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चीन के साथ सरहद पर तनाव को लेकर पीएम मोदी का 'मूड ठीक नहीं' है: ट्रंप
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरहद पर भारत और चीन के बीच जारी तनाव को लेकर फिर से मध्यस्थता की पेशकश की है.
ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि मैं कुछ मदद कर सकता हूं तो मध्यस्थता के लिए तैयार हूं. अमरीकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने चीन के साथ जारी 'बड़े टकराव' पर पीएम मोदी से बात की थी. ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच तनाव को लेकर पीएम मोदी का मूड ठीक नहीं है. ट्रंप ने कहा कि पूरे मामले पर भारत ख़ुश नहीं है और शायद चीन भी ख़ुश नहीं है.
ट्रंप ने ये बातें पत्रकारों से गुरुवार को ओवल में कहीं. अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और चीन के बीच बड़े टकराव की स्थिति बनी हुई है.
एक भारतीय पत्रकार के सवाल पर ट्रंप ने कहा, ''मैं आपके प्रधानमंत्री को बहुत पसंद करता हूं. वो बहुत ही सज्जन हैं.'' अमरीकी राष्ट्रपति ने भारत-चीन तनाव पर कहा, ''भारत और चीन के बीच बड़े टकराव की स्थिति है. दोनों देशों के पास एक-एक अरब 40-40 करोड़ की आबादी है. दोनों की पास काफ़ी मज़बूत सेना हैं. भारत ख़ुश नहीं है और शायद चीन भी ख़ुश नहीं है. मैंने पीएम मोदी से बात की थी और चीन के साथ जो कुछ भी चल रहा है उसे लेकर उनका मूड ठीक नहीं है.''
बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट कर दोनों देशों के बीच सरहद पर जारी तनाव को लेकर मध्यस्थता की पेशकश की थी. ट्रंप ने कहा था कि वो मध्यस्थता के लिए तैयार हैं. ट्रंप से मध्यस्थता की पेशकश को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''मैं ये कर सकता हूं. अगर उन्हें लगता है कि इससे मदद मिलेगी तो मैं ऐसा कर सकता हूं.''
भारत ने ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश पर गुरुवार को कहा था कि सरहद पर जारी गतिरोध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए चीन के साथ बातचीत जारी है. भारत ने ट्रंप की पेशकश को लेकर बहुत ही सतर्कता से जवाब दिया था. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, ''हमलोग शांतिपूर्ण समाधान के लिए चीन से संपर्क में हैं.''
ट्रंप की पेशकश पर चीन के विदेश मंत्रालय की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि दोनों देशों को इस तरह की मदद की ज़रूरत नहीं है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ बुधवार को चीन ने कहा था कि भारत के साथ सीमा पर स्थिति 'पूरी तरह स्थिर और नियंत्रण' में है.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि दोनों देशों के पास बातचीत और परामर्श के ज़रिए मुद्दे सुलझाने का उचित तंत्र मौजूद है.
लिजियान ने कहा था, "हम अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं. अब चीन-भारत सीमा पर स्थिति पूरी तरह स्थिर और नियंत्रण में है. हम पूरी तरह बातचीत और परामर्श के ज़रिए मुद्दे सुलझाने में समर्थ हैं."
चीन के साथ सरहद पर तनाव क्यों
भारत और चीन के बीच अक्साई चीन में स्थित गलवान घाटी को लेकर उस वक़्त तनाव पैदा हो गया जब भारत ने आरोप लगाया कि गलवान घाटी के किनारे चीनी सेना ने कुछ टेंट लगाए हैं.
गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के नज़दीक स्थित है. यहां पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) अक्साई चीन को भारत से अलग करती है. ये घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग और भारत के लद्दाख़ तक फैली है.
इसके बाद भारत ने वहाँ फ़ौज की तैनाती बढ़ा दी. दूसरी तरफ़ चीन ने आरोप लगाया कि भारत गलवान घाटी के पास सुरक्षा संबंधी ग़ैर-क़ानूनी निर्माण कर रहा है. इससे पहले नौ मई को नॉर्थ सिक्किम के नाथू ला सेक्टर में भारतीय और चीनी सेना में झड़प हुई थी. उस वक़्त लद्दाख में एलएसी के पास चीनी सेना के हेलिकॉप्टर देखे गए थे. फिर इसके बाद भारतीय वायु सेना ने भी सुखोई और दूसरे लड़ाकू विमानों की पट्रोलिंग शुरू कर दी थी.
भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को ख़त्म करने के लिए डिवीज़न कमांडर स्तर पर हुई कई दौर की वार्ता विफल रही हैं.
द हिंदू अख़बार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति और चीन के साथ चल रहे मौजूदा गतिरोध पर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी.
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़ जनरल विपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी शामिल रहे.
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