You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
राष्ट्रपति ट्रंप ने टाली जी-7 की बैठक, कहा- भारत को भी न्योता देंगे
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि वे ग्रुप सेवन देशों का सम्मेलन स्थगित करने जा रहे हैं.
ये मीटिंग पहले इस जून में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए होने वाली थी.
अब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे भारत, रूस, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी इस बैठक में शरीक होने का न्योता देंगे.
एयरफोर्स वन में उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "आज दुनिया में जो कुछ हो रहा है, मुझे नहीं लगता कि ग्रुप सेवन उसका वाजिब तरीके से प्रतिनिधित्व करता है. ये देशों एक पुराना पड़ गया समूह बन गया है."
उन्होंने कहा कि वे भारत, रूस, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को भी इस सम्मेलन में शामिल होने का न्योता देंगे.
"अगला सम्मेलन सितंबर में या उससे पहले हो सकता है या फिर संयुक्त राष्ट्र की महासभा के बाद. मुमकिन है कि मैं चुनाव के बाद ये बैठक बुलाऊं."
ग्रुप सेवन की बैठक
अमरीका में नवंबर में चुनाव होने हैं और राष्ट्रपति ट्रंप व्हॉइट हाउस में अपनी वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रुप सेवन की बैठक को जी-10 या जी-11 कह कर संबोधित किया.
उन्होंने कहा कि बाक़ी चार देशों के साथ मोटे तौर पर इस मुद्दे को उनके समक्ष उठाया गया है.
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जून में होने वाली इस बैठक के समय राष्ट्रपति ट्रंप कैंप डेविड में मौजूद रहने वाले थे और बाक़ी नेता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसमें शामिल होते.
पिछले हफ़्ते ट्रंप ने ये कहकर सब को चौंका दिया था कि वे ग्रुप सेवन की बैठक व्हॉइट हाउस में ही बुला सकते हैं जहां सभी नेताओं को आने के लिए न्योता जाएगा.
जर्मनी का इनकार
लेकिन जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने इस मीटिंग के लिए अमरीका जाने से इनकार कर दिया. ऐसा करने वाली वाली ग्रुप सेवन देशों की वो पहली नेता थीं.
जर्मन चांसलर के प्रवक्ता स्टीफ़न सीबर्ट ने कहा, "अभी की महामारी की स्थिति को देखते हुए वो वाशिंगटन नहीं जा सकतीं. हालाँकि, चांसलर इस निमंत्रण के लिए अमरीकी राष्ट्रपति का आभार जताती हैं."
लेकिन फ़्रांस के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉं अमरीका जाना चाहेंगे बशर्ते उनकी सेहत इसकी इजाज़त दे.
शुक्रवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा था कि वे निकट भविष्य में जी-7 की बैठक आयोजित करने पर सहमत हैं जिसमें सभी नेता जाकर शरीक हो सकें.
जी-7 क्या है?
जी-7 दुनिया की सात सबसे बड़ी कथित विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमरीका शामिल हैं. इसे ग्रुप ऑफ़ सेवन भी कहते हैं.
समूह खुद को "कम्यूनिटी ऑफ़ वैल्यूज" यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है. स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और क़ानून का शासन और समृद्धि और सतत विकास, इसके प्रमुख सिद्धांत हैं.
यह क्या करता है?
शुरुआत में यह छह देशों का समूह था, जिसकी पहली बैठक 1975 में हुई थी. इस बैठक में वैश्विक आर्थिक संकट के संभावित समाधानों पर विचार किया गया था. अगले साल कनाडा इस समूह में शामिल हो गया और इस तरह यह जी-7 बन गया. जी-7 देशों के मंत्री और नौकरशाह आपसी हितों के मामलों पर चर्चा करने के लिए हर साल मिलते हैं.
प्रत्येक सदस्य देश बारी-बारी से इस समूह की अध्यक्षता करता है और दो दिवसीय वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है. यह प्रक्रिया एक चक्र में चलती है. ऊर्जा नीति, जलवायु परिवर्तन, एचआईवी-एड्स और वैश्विक सुरक्षा जैसे कुछ विषय हैं, जिन पर पिछले शिखर सम्मेलनों में चर्चाएं हुई थीं.
