ईरान ने इराक़ में अमरीकी सेना पर दागी मिसाइलें, बताया सुलेमानी की मौत का जवाब

इमेज स्रोत, IRIB
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन का कहना है कि इराक़ में अमरीकी सेना के कम-से-कम दो ठिकानों पर एक दर्जन से ज़्यादा मिसाइल हमले हुए हैं.
ईरान की सरकारी मीडिया का कहना है कि ये हमले जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए किए गए हैं जिन्हें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आदेश पर बग़दाद में एक ड्रोन हमले में मार डाला गया था.
अमरीकी राष्ट्रपति ने एक ट्वीट करते हुए कहा है कि सबकुछ ठीक है और वो बुधवार को एक बयान जारी करेंगे.
ट्रंप ने इस ट्वीट में कहा, "सब ठीक है, ईरान ने इराक़ में दो सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं. हताहत और नुक़सानी की समीक्षा की जा रही है. अभी तक सब अच्छा है. हमारे पास दुनिया की सबसे ताक़तवर सेना है. मैं सुबह एक बयान जारी करुँगा."
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वहीं ईरान के विदेश मंत्री जव्वाद ज़रीफ़ ने कहा है उन्होंने ये हमला आत्मरक्षा में किया है.
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जव्वाद ज़रीफ़ ने ट्वीट कर कहा,"ईरान ने यूएन चार्टर के आर्टिकल-51 के तहत आत्मरक्षा में ऐसे ठिकानों को निशाना बनाया है जहाँ से कायरपूर्ण तरीक़े से हमारे नागरिकों और वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ हमले किए गए. हम लड़ाई नहीं बढ़ाना चाहते, पर हम पर हुए हमलों से अपनी रक्षा करेंगे".
दो शहरों में हुए हमले
पेंटागन ने कहा है कि इराक़ के इरबिल और अल-असद शहर में दो ठिकानों पर हमले हुए हैं जहाँ उनके सैनिक रह रहे थे.
अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि हमले में कोई हताहत हुआ है या नहीं.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की प्रवक्ता स्टेफ़नी ग्रिशम ने एक बयान में कहा, "हमें इराक़ में अमरीकी ठिकानों पर हमले की ख़बर मिली है. राष्ट्रपति को इस बारे में ब्रीफ़ कर दिया गया है, हम स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से मशविरा कर रहे हैं."
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि ये हमला शुक्रवार को जनरल सुलेमानी की मौत का जवाब लेने के लिए किया गया है.
ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी इरना पर जारी किए गए एक बयान में रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने कहा, "हम अमरीका के उन सारे साथियों को चेतावनी देना चाहते हैं जिन्होंने उसकी आतंकवादी सेना को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने दिया है, कि ऐसी किसी भी जगह से जहाँ से ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई होती है, उसे निशाना बनाया जाएगा."
अल मयादीन टीवी के अनुसार हमले जनरल सुलेमानी को दफ़नाए जाने के कुछ ही घंटे बाद हुए.
पहले अल-असद में मिसाइलें दागी गईं, उसके बाद इरबिल में भी हमले किए गए.
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