कोरोना वायरस से मौत पर श्रीलंका में मुस्लिम व्यक्ति के शव जलाने पर विवाद

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- Author, सुनेथा परेरा
- पदनाम, बीबीसी सिंघला
महामारी बन चुका कोविड 19 हर रोज़ सैकड़ों की संख्या में लोगों की जान ले रहा है. एक ओर जहां हर रोज़ संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं वहीं कोविड 19 से मरने वालों का अंतिम संस्कार एक चुनौती बनता जा रहा है.
लेकिन ये समस्या किसी एक देश की नहीं है. इस समस्या से दुनिया के कई देश जूझ रहे हैं. वो चाहे श्रीलंका हो या इटली.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड 19 को महामारी घोषित किया है. ऐसे में अगर कोई संक्रमित शख़्स अस्पताल में भर्ती है तो अस्पताल में रहने तक वो अपने किसी रिश्तेदार या परिचित से नहीं मिल सकता.
कई मामले तो ऐसे भी सामने आए हैं जिसमें अस्पताल में ही संक्रमित शख़्स की मौत हो गई और ना तो उसके रिश्तेदार उसे आख़िरी बार देख पाए और ना मरीज़ ही अंतिम समय में अपनों को देख सका. ऐसे में ये उन रिश्तेदारों के लिए किसी सदमे से कम नहीं होता है कि वो अपने पारिवारिक सदस्य के अंतिम संस्कार में शामिल भी नहीं हो सके.

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कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत के बाद शव को दफनाया जाए या जलाया जाए पर विवाद है. अब तक मौत के बाद शव को जलाने या दफनाने की प्रक्रिया धर्म के आधार पर होती थी. श्रीलंका में कोरोना वायरस से मौत के बाद एक मुस्लिम व्यक्ति के शव की अंत्येष्टि पर विवाद हुआ है.
श्रीलंका में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण के 159 मामले सामने आ चुके हैं. देश में कोविड 19 की वजह से कम से कम पांच लोगों की मौत हो चुकी है.
श्रीलंका के पश्चिमी तट के पास स्थित नेगोम्बो शहर में एक शख़्स का अंतिम संस्कार इस्लामी रीति-रिवाजों से हटकर किया गया.
श्रीलंका के मुस्लिम कांग्रेस नेता रउफ़ हक़ीम ने इस संबंध में फ़ेसबुक पर एक पोस्ट भी लिखी.
उन्होंने लिखा कि यह बेहद खेद का विषय है कि उस व्यक्ति के अंतिम संस्कार के लिए उसकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप दफनाने की अनुमति नहीं मिली.
31 मार्च को रउफ़ ने ये पोस्ट अपने फ़ेसबुक वॉल पर लिखी.
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उन्होंने लिखा, ''यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, खेदजनक और निंदनीय है कि कोविड 19 की वजह से नेगोम्बो में जिस शख़्स की मौत हुई उसके जनाज़े को दफ़नाने की अनुमति नहीं मिली. हमारी मान्यताओं के उलट अंत्येष्टि की गई. अपनी ओर से जो कुछ हो सकता था वो हमने करने की कोशिश भी की ताकि जल्दबाजी में हुए इस अंतिम संस्कार को रोका जा सके. इसके लिए हमने उच्च स्तरीय राजनीतिक हस्तियों और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों की भी मदद ली. हम अंतिम समय तक अधिकारियों को समझाने की कोशिश करते रहे. हालांकि नेगोंबो में दफ़नाने के विकल्प को भी देखा गया था लेकिन हमें बताया गया कि अगर ज़मीन में दस फ़ीट गहराई में जनाज़े को दफ़नाये की कोशिश की जाती है तो यह संभव नहीं हो पाएगा क्योंकि पानी का स्तर काफी ऊपर है और संभव है कि सीपेज का पानी क़ब्र में चला जाए.''
वो आगे लिखते हैं कि इसके बाद कोलंबो के मालीगावते क़ब्रगाह में दफ़नाने के बारे में सोचा जा रहा था लेकिन जनाज़ा ले जाने के अनुरोध को जेएमओ ने ख़ारिज कर दिया.
रउफ़ ने अपनी पोस्ट में अंतिम संस्कार में हड़बड़ी करने और परिवार के सदस्यों की भावनाओं की अवहेलना करने का आरोप लगया है. रउफ़ की इस पोस्ट पर अधिकांश लोगों ने अपनी आपत्ति जताई है. लोगों ने कॉमेंट किया है कि धार्मिक भावनाओं से उस वक़्त किनारा कर लेना चाहिए जब बात लोगों की सुरक्षा की हो.