शिखर सम्मेलन के अंत में एक सूचना जारी की जाती है, जिसमें सहमति वाले बिंदुओं का जिक्र होता है. सम्मलेन में भाग लेने वाले लोगों में जी-7 देशों के राष्ट्र प्रमुख, यूरोपीयन कमीशन और यूरोपीयन काउंसिल के अध्यक्ष शामिल होते हैं.
शिखर सम्मेलन में अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है. हर साल शिखर सम्मेलन के ख़िलाफ़ बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन होते हैं. पर्यावरण कार्यकर्ताओं से लेकर पूंजीवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले संगठन इन विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होते हैं.
प्रदर्शनकारियों को आयोजन स्थल से दूर रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की जाती है.
जी-7 कितना प्रभावी?
जी-7 की आलोचना यह कह कर की जाती है कि यह कभी भी प्रभावी संगठन नहीं रहा है, हालांकि समूह कई सफलताओं का दावा करता है, जिनमें एड्स, टीबी और मलेरिया से लड़ने के लिए वैश्विक फंड की शुरुआत करना भी है. समूह का दावा है कि इसने साल 2002 के बाद से अब तक 2.7 करोड़ लोगों की जान बचाई है.
समूह यह भी दावा करता है कि 2016 के पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने के पीछे इसकी भूमिका है, हालांकि अमरीका ने इस समझौते से अलग हो जाने की बात कही है.
चीन इस समूह का हिस्सा क्यों नहीं है?
चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा है, फिर भी वो इस समूह का हिस्सा नहीं है. इसकी वजह यह है कि यहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रहती हैं और प्रति व्यक्ति आय संपत्ति जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले बहुत कम है.
ऐसे में चीन को उन्नत या विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माना जाता है, जिसकी वजह से यह समूह में शामिल नहीं है. हालांकि चीन जी-20 देशों के समूह का हिस्सा है, इस समूह में शामिल होकर वह अपने यहां शंघाई जैसे आधुनिकतम शहरों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रहा है.
रूस भी कभी शामिल था?
साल 1998 में इस समूह में रूस भी शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था. लेकिन साल 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया हड़प लेने के बाद रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया था.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का मानना है कि रूस को समूह में फिर से शामिल किया जाना चाहिए "क्योंकि वार्ता की मेज पर हमारे साथ रूस होना चाहिए."
जी-7 के सामने चुनौतियां
जी-7 समूह देशों के बीच कई असहमतियां भी हैं. पिछले साल कनाडा में हुए शिखर सम्मेलन में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का अन्य सदस्य देशों के साथ मतभेद हो गया था. राष्ट्रपति ट्रंप के आरोप थे कि दूसरे देश अमरीका पर भारी आयात शुल्क लगा रहे हैं. पर्यावरण के मुद्दे पर भी उनका सदस्य देशों के साथ मतभेद था.
समूह की आलोचना इस बात के लिए भी की जाती है कि इसमें मौजूदा वैश्विक राजनीति और आर्थिक मुद्दों पर बात नहीं होती है. अफ्रीका, लैटिन अमरीका और दक्षिणी गोलार्ध का कोई भी देश इस समूह का हिस्सा नहीं है.
भारत और ब्राज़ील जैसी तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं से इस समूह को चुनौती मिल रही है जो जी-20 समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन जी-7 का हिस्सा नहीं हैं. कुछ वैश्विक अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जी-20 के कुछ देश 2050 तक जी-7 के कुछ सदस्य देशों को पीछे छोड़ देंगे.
- कोरोना वायरस के क्या हैं लक्षण और कैसे कर सकते हैं बचाव
- कोरोना महामारीः क्या है रोगियों में दिख रहे रैशेज़ का रहस्य
- कोरोना वायरसः वो शहर जिसने दुनिया को क्वारंटीन का रास्ता दिखाया
- कोरोना वायरस से संक्रमण की जांच इतनी मुश्किल क्यों है?
- कोरोना संकट: गूगल, फ़ेसबुक, ऐपल और एमेज़ॉन का धंधा कैसे चमका
- कोरोना वायरसः वो छह वैक्सीन जो दुनिया को कोविड-19 से बचा सकती हैं
- कोरोना वायरस: संक्रमण से बचने के लिए इन बातों को गाँठ बांध लीजिए
- कोरोना वायरस: सरकार का आरोग्य सेतु ऐप कितना सुरक्षित
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)