कोरोना वायरस: ब्राज़ील क्या अमरीका को भी पीछे छोड़ देगा?

    • Author, पाब्लो ओचोआ
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

पिछले हफ़्ते नर्स डे पर एलेने ओलीविरा ने प्रोटेक्टिव गीयर पहने हुए अपनी पिक्चर इंस्टाग्राम पर डाली और लोगों से घर पर ही रहने की अपील की.

33 साल की ओलीविरा फ़ोर्टएलेज़ा हॉस्पिटल में पूरी रात काम करने के बाद इतनी थक चुकी थीं कि उनसे बिस्तर से उठा भी नहीं जा रहा था. यह हॉस्पिटल उत्तर-पूर्वी ब्राज़ील के सिआरा राज्य में मौजूद है.

पिछले दो महीने से उन्होंने अपने माता-पिता को भी नहीं देखा था. ओलीविरा ने लिखा, "मैं उन्हें बहुत याद करती हूं और मुझे बुरा लगता है."

"जब मैं यह लिख रही हूं, उस वक्त मेरे सहयोगी किसी के बेड के बगल में खड़े होकर कड़ी मेहनत कर रहे हैं और वे उनकी ज़िंदगियां बचाने या उन्हें थोड़ा सम्मान देने की कोशिश कर रहे हैं."

"मैं तारीफ़ या बधाई नहीं चाहती हूं. मैं चाहती हूं कि आप घर पर रहें और ख़ुद को, मुझे और अपने परिवार को सुरक्षित रखें."

लॉकडाउन का उल्लंघन

ओलीविरा देख रही थीं कि कई सारे ब्राज़ीली लोग या तो लॉकडाउन के उपायों की उपेक्षा कर रहे थे या फिर वे बिना वजह इन उपायों का उल्लंघन कर रहे थे.

ख़ासतौर पर ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के समर्थकों ने इस बीमारी की गंभीरता को नकारने की कोशिश की है.

उन्होंने लोगों में गलत धारणाएं फैलाईं और इसके ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किए. उन्होंने सामाजिक दूरी के नियमों की धज्जियां उड़ाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है.

ओलीविरा ने इंस्टाग्राम पर लिखा, "आज नर्स डे है और मेरे देश के राष्ट्रपति जेट-स्की की राइड कर रहे हैं और वह पूछते हैं, तो क्या हुआ?"

"ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये ऐसे लोग हैं जिनके बच्चे, मां-बाप, पार्टनर हैं. ये किसी न किसी के प्रिय हैं और ये जीना चाहते हैं."

ना-उम्मीदी

ब्राज़ील दुनिया भर में कोविड-19 के सबसे ज़्यादा मामलों के लिहाज से दूसरे पायदान पर है. जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक़, ब्राज़ील के क़रीब तीन लाख, 30 हज़ार से ज़्यादा लोग संक्रमित हैं.

लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि यह आँकड़ा 30 लाख के भी पार हो सकता है.

रिबेराओ प्रेटो मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर डोमिंगोस एल्वेस बताते हैं, "मैं साफ़तौर पर कह सकता हूं कि ब्राज़ील पूरी दुनिया में कोविड-19 वायरस के फैलने का सबसे अहम केंद्र बन गया है."

अब तक 21 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं लेकिन प्रोफ़ेसर एल्वेस कहते हैं कि मरने वालों की तादाद को बड़े पैमाने पर दबाया गया है.

हॉस्पिटलों में कोविड-19 के मरीज़ों की भरमार है. डॉक्टरों और नर्सों को यह चुनाव करना पड़ रहा है कि वे किन मरीज़ों को इलाज देकर बचा सकते हैं और किन मरीज़ों पर इलाज का कोई फ़ायदा नहीं होगा.

इसके बावजूद बोल्सोनारो इस बात पर ज़ोर देते रहे हैं कि कोविड-19 महज़ एक हल्का फ़्लू है.

