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ब्रिटेन में कश्मीर पर भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक जीत?
ब्रिटेन में विपक्षी लेबर पार्टी के नवनियुक्त नेता कीर स्टर्मर ने अपनी पार्टी के रुख़ में अहम बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि वो कश्मीर या भारत के किसी भी संवैधानिक मसले में दख़ल नहीं देगें.
स्टर्मर ने गुरुवार को कहा, "भारत में कोई भी संवैधानिक मुद्दा भारतीय संसद के अंतर्गत आता है और कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है."
पार्टी के नए नेता कीर स्टर्मर ने कहा कि वो सुनिश्चित करेंगे कि उनके नेतृत्व में उपमहाद्वीप के इस विवाद (कश्मीर मसले) को लेबर "ब्रिटेन में हमारे लोगों को बाँटने" के लिए इस्तेमाल ना करें और उनके नेतृत्व में बनी लेबर सरकार, पहले की लेबर सरकारों की तरह भारत के साथ "ज़्यादा मज़बूत रिश्ते बनाएगी." साथ ही जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करेंगे.
उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी का भारत के साथ लंबा और बेहतरीन रिश्ता रहा है और मैं चाहता हूं कि ये जारी रहे.
57 साल के कीर स्टर्मर ने चार अप्रैल को जर्मी कोर्बिन की जगह ली है. जर्मी के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी की विचारधारा को धुर-वामपंथी माना जाता था.
लेबर पार्टी के स्टैंड को देखते हुए ब्रिटेन में बसा भारतीय समुदाय उसे ब्रिटिश पाकिस्तानी समुदाय की ओर झुका हुआ मानता था.
पिछले साल कुछ लेबर सांसद लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी शामिल हुए थे और लेबर कॉन्फ्रेंस के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव भी पास किया था, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोगों को "आत्मनिर्णय के अधिकार" देने की बात थी, साथ ही कश्मीर में "मानवाधिकारों के उल्लंघन" और "बड़े मानवीय संकट" की भी बात कही गई थी.
कहा जा रहा था कि कश्मीर पर लेबर पार्टी के रुख़ के बाद ख़ास तौर पर भारतीय मूल के हिंदू काफ़ी नाराज़ चल रहे थे. लेबर पार्टी के नेता के बदलाव के बाद लग रहा है कि इस नाराज़गी को दूर करने की कोशिश की जा रही है.
'हिंदूफोबिया नहीं होने दूंगा'
हालांकि कीर स्टर्मर ने ये भी कहा कि लेबर एक अंतरराष्ट्रीय पार्टी है और हर जगह मानवाधिकारों की सुरक्षा और उसे बढ़ावा देने के पक्ष में है. "मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में अन्याय के ख़िलाफ़ और मानवाधिकारियों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी है."
अब मैं ऐसी लेबर पार्टी का नेतृत्व करूंगा जो मानवाधिकारियों की बात करेगी और हिंदूफोबिया समेत सभी तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ होगी.
उन्होंने ये भरोसा भी दिया कि पार्टी के अंदर भेदभाव के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा. इसके लिए उन्होंने स्वतंत्र शिकायत प्रक्रिया स्थापित करने की भी बात कही.
कीर स्टर्मर ने हिंदू फोरम ब्रिटेन की अध्यक्ष से कहा कि वो उनकी ओर से लंबे वक़्त से उठाए जा रहे कास्ट लेजिस्लेशन के मुद्दे से वाकिफ़ हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा वक़्त में वो सरकार में ऐसे किसी विधेयक के बारे में नहीं जानते, लेकिन अगर अब भी ऐसे मामले हैं तो "आपकी चिंताओं को समझने के लिए हम तैयार हैं."
हिंदू फोरम ब्रिटेन के अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी
लेबर पार्टी के नेता चुने जाने के बाद कीर स्टर्मर ने ये बातें हिंदू फोरम ब्रिटेन की अध्यक्ष तृप्ति पटेल को चिट्ठी में लिखीं.
उन्होंने लिखा कि मैंने अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद अपने कार्यालय को आपसे संपर्क करने के लिए कहा ताकि लेबर पार्टी और हिंदू समुदाय के लोगों के बीच के महत्वपूर्ण रिश्ते को फिर से बनाया जाए.
स्टर्मर ने हिंदू समुदाय के महत्व का ज़िक्र करते हुए लिखा, "मैं हिंदूओं के उस अमूल्य योगदान के बारे में जानता हूं, जो उन्होंने हमारे समाज में किया है. इसमें अर्थव्यवस्था से लेकर कला और संस्कृति के साथ-साथ ख़ास तौर पर इस वक़्त हमारे एनएचएस में किया उनका योगदान शामिल है."
'भारत ने मुश्किल वक़्त में पैरासिटामोल दी'
लेबर नेता स्टर्मर ने कहा कि हाल के हफ़्तों में हमने देखा कि भारत और ब्रिटेन के बीच कितना अहम रिश्ता है. भारत ने मुश्किल वक़्त में बेहद ज़रूर पैरासिटामोल बेची.
उन्होंने, भारत के साथ मज़बूत व्यापारिक रिश्तों को बढ़ाने की भी पैरवी की और कहा कि वो लेबर पार्टी और भारतीयों के बीच एक नया रिश्ता शुरू करने के लिए भारतीय उच्चायुक्त से मिलना चाहते हैं.
इसके साथ ही कीर स्टर्मर ने लेबर फ्रेंड्स ऑफ इंडिया यानी एलएफआईएन की एक्जेक्युटिव टीम से भी मुलाक़ात की और भारत और भारतीय मूल के ब्रिटेन के लोगों के साथ रिश्ते बेहतर करने पर चर्चा की.
एलएफआईएन के मुताबिक़, स्टर्मर ने कहा कि वो उनके साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि वेस्टमिंस्टर और स्थानीय सरकार के निर्वाचित पदों पर भारती मूल के ज़्यादा लोगों को खड़े होने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके.
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