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ट्रंप महाभियोग मामला: 100 सांसदों ने निष्पक्ष रहने की शपथ ली
अमरीका के 100 सांसदों ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर चल रहे महाभियोग के मुक़दमे में जज के तौर पर न्याय करने की शपथ ली.
अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने सांसदों को 'निष्पक्ष रूप से न्याय करने' की शपथ दिलाई.
चीफ़ जस्टिस रॉबर्ट्स ने सांसदों से पूछा, "क्या आप प्रतिज्ञा करते हैं कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड जॉन ट्रंप के ख़िलाफ़ चल रहे महाभियोग के मुक़दमे में संविधान और क़ानून के मुताबिक़ निष्पक्ष रूप से न्याय करेंगे?"
सांसदों ने जॉन रॉबर्ट्स को "हां'' में जवाब दिया और इसके बाद सभी ने शपथ ली.
अमरीकी संसद के निचले सदन 'हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स' में पिछले साल 18 दिसंबर को ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने को मंज़ूरी दी गई थी.
आने वाले हफ़्तों में ये सांसद तय करेंगे कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को 'हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स' के लगाए आरोपों के बाद उनके पद से हाटाया जाना चाहिए या नहीं. मुक़दमा शुरू होने की तारीख़ 21 जनवरी तय हुई है.
एक दिन पहले क्या हुआ था?
ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की कार्यवाही अब संसद के उच्च सदन सीनेट में चलेगी. 'हाउस ऑफ़ रिप्रजेंटेटिव्स' में इसके मद्देनज़र बुधवार को वोटिंग हुई.
महाभियोग मुक़दमे को सीनेट में भेजने के प्रस्ताव के पक्ष में 228 वोट पड़े, जबकि 193 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किया था.
हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैन्सी पलोसी ने इसे 'ऐतिहासिक' बताया था.
ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनज़र विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बिडेन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की जांच के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर ज़ेंलेंस्की पर दबाव डाला था.
डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों का आरोप है कि ट्रंप ने अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए यूक्रेन को दी जाने वाली 319 मिलियन डॉलर की सैन्य मदद रोक दी थी.
उन पर सत्ता के दुरुपयोग और संसद के काम में बाधा डालने का आरोप है और इसीलिए उन पर महाभियोग की कार्यवाही हो रही है. यूक्रेन इस मामले में एक अलग जांच भी कर रहा है.
ट्रंप शुरू से ही इन आरोपों से इनकार करते आए हैं. वो आरोपों को महज 'अफ़वाह' बताते आए हैं.
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'व्हाइट हाउस ने तोड़ा क़ानून'
इससे पहले गुरुवार को ही सरकारी पर्यवेक्षक (वॉचडॉग) ने कहा कि व्हाइट हाउस ने यूक्रेन की मदद रोककर क़ानून तोड़ा है.
गवर्नमेंट अकाउंटिबिलिटी ऑफ़िस (जीएओ) ने अपने फ़ैसले में कहा है कि राष्ट्रपति अपनी प्राथमिकता और नीतियों को संसद के बनाए क़ानून की जगह इस्तेमाल नहीं कर सकते. जीएओ के मुताबिक़ क़ानून इसकी इजाज़त नहीं देता.
फ़ैसले में कहा गया है, "व्हाइट हाउस के मैनेजमेंट और बजट ऑफ़िस (एबीएम) ने यूक्रेन को मिलने वाली राशि राष्ट्रपति की व्यक्तिगत नीति की वजह से रोका था. इंपाउंडमेंट कंट्रोल एक्ट (आईसीए) के तहत उन्हें इसकी इजाज़त नहीं है."
अमरीका के इंपाउंडमेंट कंट्रोल एक्ट, 1974 के अनुसार अगर संसद ने किसी आर्थिक मदद की राशि को मंज़ूरी दे दी है तो व्हाइट हाउस का उसे रोकना ग़ैरक़ानूनी है.
जीएओ के फ़ैसले में कहा गया है कि जैसे ही यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकी गई, क़ानून के मुताबिक़ व्हाइट हाउस को बिना देरी किए इसकी जानकारी संसद को देनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
आईसीए एक्ट के उल्लंघन पर किसी तरह की सज़ा का प्रावधान नहीं है. ट्रंप से पहले भी कई अमरीकी राष्ट्रपति आईसीए एक्ट के उल्लंघन मामले में दोषी पाए जा चुके हैं.
हालांकि क़ानून में ये प्रावधान ज़रूर है कि उल्लंघन पर जीएओ व्हाइट हाउस पर मुक़दमा चला सकता है. लेकिन इतिहास में ऐसा सिर्फ़ एक बार ऐसा हुआ है.
क्या कह रहे हैं ट्रंप और उनकी पार्टी
अमरीका ने यूक्रेन को सितंबर 2019 में आर्थिक मदद दी थी. इससे पहले दो महीने से ज़्यादा वक़्त के लिए यह मदद रोक दी गई थी.
एक तरफ़ जहां जीएओ ने व्हाइट हाउस के कदम को ग़ैरक़ानूनी बनाया है वहीं व्हाइट हाउस ने कहा है कि वो इस फ़ैसले से इत्तेफ़ाक नहीं रखता.
व्हाइट हाउस ने जीएओ पर 'मीडिया के पैदा किए विवाद में घुसने' का आरोप लगाया है.
विपक्षी डमोक्रैटिक पार्टी ने जीएओ के फ़ैसले का स्वागत किया है.
वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता एंथनी ज़कर के मुताबिक़ बहुत से लोग अब ये कह रहे हैं कि रिपब्लिकन पार्टी के सांसद यूक्रेन सरकार पर दबाव बनाने के तरीके ढूंढने को इतने आतुर थे कि वो इसके लिए क़ानून तोड़ने तक को तैयार थे.
अमरीका के इतिहास में ट्रंप ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिनके ख़िलाफ़ महाभियोग को मंज़ूरी दी गई है.
ट्रंप से पहले अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति एंड्र्यू जॉनसन और बिल क्लिंटन के ख़िलाफ़ महाभियोग की मंज़ूरी मिली थी लेकिन उन्हें पद से नहीं हटाया जा सका था.
विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का कहना है कि डोनल्ड ट्रंप के महाभियोग का सांकेतिक महत्व होगा.
वहीं, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश है.
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