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कोरोना: महज़ तीन हफ़्ते की बच्ची जिसने इस महामारी के ख़िलाफ़ जंग जीती
स्कॉटलैंड की ट्रेसी मैग्वायर उस वक़्त को याद करती हैं जब उन्होंने डॉक्टर को अपने तीन हफ़्ते की बच्ची के नाक में कोरोना वायरस के परीक्षण के लिए स्वैब डालते देखा था.
वो कहती हैं कि यह देखना बहुत तकलीफ़देह था.
वो कहती हैं, "यह पहली बार था जब मैंने अपनी बच्ची के आंखों में आंसू देखे. मैंने उसे थाम रखा था. मैं रो रही थी. हम उस हालात में एक दूसरे को मानो सहारा दे रहे थे."
वक़्त से पहले जन्म लेने की वजह से बच्ची का वज़न सिर्फ़ डेढ़ किलो था. वो महज़ तीन हफ़्ते की थी जब कोरोना पॉज़िटिव पाई गई.
26 मार्च को उसका जन्म हुआ था. वो अपने समय से आठ हफ़्ते पहले ही इस दुनिया में आ गई थी. परिवार के लोगों की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई थी.
स्वस्थ्य महसूस करने के बावजूद ट्रेसी को कहा गया कि उन्हें प्री-एक्लेमप्सिया हो सकता है और उन्हें लंकाशायर के विशाव अस्पताल भेज दिया गया था.
जब पता चला कि उनकी बच्ची को कोरोना है
पहले कुछ हफ़्तों के बाद उनकी बच्ची में नहाते वक़्त थोड़े से लक्षण दिखाई दिए थे जो इतने मामूली थे कि उन्हें पहचान पाना मुश्किल था.
ट्रेसी ने बीबीसी रेडियो स्कॉटलैंड के प्रोग्राम मॉर्निंग्स विद केई एडम्स में कहा कि उनकी बच्ची देश की सबसे कम उम्र की कोरोना मरीज़ बन चुकी है, यह ख़बर दर्दनाक था.
ट्रेसी ने बताया, "उन्होंने (डॉक्टर्स) मुझसे कहा कि मेरी बच्ची ठीक है. घबराने की ज़रूरत नहीं है लेकिन यह कोरोना पॉज़िटिव पाई गई है. वो मुझे सांत्वना देने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन मैं सुबक रही थी. "
"वो इतनी स्वस्थ्य दिख रही थी, मैं सोच रही थी कि उसे कैसे और कब वायरस का संक्रमण हो गया? वो इतनी छोटी सी है कैसे इसका मुक़ाबला करेगी? मुझे कुछ सूझ रहा था."
पेटॉन (बच्ची का नाम) को फेफड़े को मज़बूत करने के लिए स्टेरॉयड दिया गया था. नर्सों ने उसकी ख़ूब अच्छे से देखभाल की.
हालांकि ऑपरेशन के बाद ट्रेसी को बताया गया था कि उन्हें घर जाना होगा और 14 दिनों तक बच्ची से अलग रहना होगा.
ट्रेसी बताती हैं, "मैंने फ़ोन पर डॉक्टर से गुज़ारिश की कि मैं अपनी बच्ची से दूर नहीं रहना चाहती. "
"कितना भी कोई उसकी देखभाल कर रहा था लेकिन मैं उसकी मां हूँ. अगर उसे जुकाम भी हुआ रहता तो मैं वहाँ उसके साथ रहना चाहती."
डॉक्टर्स ने भरोसा जताते हुए ट्रेसी को रहने की इजाज़त दे दी. लेकिन उनके पति एंड्रिआन को घर वापस लौट कर आइसोलेशन पीरियड पूरा करने को कहा गया.
जैसे-जैसे दिन गुज़रते गए स्कॉटलैंड में मरने वालों की संख्या बढ़ती गई और लेकिन वहीं पेटॉन ठीक होती गई.
ट्रेसी का कहना है कि एंड्रिआन के नज़रिए से मैं देखूँ तो मैं सोचती हूँ कि वो अपने अपने आप को असहाय समझ रहा था. एक तो उसकी बच्ची समय से पहले आ गई और दूसरी यह कि उसकी बीवी भी ठीक नहीं है और वो दोनों के पास रह भी नहीं सकता था.
डॉक्टर्स और नर्स पर भरोसा रखिए
ट्रेसी अपनी बच्ची के साथ घर लौट गई हैं. वो और उनका परिवार डॉक्टर्स और नर्स की तारीफ़ करते हैं.
ट्रेसी बताती हैं, "वो वाक़ई में अविश्वसनीय काम कर रहे हैं. वो तमाम एहतियात बरतते हुए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं. उन्होंने तमाम जोखिम उठाकर यह सुनिश्चित किया कि मेरी बच्ची भूखी ना रहे.
"आप कभी नहीं समझ पाएँगे कि कैसे उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करें. पेटॉन (उनकी बच्ची) मेरे लिए दुनिया की सबसे अनमोल तोहफ़ा है और मैंने उसकी देखभाल के लिए उन पर भरोसा किया. किसी भी मां के लिए यह बहुत परेशानी का सबब है लेकिन नर्सों पर भरोसा रखिए."
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