कोरोना वायरसः ब्रिटेन में भारतीयों और पाकिस्तानियों को ज़्यादा ख़तरा

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इंग्लैंड और वेल्स में रहने वाले काले लोगों की कोरोना वायरस के संक्रमण से मरने की आशंका गोरों की तुलना में क़रीब दोगुनी है. ऑफिस ऑफ नेशनल स्टैटिस्टिक्स से इस बात का पता चलता है.

एनालिसिस से उम्र, लोगों के रहने की जगह, संसाधनों की कमी और पिछली स्वास्थ्य दिक्क़तों के आधार पर यह असमानता दिखाई देती है.

भारतीय, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी लोग भी इस बीमारी से मरने के ज़्यादा जोखिम वाले तबके में शामिल हैं. सरकार ने इस मामले की समीक्षा करने के आदेश दे दिए हैं.

गोरों की तुलना मेंकालों पर ज़्यादाख़तरा

ओएनएस के एनालिसिस में कोविड-19 की वजह से होने वाली मौतों में 2011 की जनगणना में लोगों की राष्ट्रीयता की जानकारियों को शामिल किया गया है.

उम्र, लोकेशन और संसाधनों की कमी और पहले से बीमारियों को देखते हुए यह पाया गया कि काले लोगों के गोरों की तुलना में कोविड-19 से मरने के 90 फ़ीसदी ज़्यादा आसार हैं.

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विश्लेषण के मुताबिक़, भारतीय, बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों के लिए यह जोखिम 30 फ़ीसदी से लेकर 80 फ़ीसदी तक है.

बीबीसी के स्टैटिस्टिक्स हेड रॉबर्ट कफ़ बताते हैं कि यह विश्लेषण ज़्यादा जोखिम की वजहों को पूरी तरह से नहीं समझा सकता क्योंकि इसमें लोगों की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति, क्या वे भीड़भाड़ वाली जगहों पर रह रहे हैं, क्या वे फ्रंट-लाइन भूमिकाओं के ज़रिए वायरस के संपर्क में तो नहीं आ रहे हैं या समुदायों के बीच अंतर जैसी चीज़ों को शामिल नहीं किया गया है.

सामाजिक-आर्थिक कारण भी अहम

ओएनएस ने सुझाव दिया है कि जोखिम की कुछ वजहें अन्य सामाजिक या आर्थिक कारण भी हो सकते हैं जिन्हें इस डेटा में शामिल नहीं किया गया है.

इसमें कहा गया है कि कुछ राष्ट्रीयता वाले समूहों में सार्वजनिक लोगों के साथ संपर्क वाले कामों में ज़्यादा प्रतिनिधित्व हो सकता है और ऐसे में इनके कामकाज़ के दौरान संक्रमित होने के ज़्यादा आसार हैं.

ओएनएस की योजना कोरोना वायरस के जोखिम और लोगों के काम की प्रकृति के बीच संबंध ढूंढने की है.

पिछली स्वास्थ्य स्थितियों और लोकेशन जैसे दूसरे फैक्टर्स को शामिल किए बगैर विश्लेषण में पाया गया है कि अश्वेत लोगों की कोरोना वायरस के संपर्क में आने के बाद मरने की आशंका चार गुनी तक है.

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क्या गुमराह करते हैं ये आँकड़े?

नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में संक्रामक बीमारियों के महामारी विज्ञान के एमेरिटस प्रोफ़ेसर प्रो. कीथ नील कहते हैं कि ये आँकड़े गुमराह करने वाले हैं.

उन्होंने कहा कि क्या समूह ऐसे इलाक़ों में रह रहे हैं जहां कोरोना वायरस के ज़्यादा मामले हैं, जैसे ज्ञात तथ्यों को शामिल किए बगैर जोखिम में अंतर वास्तविक से ज़्यादा दिखाई दे सकता है.

इन मसलों को शामिल करने के बाद काले लोगों की मृत्यु दर गोरों की तुलना में 1.9 गुना निकली. बांग्लादेशी और पाकिस्तानी पुरुषों और महिलाओं के लिए यह जोखिम 1.8 गुना था जबकि इन समुदायों में महिलाओं के लिए यह जोखिम 1.6 गुना ज़्यादा था.

क़दम उठाए जाने चाहिए

शैडो जस्टिस सेक्रेटरी डेविड लैमी कहते हैं कि अश्वेत लोगों के ज़्यादा जोखिम में होने का तथ्य काफ़ी परेशान करने वाला है.

टोटेनहैम से लेबर सांसद ने ट्विटर पर लिखा है, 'इस अंतर की वजहों की जांच होनी चाहिए. काले लोगों को बचाने के लिए क़दम उठाए जाने चाहिए. साथ ही सभी तरह के लोगों को वायरस से बचाने की कोशिश की जानी चाहिए.'

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हेल्थ फाउंडेशन की रिसर्च में पता चला है कि एथनिक माइनॉरिटी वर्कर्स के ऐसे कामकाज़ से जुड़े होने के ज़्यादा आसार हैं जिनमें महामारी के दौरान वायरस के शिकार होने का ज़्यादा जोखिम है.

यह पाया गया है कि लंदन में हालांकि, अश्वेत और एशियाई मूल के कर्मचारियों की आबादी कुल वर्किंग आबादी का 34 फ़ीसदी है, लेकिन वे फूड रीटेल में 54 फ़ीसदी, हेल्थ और सोशल केयर स्टाफ़ में 48 फ़ीसदी और ट्रांसपोर्ट में काम करने वालों का 44 फ़ीसदी हिस्सा हैं.

हेल्थ फाउंडेशन के असिस्टेंट डायरेक्टर टिम एलवेल-सुटन कहते हैं कि सरकार के अलग-अलग समूहों पर कोरोना वायरस के असर के आकलन के लिए ऐलान किए गए रिव्यू में यह भी पता किया जाना चाहिए कि गहरे तक समाए भेदभाव और सामाजिक-आर्थिक रूप से हाशिये पर मौजूद लोग किस तरह से ज्यादा जोखिम में हैं.

एशियाई और अश्वेत भीड़भाड़ वाली जगहों में रह रहे

जोसेफ राउनट्री फाउंडेशन की एक्टिंग डायरेक्टर हेलेन बर्नार्ड कहती हैं कि काले, एशियाई और माइनॉरिटी एथनिक बैकग्राउंड के वर्कर्स के भीड़भाड़ वाले घरों में रहने के ज़्यादा आसार हैं, इससे इनके परिवारों में भी वायरस फैलने का ख़तरा पैदा हो रहा है.

उन्होंने कहा कि यूके में कम तनख्वाह, असुरक्षित नौकरियां और तेज़ी से बढ़ती लिविंग कॉस्ट से यह संकट और गहरा गया है. उन्होंने कहा, 'हमें ख़ुद से पूछना चाहिए कि वायरस के गुजरने के बाद हम किस तरह के समाज में जीना चाहते हैं.'

डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड सोशल केयर की एक स्पोक्सवुमन ने कहा कि उन्होंने देशीयता, मोटापा, लोकेशन और दूसरे फैक्टरों के आधार पर वायरस के असर का पता लगाने के लिए पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड को कहा है.

उन्होंने कहा, 'हमारे लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि कौन से ग्रुप ऐसे हैं जो कि सबसे ज़्यादा जोखिम में हैं. तभी हम उन्हें बचाने और जोखिम को न्यूनतम करने के लिए क़दम उठा पाएंगे.'

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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