दक्षिणपंथी बोल्सोनारो लॉकडाउन विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं. महामारी के बीच में वह अपने समर्थकों के साथ हाथ मिलाते और यहां तक कि क़रीब 30 गेस्ट्स के साथ बारबेक्यू का आयोजन करते दिखाई दिए हैं.

ब्राज़ील में मौतों का आंकड़ा 5,000 के पार जाने पर पिछले महीने पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा था, "तो क्या हुआ? मुझे खेद है, लेकिन मैं कोई करिश्मा नहीं कर सकता हूं."

सियारा राज्य के स्वास्थ्य सचिवालय से महामारी को ट्रैक कर रहे महामारी विज्ञानी इटालो लेनोन कहते हैं कि मौजूदा हालात ने उन्हें निराशा से भर दिया है.

लेनोन बताते हैं, "जब यह सब शुरू हुआ तो मैंने सोचा कि मैं अपने स्किल्स से इसे रोकने में सफल रहूंगा. मुझे लगा कि हम एक मुश्किल महामारी का सामना करने जा रहे हैं, लेकिन मैं लोगों की मदद कर सकूंगा."

"मुझे लगता है कि हम एक नामुमकिन काम करने की कोशिश कर रहे हैं."

'हम जीने और मरने वालों में चुनाव कर रहे हैं'

सियारा राज्य में साओ पाओलो के बाद सबसे बड़ी तादाद में मामले सामने आए हैं. इंटेंसिव केयर यूनिट्स तक़रीबन अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं. ऐसा तब है जबकि महामारी के आने के बाद से बेड्स की संख्या दोगुनी हो चुकी है.

ओलीविरा एक बच्चों के हॉस्पिटल में काम करती हैं और वह एक इमर्जेंसी यूनिट में भी काम करती हैं जहां पर कोविड-19 के मरीज़ों को लाया गया है.

इस तरह की यूनिट्स लंबे वक़्त के लिए भर्ती किए जाने के लिए नहीं हैं लेकिन मौजूदा वक़्त में उनके 40 मरीज़ों में से किसी के लिए भी हॉस्पिटल बेड उपलब्ध नहीं हैं.

शहर ने बड़े शीत कंटेनर लगाए हैं ताकि कोरोना से मरने वालों के शव इनमें स्टोर किए जा सकें.

ओलीविरा के मुताबिक़, "हमें यह तय करना पड़ रहा है कि किसे वेंटिलेटर पर रखा जाए और किसे नहीं."

वह कहती हैं कि कई मरीज़ इंतज़ार करते-करते मर गए हैं और स्टाफ केवल उन्हें पैलिएटिव केयर (ऐसे मरीज़ जिनके बचने के आसार नहीं होते हैं) दे पाते हैं ताकि वे शांति से मर सकें.

लेकिन, ब्राज़ील के काफ़ी लोग हालात की गंभीरता को समझ नहीं रहे हैं. लेनोन कहते हैं, "कई लोग हकीकत को मानना नहीं चाहते हैं."

'फ़ेक न्यूज़ से सबसे ज्यादा मुश्किल हो रही'

लोग सामाजिक दूरी के नियमों को मान नहीं रहे हैं, वे मास्क पहनने से इनकार कर रहे हैं. ये लोग भीड़भाड़ में हिस्सा ले रहे हैं.

लेनोन कहते हैं, "हम सुनते हैं कि फलां शख्स के यहां पार्टी आयोजित हुई है. हम लोगों को इस महामारी के बारे में समझाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन, हमारी सबसे बड़ी समस्या फ़ेक न्यूज़ है."

इस महीने की शुरुआत में इंस्टाग्राम ने एक राज्य के प्रतिनिधि की साझा की गई उस पोस्ट को हटा दिया था जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अधिकारी जानबूझकर मौतों के आँकड़े को बढ़ा-चढ़ाकर बता रहे हैं ताकि लोगों में भय पैदा हो.

