अफ़ग़ानिस्तान: काबुल में हुई गोलीबारी, 32 लोगों की मौत

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक कार्यक्रम में हुई गोलीबारी में कम से कम 32 लोग मारे गए हैं. इस कार्यक्रम में अफ़ग़ान नेता अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह भी शामिल थे.

अफ़ग़ानिस्तान में प्रमुख विपक्षी नेता और चीफ़ एग्जिक्यूटिव अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह इस हमले में बाल-बाल बचे लेकिन कई दूसरे लोग घायल हो गए. कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट समूह ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है.

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब हाल में अमरीका और तालिबान के बीच एक अहम शांति समझौता हुआ है. इस समझौते के बाद अफ़ग़ानिस्तान में हुआ यह सबसे बड़ा हमला है. हालांकि इस शांति समझौते में इस्लामिक स्टेट शामिल नहीं है.

हज़ारा नेता अब्दुल अली मज़ारी की 25वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम को दौरान यह हमला किया गया. मज़ारी की मौत तालिबान के हमले में हुई थी. टेलीविज़न पर इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया जा रहा था.

पुलिस का कहना है कि कार्यक्रम स्थल के नज़दीक ही एक निर्माणाधीन इमारत से हमला किया गया.

सरकारी अधिकारी ने बताया है कि इस हमले में लगभग 60 लोग घायल हुए हैं. हमले की ख़बर मिलते ही सुरक्षाबल घटनास्थल पर पहुंच गए. गृह मंत्री के अनुसार दो हमलावरों को मार दिया गया है.

अफ़ग़ानिस्तान में शांति कायम करने के मकसद से बीते शनिवार अमरीका और तालिबान के बीच समझौता हुआ था.

इस समझौते के तहत अमरीका और उसके नाटो सहयोगी देश 14 महीनों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन पर मौजूद अपनी फौजों को वापस बुला लेंगे, वहीं तालिबान अफ़ग़ान सरकार के साथ बातचीत जारी करेगा.

इसके साथ ही चरमपंथी इस बात पर भी सहमत हुए कि वो अपने नियंत्रण वाले इलाकों में अल-क़ायदा या किसी दूसरे चरमंपथी समूह को काम नहीं करने देंगे.

अमरीका ने साल 2001 में न्यूयॉर्क हमले के बाद अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान शुरू कर दिया था. 2001 के हमले को अफ़ग़ानिस्तान स्थित अल-क़ायदा समूह ने अंजाम दिया था.

अफ़ग़ानिस्तान में चले संघर्ष के दौरान 2400 से अधिक अमरीकी सैनिक मारे गए. अभी भी करीब 12 हज़ार अमरीकी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद हैं.

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