कोरोना लॉकडाउनः नाईजीरियाई सेक्स वर्कर का संघर्ष

एक नाइजीरियाई सेक्स वर्कर ने बीबीसी को बताया है कि कैसे कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन ने उनके सामने बदहाली के हालात पैदा कर दिए हैं.

वो उत्तरी नाइजीरिया के मुस्लिम बहुल राज्य कानो में रहती हैं. वहाँ चार हफ़्तों से लॉकडाउन जारी है. किसी को भी घर से निकलने की इजाज़त नहीं है. सिर्फ़ सोमवार और गुरुवार दस से चार बजे तक खाने-पीने की चीज़ों के लिए निकलने की इजाज़त है.

रमज़ान के पाक महीने में भी मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने या फिर इफ़्तार के लिए इकट्ठा होने की भी इजाज़त नहीं है.

आयशा (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि लॉकडाउन की वजह से उन्हें ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.

वो कहती हैं, "मैंने अपना काम शुरू करने की कोशिश की लेकिन लॉकडाउन और रमज़ान के महीने की वजह से यह संभव नहीं हो पाया."

वो बताती हैं, "यहाँ लगभग हर कोई मुसलमान है. इसलिए रमज़ान के महीने में मुमकिन नहीं हो पा रहा. दोपहर सभी अपने परिवार के साथ रहते हैं और शाम को वो रोज़ा तोड़ने और इफ़्तार करने चले जाते हैं. मेरे ज़्यादातर ग्राहक शादीशुदा मर्द हैं. इसलिए उनके लिए आसान नहीं मौजूदा वक़्त में आना."

इस्लामी क़ानून शरिया साल 2000 से कानो में लागू है. उत्तरी नाइजीरिया के और भी कई इलाक़ों में यह लागू है. तब से वेश्यावृत्ति, जुआ और शराब पर कानो में प्रतिबंध लगा हुआ है.

आयशा बताती है, "नाइजीरिया में पुलिस बहुत सक्रिय है. सेक्स वर्क पर यहाँ पाबंदी है ख़ासकर उत्तरी नाइजीरिया में. अगर आप सेक्स व्यापार करते पकड़े गए तो आपको गिरफ़्तार करके जेल भेजा जा सकता है. हम शरिया क़ानून में रह रहे हैं."

आयशा बताती हैं कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान सरकार से किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है.

वो कहती हैं, "नाइजीरिया में सेक्स वर्कर्स को किसी भी तरह की कोई मदद नहीं मिलती. हमें सिर्फ़ नाइजीरिया सेक्स वर्कर्स एसोसिएशन (एनएसडब्लूए) का सहारा है. इसमें हम जो कमाते हैं उसका एक हिस्सा बचत के तौर पर रखा होता है ताकि मुश्किल वक़्त में हम एक-दूसरे की मदद कर सकें. लेकिन एसोसिएशन के पास अब कोई पैसा नहीं बचा है. उनके पास जो कुछ भी था वो सब उन्होंने सेक्स वर्कर्स की मदद में लॉकडाउन के दौरान बांट दिए."

आयशा कहती हैं, "मैं उम्मीद कर रही हूँ कि सरकार की ओर से कुछ मदद मिलेगी. लेकिन अब तक तो कुछ नहीं मिला है. हमें कोई दूसरा रास्ता देखना पड़ेगा. सरकार तो यह भी नहीं जानना चाहती कि सेक्स वर्कर्स यहाँ नाइजीरिया में क्या कर रहे हैं."

वो हताश होकर कहती हैं, "मेरे पैसे ख़त्म होते जा रहे हैं. मेरे पास कोई दूसरा चारा भी नहीं. मैं अब तक इसलिए काम चला पा रही हूँ क्योंकि मेरे कुछ ग्राहक मेरा ख्याल रखते हैं. वो मेरी मदद कर रहे हैं. मुझे कुछ खाने-पीने की चीज़ें और कुछ पैसे उनसे मिल जाते हैं."

आयशा आगे कहती हैं, "ये काफ़ी नहीं है क्योंकि मेरे साथ मेरी बहनें भी हैं. जो कुछ भी मिलता है, वो मुझे उनके साथ मिल बांटकर खाना होता है. इसलिए ऐसे रहना आसान नहीं है मुझे नहीं पता कि कब तक ये चलेगा और हमें इन हालात में रहना पड़ेगा."

आगे वो शिकायत करते हुए कहती हैं, "मैं बहुत दुखी हूं कि सरकार हमारी किसी भी तरह की कोई मदद नहीं कर रही. वो हमारी मदद करने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रही है."

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