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कोराना: जल्द टीका बनाने के लिए ब्रितानी सरकार ने बनाया टास्कफोर्स
ब्रिटेन के व्यापार सचिव आलोक शर्मा ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि कोरोना को फैलने से रोकने के लिए सरकार सही दिशा में सही कदम उठा रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार कोरोना से निपटने के लिए एक तरफ लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग के नियम लागू करने के लिए कह रही है और दूसरी तरफ इसके लिए जल्द से जल्द टीका बनाने की कोशिश में लगी है. सरकार ने इसके लिए एक ख़ास टास्कफोर्स का गठन भी किया है.
कोरोना पर होने वाली रोज़ाना के संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कोरोना के कारण देश में 14,576 मौतें होने की पुष्टि की और मृतकों के लिए प्रार्थना की.
उन्होंने कहा कि "देश की स्वास्थ्य एजेंसी एनएचएस को बचाने के लिए ये ज़रूरी है कि अभी तीन सप्ताह के लिए लॉकडाउन का कड़ाई से पालन किया जाए."
उन्होंने कहा कि "संक्रमण रोकने के लिए सरकार को लगातार कोशिशें करनी होंगी" और "सबसे बुरा तब होगा जब हम लॉकडाउन को समय से पहले ही खोल देंगे. इससे वायरस के दोबारा पैर पासारने की संभावना बनेगी और ये न तो ब्रितानी नागरिकों के लिए अच्छा होगा न ही एनएचएस के लिए."
संवाददाता सम्मेलन में शर्मा के साथ उनके साथ देश के मुख्य विज्ञान सलाहकार सर पैट्रिक वैलेन्स और पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की निदेशक प्रोफ़ेसल येवोन डोएल भी मौजूद थे.
सर पैट्रिक वैलेन्स ने कहा कि अस्पतालों में कोरोना संक्रमण के मामलों में बीते दिनों एक तरह की स्थिरता आ गई है और वो उम्मीद करते हैं कि "इसके बाद संक्रमण के मामलों में गिरावट देखी जाएगी."
उन्होंने कहा कि आंकड़े कम ज़रूर हो रहे हैं लेकिन हमें सोशल डिस्टेंसिंग कि नियमों का पालन करते रहना होगा.
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि सोशल डिस्टेसिंग के नियमों का पालन करने से संक्रमण के मामलों में और कमी आएगी. लेकिन मौतों का आंकड़ा कम होने में अभी वक्त लग सकता है."
लॉकडाउन में भी कुछ काम करने की रहेगी इजाज़त
आलोक शर्मा ने कहा कि कोरोना के ख़तरे के कारण लोगों के काम करने के तरीकों में भी अब बदलाव करने का वक्त आ गया है.
उन्होंने कहा कि "सरकार का रुख़ इस पर स्पष्ट है कि लोगों को घरों में ही रहना चाहिए लेकिन उत्पादन और कंस्ट्रक्शन के काम में लगे कुछ कर्मचारियों को काम पर जाने की इजाज़त है. लेकिन उन कंपनियों को इसके लिए तैयारी करनी होगी और सोशल डिस्टेसिंग के सभी नियमों का पालन करना होगा."
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड की निदेशक प्रोफ़ेसल येवोन डोएल कहती हैं कि "कोरोना के ख़िलाफ़ जंग में स्वास्थ्यकर्मी की सेहत बेहद महत्वपूर्ण है और उन्हें बीमार होने की सूरत में कतई काम नहीं करना चाहिए. इससे उनके आसपास के लोगों के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है."
उन्होंने कहा कि "पहले देश में संक्रमण के जो मामले आए थे वो विदेश यात्रा से जुड़े थे लेकिन अब इसके बादग पैटर्न बदला है. अब वो लोग भी संक्रमित हो रहे हैं जो हाल में विदेश नहीं गए. अब ये वायरस तेज़ी से घनी आबादी वाले इलाकों में फैल रहा है."
वो कहती हैं कि "सरकार की पैनी नज़र कोरोना हॉटस्पॉट्स पर है और इन जगहों पर सरकार अधिक निगरानी रख रही है."
जल्द से जल्द टीका बनाने की कोशिश
आलोक शर्मा ने कहा कि कोरोना से जंग जीतने की उम्मीद जल्द से जल्द टीके की खोज पर निर्भर करती है. उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार ने 'कोरोना टीका टास्कफोर्स' बनाय है जो देश में टीके पर शोध और जल्द से जल्द इसके उत्पादन के लिए काम करेगी.
इसमें मुख्य विज्ञान सलाहकार सर पैट्रिक वैलेन्स और डिप्टी चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर प्रोफ़ेसर जॉनथन वॉन डैम समेत सरकार, दवा उत्पादन क्षेत्र से जुड़े लोग और जानकार शामिल होंगे. ये टास्कफोर्स टीके का ट्रायल जल्द कराने पर ध्यान देगी.
साथ ही शर्मा ने कहा कि सरकार ने इसके लिए 1.4 करोड़ पाउंड के खर्च पर 21 परियोजनाओं को हरी झंडी दी है. इससे पहले सरकार कोरोना वायरस के टीके के लिए 25 करोड़ पाउंड लगा रही है.
शर्मा ने कहा कि "टीका बनाने की एक जटिल प्रक्रिया होती है और इसमें कई महीनों का वक्त भी लग सकता है. सरकार को उम्मीद है कि जल्द की इसमें सफलता मिलेगी और हम लाखों की संख्या में टीकों का उत्पादन कर पाएंगे."
बीबीसी के स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता जेम्स गैलाघर कहते हैं कि ऐसा लगता है कि फिलहाल लॉकडाउन से बाहर निकलने के लिए हमें टीके का इंतज़ार करना पड़ेगा. लेकिन ये एक मुश्किल प्रक्रिया है जिसमें सालों और कभी-कभी दशकों लग जाते हैं. और अगर टीका बन भी गया तो पहले इसकी टेस्टिंग, फिर बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन और फिर एक तय समय के भीतर लोगों तक टीका पहुंचाने का काम अपने आप में बड़ी चुनौती है.
गैलाघर बताते हैं कि ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम का कहना है कि वो अगले सप्ताह में को कोराना वायरस के एक टीके का मानव परीक्षण शुरु कर सकते हैं और सब कुछ सही रहा तो इसी साल के सितंबर तक टीका इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएगा.
ऑक्सफोर्ड की टीम ने चिम्पांजी से मिले वायरस के नमूने को जेनेटिक इंजीनियरिंग से नुकसान न पहुंचाने वाला बना दिया है. इसके साथ उन्होंने कम समय में ही कोरोनोवायरस के जेनेटिक कोड भी जोड़ दिए हैं.
हालांकि यह टीका कारगर साबित होगा या नहीं अभी इस पर निश्चित तौर पर कुछ कहना संभव नहीं है.
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