कोरोना वायरस संक्रमण के लिए अपनाए गए क्वारंटीन नियमों में छूट देने वाले देशों में अब जर्मनी का नाम भी जुड़ गया है. लेकिन यहां के हेयरड्रेसर भी बाक़ी यूरोप की तरह पूरी सावधानी के साथ अपना काम कर रहे हैं.
हेयरड्रेसिंग सैलूनों में ग्राहकों के लिए अब कोई वेटिंग एरिया नहीं है. अपनी बारी का इंतज़ार करते हुए पढ़ी जाने वाली पत्रिकाएं हटा दी गई हैं. साथ ही ड्राई कट भी बंद कर दिए गए हैं.
जर्मनी में 23 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद पहली बार सैलून खोले गए हैं. लेकिन सैलूनों में कामकाज का तरीक़ा बदल गया है.
जर्मनी के आर्थिक और सामाजिक मामलों के मंत्रालय ने जो नया नियम जारी किया है, उसके मुताबिक़ सैलून में आने वाले ग्राहकों के बीच कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी होनी चाहिए. सैलून में बाल सूखाने के लिए मशीनों के इस्तेमाल पर भी रोक है.
नए नियमों के मुताबिक़ कस्टमर के बाल धोते समय (बैक्टीरिया हटाने के लिए) दस्ताने पहनने ज़रूरी हैं. हां, बाल काटते समय इन्हें उतारा जा सकता है.
और हां, अक्सर बाल काटते समय ग्राहकों की हेयरड्रेसर से जो दीन-दुनिया की चर्चा या गप्पें होती थीं, उस पर भी रोक लगा दी गई है. सैलून में आमने-सामने कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए. ग्राहक हेयर ड्रेसर से अपनी कटिंग और हेयर कलर के बारे में जो बात करेंगे वे शीशे में देखते हुए ही होनी चाहिए. बातचीत जितनी कम हो उतनी अच्छी.
मंत्रालय ने कहा है कि सैलूनों में हेयर कटिंग को लेकर जो नियम बनाए गए हैं वे बेहद ज़रूरी थे क्योंकि हेयर ड्रेसर और ग्राहकों के बीच लगभग कोई दूरी नहीं होती. बैठे हुए ग्राहकों के बीच भी काफ़ी कम दूरी होती है.
डर पर बनाव-सिंगार भारी
बर्लिन के हरे-भरे ज़िले प्रेन्जलॉ बर्ग के एक सैलून मालिक रेनो हार्म्स से मैंने पूछा, "आज कल लोगों की हेयर स्टाइल आपको कैसी लग रही है." ठहाका लगाते हुए उन्होंने कहा, "बड़ी मज़ेदार. ज्यादातर लोगों ने तो अपने बाल ख़ुद ही काट रखे हैं. कुछ तो घरों में ख़ुद ही कलर करते रहे. आज तो मैं सिर्फ़ रिपेयर वर्क कर रहा हूं."
इन छह हफ्तों के दौरान हार्म्स के ज्यादातर ग्राहकों ने वाउचर ख़रीद रखे थे. इन वाउचर्स को बाद में भुनाया जा सकता है. आजकल स्थानीय दुकानों, कैफ़े और रेस्तराओं में इसी का इस्तेमाल हो रहा है. इससे हार्म्स अपनी पहली की कमाई के 50 फ़ीसदी तक हासिल कर ले रहे हैं. यह उनका धंधा चलाए रखने के लिए पर्याप्त है. लेकिन आज उन्हें अब तक लगभग मुफ्त ही काम करना पड़ा है. क्योंकि लोग अपने वाउचर भी तो भुना रहे हैं.
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नए नियमों की वजह से वह पहले की तुलना में आधे ग्राहकों के ही बाल काट सकते हैं. इसके साथ ही हर चीज़ को संक्रमित रहित करने की प्रक्रिया से गुज़ारना होता है. ग्राहकों के बीच दूरियां भी पर्याप्त होनी चाहिए. सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का कड़ाई से पालन करना होता है. कोई वेटिंग एरिया नहीं है. ज़ाहिर है ग्राहकों की संख्या तो घट ही गई है.
