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अमरीका में कैसे होता है राष्ट्रपति का चुनाव
अमरीका में राष्ट्रपति पद के लिए दौड़ शुरू हो चुकी है. इस साल नवंबर में होने वाले चुनावों के जो भी नतीज़े आएंगे, उनका पूरी दुनिया पर प्रभाव पड़ेगा.
अमरीका की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा आने वाले राष्ट्रपति पर निर्भर करेगी.
डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता नामांकन के लिए पिछले साल से कैंपेन और चर्चा में जुटे हुए हैं.
आने वाले महीनों में ये भी साफ हो जाएगा कि राष्ट्रपति की कुर्सी के लिए कौन किसे कितनी चुनौती दे पाएगा.
आइए एक नज़र दौड़ाते हैं अमरीकी चुनाव से जुड़ी बुनियादी जानकारी पर.
साल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव कब हैं?
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव 3 नवंबर (मंगलवार) 2020 में होंगे.
मुख्य राजनीतिक पार्टियां कौन हैं?
अमरीका में मुख्य तौर पर दो ही बड़ी राजनीतिक पार्टियां हैं- डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन.
डेमोक्रेटिक पार्टी आधुनिक उदारवाद का समर्थन करती है. यह राज्य के हस्तक्षेप, सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, सस्ती शिक्षा, सामाजिक कार्यक्रमों, पर्यावरण संरक्षण नीतियों और श्रमिकों संघों में विश्वास करती है.
पिछली बार डेमोक्रेट्स की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलरी क्लिंटन थीं जो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से हार गई थीं.
रिपब्लिकन पार्टी को भी पुरानी पार्टी माना जाता है. यह एक तरह से अमरीकी रूढ़िवाद को बढ़ावा देती है, जैसे सरकार के दायरे को सीमित करना, कम करों और मुक्त बाजार पूंजीवाद को, हथियार रखने के अधिकार, श्रमिक संघों के अविनियमन को बढ़ावा देना और आव्रजन तथा गर्भपात जैसे मामलों में प्रतिबंध लगाना शामिल है.
अन्य छोटी राजनीतिक पार्टियां हैं लिब्रेटेरियन, ग्रीन और स्वतंत्र पार्टियां. ये भी कई बार अपना उम्मीदवार खड़ा करती हैं.
अभी क्या हो रहा है?
फिलहाल राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी करने वाले देशभर में प्राइमरी चुनाव ("प्राइमरीज़") में अपनी पार्टी से नामांकन की कोशिश कर रहे हैं.
प्राइमरी चुनाव अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव की पहली सीढ़ी है. इस प्रक्रिया के बारे में अमरीकी संविधान में कोई लिखित निर्देश मौजूद नहीं है, ये प्रक्रिया पार्टी और राज्य पर निर्भर करती है.
इसे पार्टियां नहीं बल्कि राज्य सरकारें आयोजित करती हैं.
राज्य के क़ानूनों के आधार पर ये तय किया जाता है कि प्राइमरीज़ के चुनाव बंद होंगे या खुले.
बंद चुनाव में पार्टी के सदस्य ही मतदान कर सकते हैं. खुले चुनाव में वो लोग भी मतदान कर सकते हैं जो पार्टी से जुड़े नहीं हैं. वो डेलीगेट्स चुनकर भेजते हैं, जो कि कन्वेंशन में उम्मीदवार को नॉमिनेट करते हैं.
अगर उम्मीदवार प्राइमरी चुनाव जीत जाता है तो डेलीगेट्स दूसरे चरण कन्वेंशन में उम्मीदवारों के लिए मतदान करते हैं. इसी चरण में औपचारिक रूप से राष्ट्रपति उम्मीदवार तय किया जाता है.
अमरीका से ही मिलते-जुलते चुनाव ऑस्ट्रेलिया और इसराइल में भी होते हैं जिनमें कई उम्मीदवारों में से एक उम्मीदवार चुना जाता है.
कॉकस क्या है
आयोवा जैसे कुछ राज्य प्राइमरी तरीके की जगह कॉकस का तरीका अपनाते हैं. ये चुनाव पार्टियां आयोजित करती हैं.
क्योंकि ये चुनाव राज्य सरकार नहीं कराती तो इससे पार्टियों को नियम तय करने में आसानी हो जाती है. ये भी पार्टियां ही तय करती हैं कि मतदान कौन करेगा.
डेमोक्रेट्स के कॉकस में मतपत्र से वोट नहीं होते. एक जगह पर पार्टी के सदस्य इकट्ठा होते हैं और उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की जाती है. इसके बाद वहां मौजूद लोग हाथ उठाकर उम्मीदवार चुनते हैं.
सुपर ट्यूज़्डे क्या है
अमरीका में जब भी राष्ट्रपति चुनाव होते हैं, सुपर ट्यूज़्डे को मतदान जरूर होता है.
