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कोरोना वायरस के बीच भी दक्षिण कोरिया में हो रहा है चुनाव
- Author, रेहान फ़ज़ल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
शुक्रवार को जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन वोट डालने पहुंचे तो वो मास्क लगाए हुए थे. उन्हें तब तक वोट डालने नहीं दिया गया, जब तक उनका तापमान नहीं ले लिया गया. वोट डालने से पहले उन्होंने अपने हाथ धोए और फिर प्लास्टिक के दस्ताने पहने.
दक्षिण कोरिया दुनिया का पहला देश है जहाँ कोरोना वायरस के फैलने के बाद संसदीय चुनाव करवाए जा रहे हैं. जैसे ही लोग वोट डालने पहुंचते हैं उनका तापमान लिया जाता है. अगर उनका तापमान 99.5 डिग्री से अधिक निकलता है तो दूसरे स्थान पर वोट डालने के लिए ले जाया जाता है. उसका कोरोना का टेस्ट करवाया जाता है और मतदान केंद्र को डिसइंफ़ेक्ट यानि कीटाणुरहित कर दिया जाता है.
दक्षिण कोरिया में वैसे तो चुनाव 15 अप्रैल को होने हैं लेकिन वहाँ 2013 से पहले से वोट डालने की परंपरा शुरू की गई है ताकि उन लोगों को वोट डालने का मौक़ा मिल सके जो किन्हीं कारणों से मतदान के दिन वोट नहीं डाल पाएंगे. इसके लिए ख़ासतौर से 3500 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. कुछ विश्लेषकों की राय थी कि इस बार कोरोना की वजह से मतदान का प्रतिशत गिरेगा. लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा ही है. कुल वैध मतदाताओं में से 26.7 फ़ीसदी मतदान कर चुके हैं जो कि 2016 में हुए चुनाव से दोगुने से भी अधिक है. तब के चुनाव में शुरुआती मतदान में सिर्फ़ 12.2 फ़ीसदी लोगों ने भाग लिया था.
कोरोना वायरस ने दुनिया भर के राजनीतिक केलेंडर को अस्त-वयस्त कर दिया है. लेकिन दक्षिण कोरिया ने पहले से एहतियात बरदते लेते हुए अपने चुनाव करवाने का फ़ैसला किया है. लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध होने के बावजूद दक्षिण कोरिया की सरकार ने अपने 4 करोड़ 40 लाख मतदाताओं को आश्वस्त किया है कि उनके लिए वोट डालने के लिए घर से बाहर निकलना पूरी तरह से सुरक्षित है.
चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए दक्षिण कोरिया ने सरकारी कर्मचारियों के अलावा युवकों की भी सेवाएं ली हैं. उनको चुनाव ड्यूटी करने के एवज़ में अनिवार्य सैनिक सेवा करने से छूट दी गई है. इन युवकों ने देश भर में फैले 14000 मतदान केंद्रों को रोगाणुमुक्त किया है. वो ये भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि मतदाता एक दूसरे से कम से कम तीन फ़िट की दूरी पर खड़े हों.
इस बीमारी से राष्ट्रपति मून की सरकार को जिस तरह का राजनीतिक फ़ायदा मिला है, उसकी किसी को पहले उम्मीद नहीं थी. हाल के दिनों में कोरोना को नियंत्रण में लाने के लिए हर जगह उनकी वाहवाही हुई है और उनकी अप्रूवल रेटिंग में ज़बरदस्त उछाल आया है और वो 41 फ़ीसदी से बढ़ कर 56 फ़ीसदी हो गई है.
कोरोना से पहले उनकी सरकार की धीमी होती अर्थव्यवस्था के कारण हर जगह आलोचना हो रही थी और हर जगह सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे थे. लेकिन इस महामारी की वजह से राष्ट्रपति मून के ख़िलाफ़ सभी राजनीतिक शिकायतें दरकिनार हो गई हैं.
संक्रमण पर क़ाबू पाने की उपलब्धि
इस सप्ताह दक्षिण कोरिया में कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन 50 से नीचे चली गई है. फ़रवरी 29 को ये संख्या 813 मरीज़ प्रतिदिन थी. अब तक दक्षिण कोरिया में कोरोना के 10400 केसों की पुष्टि हुई है जिसमें 70 फ़ीसदी मरीज़ ठीक हो कर घर वापस भी जा चुके हैं. इस सफलता का श्रेय बहुत अधिक संख्या में लोगों का परीक्षण करने और संदिग्ध लोगों को अलग-थलग करने के लिए दिया जा रहा है.
दक्षिण कोरिया ने पहले से ही राजनीतिक रैलियों और धार्मिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. वहाँ के स्कूल और कॉलेज खोल दिए गए हैं लेकिन वहाँ ऑनलाइन पढ़ाई ही हो रही है. दक्षिण कोरिया दुनिया के उन देशों में से है जिसने बिना लॉकडाउन के कोरोना के फैलाव पर नियंत्रण पाया है. राजधानी सोल में मेट्रो सेवाएं पहले की तरह चल रही है. लोगों की भीड़ भी पहले की तरह ही है, लेकिन सभी लोग मास्क और दस्ताने पहने हुए हैं.
दक्षिण कोरियाई सरकार का लोगों को वोट देने के लिए घर से बाहर आने के लिए कहना बताता है कि वो हालात को जितना संभव हो सामान्य करने की कोशिश कर रही है लेकिन वो ये भी मान रही है कि कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है. दिलचस्प बात ये है कि इस चुनाव में कोरोना से पीड़ित लोगों के मतदान का भी ध्यान रखा गया है. उन्हें 23 से 28 मार्च के बीच डाक से मतदान करने का विकल्प दिया गया था. जब ये समय समाप्त हो गया तो आठ जगहों पर इन लोगों के लिए ख़ास मतदान केंद्र बनाए गए जहाँ चुनाव कार्यकर्ताओं ने प्रोटेक्टिव सूट पहन कर मतदान करवाया है.
दक्षिण कोरिया के चुनाव भारत की तरह बहुत शोरगुल वाले होते हैं. राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए संगीत और नाच का सहारा लेते हैं. सड़कों पर हर जगह लाउड स्पीकरों और पोस्टरों से सजी गाड़ियाँ दिखाई पड़ती हैं. लेकिन इस चुनाव में प्रचार में वो तेज़ी देखने में नहीं आई है. उम्मीदवारों को सलाह दी गई थी कि वो हर समय मास्क पहनें और हाथ मिलाने से परहेज़ करें.
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