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कोरोना वायरस: लॉकडाउन के बाद कैसे कटेंगे बाल
कोरोना वायरस संक्रमण के लिए अपनाए गए क्वारंटीन नियमों में छूट देने वाले देशों में अब जर्मनी का नाम भी जुड़ गया है. लेकिन यहां के हेयरड्रेसर भी बाक़ी यूरोप की तरह पूरी सावधानी के साथ अपना काम कर रहे हैं.
हेयरड्रेसिंग सैलूनों में ग्राहकों के लिए अब कोई वेटिंग एरिया नहीं है. अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए पढ़ी जाने वाली पत्रिकाएं हटा दी गई हैं. साथ ही ड्राई कट भी बंद कर दिए गए हैं.
जर्मनी में 23 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद पहली बार सैलून खोले गए हैं. लेकिन सैलूनों में कामकाज का तरीक़ा बदल गया है.
जर्मनी के आर्थिक और सामाजिक मामलों के मंत्रालय ने जो नया नियम जारी किया है, उसके मुताबिक़ सैलून में आने वाले ग्राहकों के बीच कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी होनी चाहिए. सैलून में बाल सूखाने के लिए मशीनों के इस्तेमाल पर भी रोक है.
नए नियमों के मुताबिक़ कस्टमर के बाल धोते समय (बैक्टीरिया हटाने के लिए) दस्ताने पहनने ज़रूरी हैं. हां, बाल काटते समय इन्हें उतारा जा सकता है.
और हां, अक्सर बाल काटते समय ग्राहकों की हेयरड्रेसर से जो दीन-दुनिया की चर्चा या गप्पें होती थीं, उस पर भी रोक लगा दी गई है. सैलून में आमने-सामने कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए. ग्राहक हेयर ड्रेसर से अपनी कटिंग और हेयर कलर के बारे में जो बात करेंगे वे शीशे में देखते हुए ही होनी चाहिए. बातचीत जितनी कम हो उतनी अच्छी.
मंत्रालय ने कहा है कि सैलूनों में हेयर कटिंग को लेकर जो नियम बनाए गए हैं वे बेहद ज़रूरी थे क्योंकि हेयर ड्रेसर और ग्राहकों के बीच लगभग कोई दूरी नहीं होती. बैठे हुए ग्राहकों के बीच भी काफ़ी कम दूरी होती है.
डर पर बनाव-सिंगार भारी
बर्लिन के हरे-भरे ज़िले प्रेन्जलॉ बर्ग के एक सैलून मालिक रेनो हार्म्स से मैंने पूछा, "आज कल लोगों की हेयर स्टाइल आपको कैसी लग रही है." ठहाका लगाते हुए उन्होंने कहा, "बड़ी मज़ेदार. ज्यादातर लोगों ने तो अपने बाल ख़ुद ही काट रखे हैं. कुछ तो घरों में ख़ुद ही कलर करते रहे. आज तो मैं सिर्फ़ रिपेयर वर्क कर रहा हूं."
इन छह हफ्तों के दौरान हार्म्स के ज्यादातर ग्राहकों ने वाउचर ख़रीद रखे थे. इन वाउचर्स को बाद में भुनाया जा सकता है. आजकल स्थानीय दुकानों, कैफ़े और रेस्तराओं में इसी का इस्तेमाल हो रहा है. इससे हार्म्स अपनी पहली की कमाई के 50 फ़ीसदी तक हासिल कर ले रहे हैं. यह उनका धंधा चलाए रखने के लिए पर्याप्त है. लेकिन आज उन्हें अब तक लगभग मुफ्त ही काम करना पड़ा है. क्योंकि लोग अपने वाउचर भी तो भुना रहे हैं.
नए नियमों की वजह से वह पहले की तुलना में आधे ग्राहकों के ही बाल काट सकते हैं. इसके साथ ही हर चीज़ को संक्रमित रहित करने की प्रक्रिया से गुज़ारना होता है. ग्राहकों के बीच दूरियां भी पर्याप्त होनी चाहिए. सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है. कोई वेटिंग एरिया नहीं है. ज़ाहिर है ग्राहकों की संख्या तो घट ही गई है.
