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विमान क्यों डंप करते हैं अपना ईंधन
अमरीका के लॉस एंजेलेस से शंघाई जा रहे विमान को इंजन में ख़राबी के कारण उड़ान भरने के बाद इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी.
लैंडिंग से पहले डेल्टा एयरलाइंस के इस विमान ने कई स्कूलों पर अपना ईंधन डंप किया.
इस कारण कम से कम 60 लोगों को त्वचा की परेशानी हुई और सांस लेने में दिक्कत आई. इन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इनमें ज़्यादातर बच्चे हैं.
इमरजेंसी लैंडिंग की स्थिति में विमान अपना ईंधन डंप कर सकते हैं, लेकिन आबादी वाले इलाक़े में नहीं.
एविएशन नियमों के मुताबिक़ विमानों को ज़्यादा ऊँचाई से ईंधन डंप करना चाहिए, ताकि वे हवा में ही वाष्प बनकर उड़ जाए और तरल रूप में ज़मीन पर न गिरे.
डेल्टा ने एक बयान जारी करके इसकी पुष्टि की है कि इस यात्री विमान ने अपना लैंडिंग वेट कम करने के लिए ईंधन डंप किया था.
विमान क्यों डंप करते हैं ईंधन
दरअसल विमान अक़्सर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त ईंधन लेकर चलते हैं.
इस अतिरिक्त ईंधन के कारण विमान का वज़न अपने अधिकतम स्तर तक पहुँच जाता है.
ये सुरक्षित लैंडिंग के लिए सही नहीं माना जाता है. लैंडिंग के समय विमान का वज़न ज़्यादा नहीं होना चाहिए.
कई बार तकनीकी ख़राबी या अन्य वजहों से विमान को उड़ान भरने के तुरंत बाद ही लैंड करना पड़ जाता है.
इस स्थिति में सुरक्षित लैंडिंग के लिए उन्हें अपना अतिरिक्त ईंधन डंप करना पड़ता है. लेकिन ईंधन डंप करने की जगह के लिए निर्देश हैं और इसे आबादी वाले इलाक़े में नहीं डंप किया जा सकता.
यही इस बोइंग 777 विमान के मामले में हुआ. ये विमान लॉस एंजेलेस के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से शंघाई के लिए उड़ान भरा था.
ये फ़्लाइट 14 घंटे की थी. इंजन में ख़राबी के कारण जब विमान की इमरजेंसी लैंडिंग के बारे में सोचा गया, उस समय विमान का वज़न बहुत था.
इतने वज़न के साथ विमान लैंड नहीं कर सकता था. इसलिए इस विमान को अपना ईंधन डंप करना पड़ा.
विमान का ईंधन उसके विंग्स में भरा जाता है और यहीं नोज़ल लगे होते हैं, जिनकी मदद से ईंधन डंप किया जाता है.
वैसे सभी विमान ईंधन डंप नहीं कर सकते हैं. बोइंग 747 और 777 अपना ईंधन डंप कर सकते हैं. एयरबस ए380 और ए330 भी ईंधन डंप कर सकते हैं. लेकिन अपेक्षाकृत छोटे विमान जो लंबी दूरी की उड़ान नहीं भरते हैं, जैसे बोइंग 737 और एयरबस ए320 अपना ईंधन डंप नहीं कर सकते हैं.
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