकि चीन ने आज तक इस 'न्यू सिल्क रोड' प्रोजेक्ट पर आने वाले खर्च के बारे में कभी भी पूरी जानकारी मुहैया नहीं कराई है.
लेकिन अमरीकी कंसल्टेंसी फर्म 'आरडब्ल्यूआर एडवाइज़र' के अनुसार चीन ने 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना में भाग लेने वाले देशों को 461 अरब डॉलर का क़र्ज़ दे चुका है. इनमें ज़्यादातर अफ्ऱीकी देश हैं और उन्हें बेहद जोख़िम वाले क़र्ज़दारों में गिना जाता है.
बीबीसी की चीनी सेवा के संपादक होवार्ड झांग कहते हैं, "शुरुआत से ही इस परियोजना के ख़िलाफ़ चीन में चौतरफ़ा आलोचना होती रही है. दरअसल, चीन के सत्तारूढ़ नेतृत्व में इस परियोजना को लेकर कभी सहमति थी ही नहीं. बहुत से लोगों ने शी जिनपिंग की रणनीतिक समझदारी पर सवाल उठाए. कुछ ने तो यहां तक कि कह दिया कि ये एक ग़ैरज़रूरी खर्च है."
पश्चिमी देशों, ख़ासकर अमरीका ने भी 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना की आलोचना करते हुए कहा कि चीन 'क़र्ज़ देने की अपनी आक्रामक रणनीति कमज़ोर देशों पर' आजमा रहा है.
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चीन का धर्मसंकट
लेकिन सिक्के के हमेशा ही दो पहलू होते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ लंदन के एसओएएस (स्कूल ऑफ़ ऑरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़) चाइना इंस्टीट्यूट की रिसर्चर लॉरेन जॉन्स्टन मानती हैं कि 'न्यू सिल्क रोड' के ज़्यादातर सौदे दोनों ही पक्षों के लिए फ़ायदेमंद रहे हैं.
"वो सरकारें जिन्हें अपने नौजवानों के विकास के लिए या तो नई परियोजनाओं की ज़रूरत थी या फिर इसके लिए पैसा चाहिए था, भले ही ये चीन से क़र्ज़ लेने की क़ीमत पर क्यों न हो, इससे जुड़े. इससे होने वाले फ़ायदों का पलड़ा इसके जोखिम के सामने झुक गया. क्योंकि एक ग़रीब देश और किस तरह से ख़ुद को ग़रीबी से निजात पा सकता था?"
अब ऐसी रिपोर्टें मिल रही हैं कि कोविड-19 की महामारी के कारण पाकिस्तान, किर्गिस्तान, श्रीलंका समेत कई अफ्ऱीकी देशों ने चीन ने इस साल क़र्ज़ चुका पाने में असमर्थता जताई है.
उन्होंने चीन से क़र्ज़ की शर्तों में बदलाव, किश्त अदायगी के लिए मोहलत या फिर क़र्ज़ माफी मांगी है.
इन हालात की वजह से चीन धर्म संकट की स्थिति में पड़ गया है. अगर वो क़र्ज़ की शर्तों में बदलाव करता है या क़र्ज़ माफ़ी दे देता है तो इससे उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और मुमकिन है कि महामारी की आर्थिक चोट का सामना कर रही चीनी जनता की तरफ़ से भी नकारात्मक प्रतिक्रिया आए.
दूसरी तरफ़, अगर चीन अपने क़र्ज़दारों पर भुगतान के लिए दबाव डालता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का सामना कर पड़ सकता है. ये आलोचनाएं उस तबके की तरफ़ से ज़्यादा आएगी जो पहले से 'न्यू सिल्क रोड' प्रोजेक्ट को 'क़र्ज़ का मकड़जाल' बता रहे थे.
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अनिश्चितता का माहौल
इसी अप्रैल में जी-20 देशों के समूह ने 73 देशों को क़र्ज़ चुकाने से साल 2020 के आख़िर तक की राहत देने का एलान किया था. चीन भी इस ग्रुप-20 देशों का हिस्सा है.
लेकिन इसके साथ ही ये सवाल उठता है कि क़र्ज़ अदायगी में दी गई इस मोहलत के ख़त्म होने के बाद क्या होगा? क्या लोन डिफॉल्ट्स ऐसी चीज़ बन गई है, जिसे अब टाला नहीं जा सकता है.