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कुछ लोगों का ये भी कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को सिर्फ़ मुस्लिमों के अंतिम संस्कार के तरीक़े को बदलकर फैलने से नहीं रोका जा सकता है. इसके लिए ज़रूरी है कि सभी तरह के धार्मिक आयोजनों, प्रसाद बाँटने की प्रक्रिया और जल छिड़कने और तमाम अनुष्ठानों को बंद कर देना चाहिए.
कोरोना वायरस के संक्रमण से दुनिया के अधिकतर देश जूझ रहे हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने का सबसे कारगर तरीक़ा है कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें. साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ज़्यादा से ज्यादा टेस्ट करने का भी सुझाव दिया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस संक्रमण से मरे लोगों के पार्थिव शरीर को किस तरह से संभालना है उसे लेकर भी गाइडलाइन्स जारी की है.

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शव को लेकर गाइडलाइंस
- मुर्दाघर के कर्मचारी या फिर स्वास्थ्यकर्मी ही मरने के बाद मृत शरीर को संभालेंगे.
- शव पर केमिकल लगाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती क्योंकि मृत शरीर के साथ संपर्क से बचना अनिवार्य है.

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शवों की अंत्येष्टि कैसे हो?
- इस बात को पूरी तरह से सुनिश्चित कर लें कि किसी प्रांत या देश में शव को ले जाने और उसे अंतिम संस्कार के लिए तैयार करने के लिए जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन हुआ है.
- शव को छूने और चूमने से बचना चाहिए.
- जो लोग शव को दफ़ना रहे हैं या जला रहे हैं उन्हें दस्ताने में होना चाहिए. अंत्येष्टि पूरी हो जाने के बाद ख़ुद को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ़ करना चाहिए. ख़ासतौर पर हाथों को.
श्रीलंका में एपिडेमिओलॉजी यूनिट (महामारी विज्ञान इकाई) ने कोविड 19 से संक्रमित व्यक्तियों की मौत पर अंत्येष्टि की व्यवस्था को अंजाम देने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
- गाइडलाइन्स के मुताबिक़ शवों को जलाया जाए.
- पोस्टमॉर्टम नहीं किया जाएगा.
- शव को ले जाने और तैयार करने के दौरान कोई अनुष्ठान का पालन नहीं होगा.
- शव को सील्ड बैग में ही रखा जाना चाहिए.
- एक बार शव को सील कर दिए जाने के बाद दोबारा उसे देखने की अनुमति नहीं होगी.
- सील किए जाने के बाद शव को कॉफ़िन में रखा जाएगा और उसके बाद ही उसे उठाया जा सकेगा.
- शव की अंत्येष्टि के लिए अधिकतम 24 घंटे का समय लिया जा सकता है. हालांकि बेहतर होगा कि यह 12 घंटे में ही कर दिया जाए.
हालांकि श्रीलंका के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अनिल जसिंघे ने पत्रकारों को बताया कि श्रीलंका विश्व स्वास्थ संगठन के दिशा निर्देशों को मानने के लिए बाध्य नहीं है. उन्होंने कहा, स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को यह तय करना चाहिए कि श्रीलंका क्या क़दम उठाए.

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