हालांकि धंधा मंदा नहीं पड़ा है. बर्लिन के ज्यादातर सैलूनों में ग्राहक भरे पड़े हैं. अप्वाइंटमेंट मिलना मुश्किल हो रहा है.
मार्च में लॉकडाउन लागू होने के पहले कुछ हफ्तों के दौरान कई ग्राहकों ने सैलून जाना बंद कर दिया था क्योंकि उन्हें संक्रमण का डर था.
रेनो को लगता है लोग अब भी घबरा रहे हैं. लेकिन उनके अंदर कुलबुलाहट भी हो रही है. वे सैलून आकर ही बाल कटाना चाहते हैं. मज़ाक़ में वह कहते हैं- बनाव-सिंगार डर पर भारी पड़ रहा है.
जर्मनी के आर्थिक और सामाजिक मामलों के मंत्रालय का कहना है कि रिटेल स्टोर्स की तुलना में सैलून में हेयर ड्रेसर और ग्राहकों के बीच की दूरी काफ़ी कम होती है. हेयर ड्रेसर को ग्राहकों के शरीर छूने पड़ते हैं.
इसलिए सैलूनों को अपने ग्राहकों के नाम दर्ज करने के लिए कहा गया है ताकि कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जा सके. ज़रूरत पड़ी तो संक्रमण का पता चलाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.
पूरे यूरोप में लॉकडाउन में छूट के तहत सबसे पहले हेयर सैलूनों को खोलने की इजाज़त दी गई. स्पेन में भी 4 मई को हेयरड्रेसिंग सैलून खुल गए थे. लेकिन अभी 30 फ़ीसदी ग्राहकों को ही आने की इजाज़त है. वह भी पहले से अप्वाइंटमेंट लेकर.
डेनमार्क में जब 17 अप्रैल को सैलून खोलने की इजाज़त का ऐलान किया गया तो इतने लोगों ने अप्वाइंटमेंट के लिए लॉग-इन किया कि इनका सबसे बड़ा ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम ही क्रैश हो गया.
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एक अख़बार के मुताबिक़ लॉकडाउन की वजह से बढ़े बालों के कटवाने के लिए लोगों में होड़ मची थी.
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि हेयर ड्रेसिंग सैलूनों के लिए जो नए नियम बनाए गए हैं उन्हें लागू करना क्या इतना आसान है? क्या ये बदले हुए नियम बाल काटने के तौर-तरीक़े भी बदल सकते हैं.
एलिसन बैड्रिक इंग्लैंड के बमिंघमशायर में हेयर ड्रेसिंग का काम करती हैं. वह घर-घर जाकर हेयर ड्रेसिंग करती हैं. लेकिन अपना काम शुरू करने के लिए उन्हें सरकार से और साफ़ दिशा-निर्देशों का इंतज़ार है. उन्हें लगता है उन्हें काम शुरू करने में थोड़ी देर लग सकती है.
वह कहती हैं कि ज्यादातर नियम तो ठीक लग रहे हैं. जैसे- कस्टमर के बाल काटने के वक़्त मास्क पहना जाए. लेकिन मास्क पहने ग्राहकों की कनपटियों या इससे ऊपर के बाल काटे जाएंगे तो मास्क की डोरी कटने की आशंका बनी रहेगी. जब तक चेहरे पर चिपकने वाला मास्क नहीं बनेगा तब तक इस तरह से बाल कैसे कटेंगे, मुझे नहीं मालूम.
जर्मनी में हेयरड्रेसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष ने टीवी न्यूज़ प्रोग्राम तेगेशाउ में कहा कि जब इस तरह की समस्या आए तो ग्राहक थोड़ी देर के लिए मास्क को चेहरे के ऊपर सरका ले.
कोरोनावायरस के हमले से पहले बाल कटाना भले ही सुकून भरा या झंझट का काम रहा हो लेकिन अब यह पहले जैसा अहसास नहीं रहने वाला.
सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की वजह से सैलून अब कम ग्राहकों को अपनी सर्विस दे पाएंगे. लंदन के सैलून ग्रुप ब्लू टीट का अनुमान है कि हेयर ड्रेसिंग सैलूनों को अब अपने आधे ग्राहकों से ही काम चलाना होगा. कंपनी अब अपने ग्राहकों को एक्सट्रा 15 मिनट देने की सोच रही है ताकि उनकी साफ़-सफ़ाई और अच्छी से की जा सके. दुकानें भी ज्यादा देर तक खुल सकती हैं और हेयर ड्रेसर दो शिफ़्टों में काम कर सकते हैं.
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
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अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.
End of मैं और मेरा परिवार
इस सैलून ग्रुप का फ़ोकस ग्राहकों के लिए लंबे वक़्त तक कारगर हेयर केयर मुहैया कराने पर है. इसे भरोसा है कि वह लोगों को आरामदेह हेड मसाज, शैंपू वॉश और ड्रिंक्स सर्विस देती रहेगी.
सरकार हेयर कटिंग-ड्रेसिंग सर्विस मुहैया कराने वालों के लिए आगे चल कर चाहे जो नियम लाए लेकिन इतना तय है कि इसका बोझ ग्राहकों के बटुओं पर पड़ेगा. हेयर ड्रेसिंग सर्विस का महंगा होना तय है.
ब्लू टीट का कहना है कि अब हर ग्राहक को ज्यादा समय देना होगा. ज़ाहिर है हमारी लागत तो बढ़ेगी ही. साथ ही पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट यानी PPE का भी इस्तेमाल करना होगा. हमारे लिए अपने ग्राहक और स्टाफ़ की सुरक्षा सबसे बड़ी चीज़ है.
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हेयरकटिंग के दौरान हेयर ड्रेसर के साथ गॉसिप का क्या होगा?
एलिसन बैड्रिक कहती हैं, "हेयरड्रेसर कटिंग और ड्रेसिंग के वक़्त ग्राहकों से गॉसिप करते हैं. वो हेयर ड्रेसर ही क्या, जो अपने ग्राहकों को यहां-वहां के क़िस्से न सुनाए और उसे आसपास की ख़बरें न दे."
बाल कटाने के दौरान सबसे शानदार चीज़ तो आपसी बातचीत ही होती है. देखना है अब आगे यह सब कैसे होता है.
जर्मनी में हेयर ड्रेसिंग के नए नियम
सैलून में आने के लिए पहले से अप्वाइंटमेंट लेना होगा ताकि वहां ग्राहक न जमा हों.
कटिंग के वक़्त ग्राहकों और हेयर ड्रेसर को डेढ़ मीटर की दूरी बना कर रखनी होगी.
ग्राहकों और हेयरड्रेसर के लिए फेस मास्क पहनना अनिवार्य है.
हेयर स्टाइल, कलर वग़ैरह के बारे में आमने-सामने कोई बातचीत नहीं होगी. ग्राहक और हेयर ड्रेसर शीशे में देख कर ही बात करेंगे.
अगर संभव हुआ तो ब्लो-ड्रायर मशीनें नहीं चलेंगी.
ताज़ी हवा का सर्कुलेशन होते रहना चाहिए. हर हेयर ड्रेस के लिए इसे 100 घन मीटर/ प्रति घंटा तय कर दिया गया है.
कैंची और दूसरे औज़ारों को डिसइनफ़ेक्ट किया जाना ज़रूरी है. हेयर ड्रेसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली कुर्सियों को भी डिसइनफ़ेक्ट करना ज़रूरी है.
हेयर ड्रेसिंग के दौरान ग्राहकों के लिए डिस्पोज़ेबल चोगे का इस्तेमाल करना होगा. यानी ऐसा चोगा, जिसे हर कटिंग के बाद नष्ट कर दिया जाए.
सैलून में घुसने से पहले ग्राहकों को हाथ धोना होगा.
भारत में कोरोनावायरस के मामले
यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.