हालांकि धंधा मंदा नहीं पड़ा है. बर्लिन के ज्यादातर सैलूनों में ग्राहक भरे पड़े हैं. अप्वाइंटमेंट मिलना मुश्किल हो रहा है.
मार्च में लॉकडाउन लागू होने के पहले कुछ हफ्तों के दौरान कई ग्राहकों ने सैलून जाना बंद कर दिया था क्योंकि उन्हें संक्रमण का डर था.
रेनो को लगता है लोग अब भी घबरा रहे हैं. लेकिन उनके अंदर कुलबुलाहट भी हो रही है. वे सैलून आकर ही बाल कटाना चाहते हैं. मज़ाक़ में वह कहते हैं- बनाव-सिंगार डर पर भारी पड़ रहा है.
जर्मनी के आर्थिक और सामाजिक मामलों के मंत्रालय का कहना है कि रिटेल स्टोर्स की तुलना में सैलून में हेयर ड्रेसर और ग्राहकों के बीच की दूरी काफ़ी कम होती है. हेयर ड्रेसर को ग्राहकों के शरीर छूने पड़ते हैं.
इसलिए सैलूनों को अपने ग्राहकों के नाम दर्ज करने के लिए कहा गया है ताकि कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जा सके. ज़रूरत पड़ी तो संक्रमण का पता चलाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
पूरे यूरोप में लॉकडाउन में छूट के तहत सबसे पहले हेयर सैलूनों को खोलने की इजाज़त दी गई. स्पेन में भी 4 मई को हेयरड्रेसिंग सैलून खुल गए थे. लेकिन अभी 30 फ़ीसदी ग्राहकों को ही आने की इजाज़त है. वह भी पहले से अप्वाइंटमेंट लेकर.
डेनमार्क में जब 17 अप्रैल को सैलून खोलने की इजाज़त का ऐलान किया गया तो इतने लोगों ने अप्वाइंटमेंट के लिए लॉग-इन किया कि इनका सबसे बड़ा ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ही क्रैश हो गया.
एक अख़बार के मुताबिक़ लॉकडाउन की वजह से बढ़े बालों के कटवाने के लिए लोगों में होड़ मची थी.
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि हेयर ड्रेसिंग सैलूनों के लिए जो नए नियम बनाए गए हैं उन्हें लागू करना क्या इतना आसान है? क्या ये बदले हुए नियम बाल काटने के तौर-तरीक़े भी बदल सकते हैं.
एलिसन बैड्रिक इंग्लैंड के बमिंघमशायर में हेयर ड्रेसिंग का काम करती हैं. वह घर-घर जाकर हेयर ड्रेसिंग करती हैं. लेकिन अपना काम शुरू करने के लिए उन्हें सरकार से और साफ़ दिशा-निर्देशों का इंतज़ार है. उन्हें लगता है उन्हें काम शुरू करने में थोड़ी देर लग सकती है.
वह कहती हैं कि ज्यादातर नियम तो ठीक लग रहे हैं. जैसे- कस्टमर के बाल काटने के वक़्त मास्क पहना जाए. लेकिन मास्क पहने ग्राहकों की कनपटियों या इससे ऊपर के बाल काटे जाएंगे तो मास्क की डोरी कटने की आशंका बनी रहेगी. जब तक चेहरे पर चिपकने वाला मास्क नहीं बनेगा तब तक इस तरह से बाल कैसे कटेंगे, मुझे नहीं मालूम.
जर्मनी में हेयरड्रेसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ने टीवी न्यूज़ प्रोग्राम तेगेशाउ में कहा कि जब इस तरह की समस्या आए तो ग्राहक थोड़ी देर के लिए मास्क को चेहरे के ऊपर सरका ले.
कोरोनावायरस के हमले से पहले बाल कटाना भले ही सुकून भरा या झंझट का काम रहा हो लेकिन अब यह पहले जैसा अहसास नहीं रहने वाला.
सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की वजह से सैलून अब कम ग्राहकों को अपनी सर्विस दे पाएंगे. लंदन के सैलून ग्रुप ब्लू टीट का अनुमान है कि हेयर ड्रेसिंग सैलूनों को अब अपने आधे ग्राहकों से ही काम चलाना होगा. कंपनी अब अपने ग्राहकों को एक्सट्रा 15 मिनट देने की सोच रही है ताकि उनकी साफ़-सफ़ाई और अच्छी से की जा सके. दुकानें भी ज्यादा देर तक खुल सकती हैं और हेयर ड्रेसर दो शिफ़्टों में काम कर सकते हैं.
इस सैलून ग्रुप का फ़ोकस ग्राहकों के लिए लंबे वक़्त तक कारगर हेयर केयर मुहैया कराने पर है. इसे भरोसा है कि वह लोगों को आरामदेह हेड मसाज, शैंपू वॉश और ड्रिंक्स सर्विस देती रहेगी.
सरकार हेयर कटिंग-ड्रेसिंग सर्विस मुहैया कराने वालों के लिए आगे चल कर चाहे जो नियम लाए लेकिन इतना तय है कि इसका बोझ ग्राहकों के बटुओं पर पड़ेगा. हेयर ड्रेसिंग सर्विस का महंगा होना तय है.
ब्लू टीट का कहना है कि अब हर ग्राहक को ज्यादा समय देना होगा. ज़ाहिर है हमारी लागत तो बढ़ेगी ही. साथ ही पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट यानी PPE का भी इस्तेमाल करना होगा. हमारे लिए अपने ग्राहक और स्टाफ़ की सुरक्षा सबसे बड़ी चीज़ है.
हेयरकटिंग के दौरान हेयर ड्रेसर के साथ गॉसिप का क्या होगा?
एलिसन बैड्रिक कहती हैं, "हेयरड्रेसर कटिंग और ड्रेसिंग के वक़्त ग्राहकों से गॉसिप करते हैं. वो हेयर ड्रेसर ही क्या, जो अपने ग्राहकों को यहां-वहां के क़िस्से न सुनाए और उसे आसपास की ख़बरें न दे."
बाल कटाने के दौरान सबसे शानदार चीज़ तो आपसी बातचीत ही होती है. देखना है अब आगे यह सब कैसे होता है.
जर्मनी में हेयर ड्रेसिंग के नए नियम
- सैलून में आने के लिए पहले से अप्वाइंटमेंट लेना होगा ताकि वहां ग्राहक न जमा हों.
- कटिंग के वक़्त ग्राहकों और हेयर ड्रेसर को डेढ़ मीटर की दूरी बना कर रखनी होगी.
- ग्राहकों और हेयरड्रेसर के लिए फेस मास्क पहनना अनिवार्य है.
- हेयर स्टाइल, कलर वग़ैरह के बारे में आमने-सामने कोई बातचीत नहीं होगी. ग्राहक और हेयर ड्रेसर शीशे में देख कर ही बात करेंगे.
- अगर संभव हुआ तो ब्लो-ड्रायर मशीनें नहीं चलेंगी.
- ताज़ी हवा का सर्कुलेशन होते रहना चाहिए. हर हेयर ड्रेस के लिए इसे 100 घन मीटर/ प्रति घंटा तय कर दिया गया है.
- कैंची और दूसरे औज़ारों को डिसइनफ़ेक्ट किया जाना ज़रूरी है. हेयर ड्रेसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली कुर्सियों को भी डिसइनफ़ेक्ट करना ज़रूरी है.
- हेयर ड्रेसिंग के दौरान ग्राहकों के लिए डिस्पोज़ेबल चोगे का इस्तेमाल करना होगा. यानी ऐसा चोगा, जिसे हर कटिंग के बाद नष्ट कर दिया जाए.
- सैलून में घुसने से पहले ग्राहकों को हाथ धोना होगा.
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