लॉरेन जॉन्स्टन कहती हैं, "ये मालूम नहीं है कि किस देश की आर्थिक स्थिति कैसी है और उनके पास कितने संसाधन उपलब्ध हैं. मैं ये नहीं कहती कि क़र्ज़ का भुगतान करना इन देशों के लिए आसान होगा लेकिन आज जिस तरह की अनिश्चितता का माहौल है, उसमें सात महीने बाद क्या होगा, कहना बेहद जोखिम का काम है."
लॉरेन जॉन्स्टन नहीं मानतीं कि चीन इन क़र्ज़ों को माफ़ कर देगा. वो कहती हैं कि दान देना, चीनी संस्कृति का हिस्सा नहीं है.
लेकिन चीन की सरकार के एक सलाहकार ने हाल ही में नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर 'फाइनैंशियल टाइम्स' अख़बार से कहा था कि उनका देश क़र्ज़ के ब्याज के भुगतान में राहत देने का विकल्प चुनने जा रहा है और कुछ देशों को दिए गए क़र्ज़ की शर्तों पर बदलाव की इजाजत दी जा सकती है.
इस सलाहकार ने 'फाइनैंशियल टाइम्स' अख़बार को बताया कि स्थायी रूप से क़र्ज़ माफ़ी आख़िरी विकल्प होगा.
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अमरीका के साथ ट्रेड वॉर
चीन के लिए ये हालात ऐसे दौर में बने हैं जब उसे वुहान से शुरू हुई कोरोना महामारी के लिए उससे जवाब मांगा जा रहा है और ये इल्ज़ाम लगाए जा रहे हैं कि उसने महामारी को ठीक से हैंडल नहीं किया. इतना ही नहीं चीन को अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर मिल रही ट्रेड वॉर की धमकियों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
और बीबीसी की चीनी सेवा के संपादक होवार्ड चांग ध्यान दिलाते हैं कि इन हालात में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बड़ा झटका लग सकता है.
होवार्ड चांग कहते हैं, "महत्वपूर्ण बात ये है कि न्यू सिल्क रोड से जुड़े देशों को दिया गया क़र्ज़ ज़्यादातर अमरीकी डॉलर में है. अमरीका के साथ ट्रेड वॉर में उलझे चीन को डॉलर की किल्लत खल सकती है. इससे चीन के पास बहुत कम विकल्प रह गए हैं और अगर विकासशील देश क़र्ज़ का भुगतान न कर पाए तो शी जिनपिंग की सत्ता अविश्वसनीय रूप से कमज़ोर पड़ जाएगी."
लेकिन 'वन बेल्ट, वन रोड' परियोजना को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी अहम आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखते हैं. इस बात की संभावना कम ही है कि वे फ़िलहाल इस परियोजना से किनारा करने जा रहे हैं.
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रणनीति में बदलाव
इस परियोजना के तहत दिए जाने वाले क़र्ज़ की शर्तों में पारदर्शिता की कमी और वास्तविक फ़ायदों को लेकर चीन को आलोचनाओं का सामना करना पड़ता रहा है.
इसी वजह से साल 2019 में शी जिनपिंग ने नई रूप-रेखा के साथ 'न्यू सिल्क रोड' प्रोजेक्ट की घोषणा की जिसमें उन्होंने अधिक पारदर्शिता का वायदा करते हुए कहा कि अब परियोजनाएं कॉन्ट्रैक्ट्स अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुसार तय किए जाएंगे.
कोरोना महामारी के कारण इनमें से कई परियोजनाएं रुक गई हैं क्योंकि कई देशों में लॉकडाउन और क्वारंटीन को लेकर दिशानिर्देश लागू हैं. दुनिया जिस तरह से आर्थिक संकट का सामना कर रही है, आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं के कोई नतीजे शायद ही सामने आएं जिससे कि चीन को अपने निवेश का वाजिब ठहराने में सहूलियत हो.
हालांकि ऐसा भी नहीं है कि 'न्यू सिल्क रोड' प्रोजेक्ट अपने अंत की तरफ़ बढ़ रहा है.
बीबीसी की चीनी सेवा के संपादक होवार्ड चांग कहते हैं कि महामारी की वजह से चीन अपनी रणनीति बदल सकता है और अधिक कामयाब परियोजनाओं पर अपना फोकस बढ़ा सकता है.
उनका कहना है कि इसके संकेत पहले से ही मिलने लगे हैं कि चीन कुछ परियोजनाओं से आहिस्ता-आहिस्ता क़दम वापस खींच रहा है और कुछ अच्छे प्रोजेक्ट्स को ज़्यादा तवज्जो दे रहा है.
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
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दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
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हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
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पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
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अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.