यह सूचना बाद में ग़लत पाई गई और उसे हटा दिया गया था. लेकिन, तब तक इसे बोल्सोनारो भी शेयर कर चुके थे.

मार्च में ट्विटर और फ़ेसबुक ने फ़ेक न्यूज़ के तौर पर राष्ट्रपति की पोस्ट्स को डिलीट कर दिया था.

पिछले महीने एमेजॉन के शहर मानाउस के बारे में ऐसी अफ़वाहें उड़ीं कि अधिकारी ख़ाली ताबूतों को दफ़न कर रहे हैं ताकि मरने वालों के आँकड़े को बढ़ाकर दिखाया जा सके.

शहर के स्वास्थ्य सिस्टम पर कोविड-19 के मरीज़ों का भारी बोझ है और बड़े पैमाने पर क़ब्रों का इस्तेमाल मरे हुए लोगों को दफ़न करने में किया जा रहा है.

राजनीतिक संकट

इस महामारी ने बोल्सोनारो की सरकार के भीतर एक राजनीतिक संकट भी पैदा कर दिया है.

एक महीने में ब्राज़ील के दूसरे स्वास्थ्य मंत्री नेल्सन टीच ने पिछले हफ़्ते इस्तीफ़ा दे दिया. वह कोरोना वायरस के मरीज़ों का इलाज क्लोरोक्विन से करने को लेकर राष्ट्रपति से असहमत थे.

अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप की तरह से ही बोल्सोनारो भी इस बात के मज़बूत समर्थकों में हैं कि कोविड-19 के मरीज़ों का इलाज मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं से किया जाए. हालांकि, अध्ययनों से अभी तक इनके प्रभावी होने के बारे में पुख्ता प्रमाण नहीं मिल पाए हैं.

टीच से पहले स्वास्थ्य मंत्री रहे लुइज मैंडेटा को सामाजिक दूरी के उपायों को लेकर बोल्सोनारो से टकराव के चलते हटा दिया गया था.

राष्ट्रपति इकनॉमी पर बुरे असर को देखते हुए कारोबारों और लॉकडाउन की दूसरी पाबंदियों को लागू नहीं करना चाहते हैं.

लेकिन, शहरों और राज्यों ने इन उपायों को लागू किया है और महामारी के गंभीर होने के साथ ही वे इन्हें और सख्त बनाने पर विचार कर रहे हैं.

ब्राज़ील के सबसे बड़े शहर साओ पाओलो के मेयर ब्रूनो कोवास ने चेतावनी दी है कि कोविड-19 के चलते हॉस्पिटलों के इमर्जेंसी बेड्स दो हफ्तों में ही भर सकते हैं और इसके बाद नए मरीज़ों को रखने की जगह नहीं होगी.

कोवास ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जान के साथ खिलवाड़ न करें क्योंकि अधिकारियों के मुताबिक़, शहर की 1.2 करोड़ की आबादी का ज़्यादातर हिस्सा सामाजिक दूरी के नियमों की उपेक्षा कर रहा है.

दो हिस्सों में बँट गए परिवार

विभाजन और गहरा गए हैं और यहां तक कि परिवार भी दो हिस्सों में बंट गए हैं.

ओलीविरा कहती हैं कि उन्होंने अपने भाई से बात करना बंद कर दिया है क्योंकि वे लोग बोल्सोनारो की सलाह मान रहे हैं.

वह कहती हैं कि वह इस बात से बेहद नाराज़ हैं कि ये लोग कोई भी सावधानी नहीं रख रहे हैं और न ही ये उनके बूढ़े मां-बाप के यहां जाना बंद कर रहे हैं.

उनके जैसे फ्रंटलाइन स्टाफ़ को इस महामारी के चलते क़ुर्बानियां देनी पड़ रही हैं. मसलन, ये लोग अपने बच्चों और पेरेंट्स से हफ़्तों से दूर हैं. वह कहती हैं कि उनकी ये क़ुर्बानी वे लोग नहीं समझ रहे हैं जो कि लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं.

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