राज्यों में इस दिन प्राइमरी या कॉकस चुनाव होते हैं.
इस साल सुपर ट्यूज़्डे 3 मार्च को पड़ेगा.
चुनाव प्रक्रिया कब तक चलेगी
अमरीका में प्राइमरी और कॉकस चुनावों की प्रक्रिया फरवरी से शुरू होगी और जून तक चलेगी.
कुछ देशों में प्रचार की अवधि तय होती है लेकिन अमरीका में उम्मीदवार जब तक चाहें प्रचार कर सकते हैं.
ब्रिटेन और फ्रांस में भी यही व्यवस्था है.
राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार अभियान लगभग 18 महीने चलता है.
डोनल्ड ट्रंप को कब मिलेगी चुनौती
राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी का राष्ट्रीय कन्वेंशन 13 से 16 जुलाई के बीच होगा.
रिपब्लिकन पार्टी का राष्ट्रीय कन्वेंशन बाद में 24 से 27 अगस्त के बीच होगा.
जब तक कन्वेंशन में घोषणा न हो जाए, तब तक राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नहीं बनेंगे.
इसके बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उप-राष्ट्रपति माइक पेंस अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ चार डिबेट में हिस्सा लेंगे.
जीत के लिए कितने वोट चाहिए
अमरीका में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता (पॉप्यूलर वोट्स) नहीं करती बल्कि इलेक्टोरल कॉलेज के ज़रिए चुनाव होता है.
जिस तरह कॉकस में डेलिगेट चुने जाते हैं, उसी तरह चुनाव के लिए इलेक्टर्स चुने जाते हैं.
इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहा जाता है, यानी ऐसा समूह, जिसे अमरीकी जनता चुनती है और फिर वो राष्ट्रपति की जीत का ऐलान करते हैं.
व्हाइट हाउस में पहुंचने के लिए 538 में से 270 वोट की ज़रूरत होती है.
इससे कुछ राज्य उम्मीदवारों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्यों से ज़्यादा संख्या में इलेक्टोरल वोट्स आते हैं.
स्विंग, रेड और ब्लू राज्य क्या हैं
रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाले दक्षिणी राज्यों को रेड स्टेट्स कहा जाता है.
डेमोक्रेट्स के प्रभाव वाले राज्यों को ब्लू स्टेट्स कहा जाता है.
चुनाव अभियानों में अक्सर उन राज्यों में उम्मीदवारों को नहीं भेजा जाता और प्रचार में पैसा नहीं लगाया जाता, जिनमें जीतने की संभावना बहुत कम हो.
ओहियो और फ्लोरिडा जैसे अनिश्चित राज्यों (स्विंग स्टेट्स) में राष्ट्रपति चुनाव ज़्यादा दिलचस्प हो जाता है.
एरिज़ोना, पेंसिलवेनिया, विसकॉन्सिन को साल 2020 के चुनावों में स्विंग स्टेट्स माना जा रहा है.
कैसे होता है मतदान
ये भी राज्य पर निर्भर करता है. कई राज्यों में जल्दी मतदान होता है, जो पंजीकृत मतदाताओं को चुनाव के दिन से पहले मतदान करने की अनुमति देता है.
जो मतदाता बीमारी या अपाहिज होने के कारण, यात्रा या राज्य से बाहर होने के कारण वोट नहीं डाल पाते हैं, उनके पास वोट मेल करने का विकल्प होता है.
जो लोग चुनाव के दिन मतदान करते हैं, उन्हें आधिकारी पोलिंग स्टेशन पर जाना होता है. यहां ऑनलाइन वोटिंग नहीं होती है.
हर राज्य ख़ुद अपने यहां डाले गए वोटों की गिनती करता है और आमतौर पर उसी रात को नतीजे भी आ जाते हैं.
अगरबहुमत नहीं मिले
अगर किसी भी उम्मीदवार को इलेक्टोरल वोट में बहुमत नहीं मिलता तो संसद का निचला सदन (हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स) शीर्ष तीन उम्मीदवारों में से राष्ट्रपति का चुनाव करता है.
बचे हुए दो उम्मीदवारों में से सीनेट उप-राष्ट्रपति को चुनती है.
ऐसी स्थितियां बहुत कम बनती हैं लेकिन साल 1824 में ऐसा हो चुका है.
विजेता घोषित होने के बाद
नतीजे घोषित होने के बाद नए राष्ट्रपति को अपने कैबिनेट सदस्यों को चुनने और योजनाएं बनाने के लिए कुछ समय दिया जाता है.
नवंबर के बाद जनवरी में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाती है.
कांग्रेस में सेरेमनी के बाद राष्ट्रपति एक परेड में व्हाइट हाउस जाते हैं और अगले चार का कार्यकाल शुरू करते हैं.
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