कोरोना वायरस: भारत-नेपाल सीमा पर फंसे लोगों को मदद की आस

    • Author, कमल परियार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नेपाली सेवा

अधिकारियों ने कहा है कि भारत के उत्तराखंड से सटे नेपाल के दारचूला में फंसे नेपालियों को फ़िलहाल देश में प्रवेश नहीं मिलेगा.

नेपाल सरकार से स्पष्ट किया है कि जब तक लॉकडाउन का वक़्त पूरा नहीं हो जाता वो किसी को भी नेपाल में प्रवेश करने की इजाज़त नहीं देंगे.

दारचूला ज़िले के मुख्य ज़िलाधिकारी यदुनाथ पोडेल ने कहा है, "हम सीमाएं खोल कर किसी को इधर आने नहीं दे सकते. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए ये ज़रूरी है."

अब तक मिली जानकारी के अनुसार दारचूला से सटी भारत की सीमा की तरफ क़रीब 500 नेपाली नागरिक अपने गांव जाने के लिए एकत्र हुए हैं.

ये लोग "सीमा के गेट खोलिए" और "हमें देश में आने दीजिए" जैसे नारे लगा रहे हैं. नेपाल में इन लोगों के वीडिया क्लिप और तस्वीरें वायरल हो रही हैं.

भारत में बतौर छात्र पढ़ाई कर रहे और मज़दूर के रूप में काम कर रहे नेपाली नागरिकों ने भी नेपाल सरकार से गुज़ारिश की है कि वो उन्हें बचाएं और नेपाल में उनके घरों तक पहुंचा दें.

चूंकि दोनों पड़ोसी मुल्कों में लॉकडाउन अचानक ही लागू कर दिया गया ऐसे में उनके पास अपने घरों में जाने या कई सप्ताह तक खाने की व्यवस्था करने का समय नहीं था

भारत में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से 21 दिनों का संपूर्ण लॉकडाउन किया गया है. वहीं नेपाल ने भी कोरोना संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि के बाद 24 मार्च से पूरे देश को एक सप्ताह के लिए लॉकडाउन कर दिया.

बाद में नेपाल सरकार ने लॉकडाउन को एक और सप्ताह के लिए बढ़ा दिया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अब तक नेपाल में कोरोना संक्रमण के कुल पांच मामले आए हैं और यहां कोरोना के कारण किसी की मौत नहीं हुई है.

पंजाब के एक कॉलेज में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कर रहे छात्र चंद्रशेखर चौरसिया कहते हैं, "चावल, आटा, दाल और सब्ज़ी- सब ख़त्म हो चुका है और मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि अब मैं अधिक दाम देकर खाना ख़रीद सकूं."

चंद्रशेखर कहते हैं, अकेले उनके विश्वविद्यालय में लगभग 200 नेपाली छात्र हैं और उनमें से अधिकांश अपने घर वापस जाना चाहते हैं.

वहीं झापा में रहने वाले एक अन्य छात्र रोहित थापा कहते हैं, "मैंने लॉकडाउन से पहले खाने का कुछ सामान और सब्ज़ियां ख़रीद ली थीं, लेकिन अब वो भी ख़त्म हो रहा है. हम बाहर से और सामान नहीं ला सकते क्योंकि पुलिस हमें बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रही है. यहां वाकई में मुश्किल हो रही है. हमें घर वापस जाना है और हमें मदद की ज़रूरत है."

भारत में मौजूद नेपाल के दूतावास ने यहां फंसे अपने नागरिकों के लिए एक मोबाइल नंबर जारी किया (+91 892 960 1925) और कहा है कि अगर भारत में फंसे किसी नेपाली को दवा या खाने की आवश्यकता है, तो उन्हें सीधे दूतावास से संपर्क करना चाहिए.

हालांकि नेपाली छात्रों का कहना है कि "अफ़सोस की बात है कि फ़ोन करने पर कोई फ़ोन नहीं उठाता."

दिल्ली में मौजूद नेपाल दूतावास में कन्सुलर हरि प्रसाद ओडारी कहते हैं, "लॉकडाउन के दौरान किसी को भी यात्रा करने की अनुमति नहीं है, इसलिए लोगों को वहीं रहना चाहिए जहाँ वो हैं. दूतावास उनके रहने और खाने की व्यवस्था करने में उनकी मदद करेगा."

वो कहते हैं, "भारत भर से नेपाली लोग हमें फ़ोन कर रहे हैं और सोशल मीडिया में भी हमसे अनुरोध किया जा रहा है कि लोगों को नेपाल पहुंचाने में हम उनकरी मदद करें, लेकिन हम इस समय उस संबंध में उनकी मदद नहीं कर सकते."

दूतावास ने कहा है कि उन्हें दिल्ली, मुंबई, पुणे, पंजाब, बेंगलुरु, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, कुल्लू-मनाली समेत कई जगहों से फ़ोन आ रहे हैं.

ओडारी कहते हैं, "अगर कोई नेपाली हमसे संपर्क करता है तो हम भारतीय केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर लोगों की पूरी मदद करेंगे."

वो कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण जिन लोगों की नौकरियां चली गई हैं और जो लोग फंसे हुए हैं उनके बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए दूतावास के अधिकारी भारत सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं.

दिल्ली के आसपास रहने वाले कई इलाक़ों में लोग मदद की उम्मीद लिए दिल्ली आ गए हैं.

कोरोना को फैलने से रोकने के लिए भारत और चीन के साथ नेपाल की सभी सीमाओं को सील कर दिया गया है. इसके बाद से नेपाल के कई नागरिक भारतीय सीमा के आपसापस इकट्ठा हो गए हैं.

लॉकडाउन की शुरुआत में नेपाल सरकार ने कुछ लोगों के लिए सीमा चौकियां खोली थीं, लेकिन अब इसे लेकर कड़ा रुख़ अपनाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि अब किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.

ऐसी ख़बरें भी मिल रही हैं कि चीन के साथ सटी नेपाल की सीमा के पास भी सैकड़ों नेपाली देश में आने का इंतज़ार कर रहे हैं.

इन लोगों में कई ऐसे भी हैं जो अपनी जान दांव पर लगाकर तारों की बाड़ पार करने और तैरकर नदी के रास्ता सीमा पार करने की कोशिश कर रहे हैं.

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