न्यूज़ीलैंड: जब ज्वालामुखी फट पड़ा

न्यूज़ीलैंड के व्हाइट आईलैंड में सोमवार को एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ. जब यह विस्फोट हुआ तब ज्वालामुखी के मुंहाने पर कई पर्यटक मौजूद थे.

मंगलवार तक कई लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई थी. कई लोग लापता हैं जबकि तकरीबन 30 लोग गंभीर रूप से झुलसे हैं.

एक पर्यटक माइकल शाडे ने एक तस्वीर (ऊपर और नीचे की तस्वीरें) ट्वीट की थी और कहा था, "हे भगवान, 2001 के बाद पहली बार न्यूज़ीलैंड के व्हाइट आईलैंड में ज्वालामुखी विस्फोट हुआ."

"20 मिनट पहले मैं और मेरा परिवार वहां से आए थे. हम अपनी बोट पर इंतज़ार कर रहे थे तभी हमने यह देखा."

विस्फोट से पहले टूर गाइड को लोगों को वहां से बाहर निकालते देखा जा सकता था.

ऑकलैंड के बचाव हेलीकॉप्टर ने जो आसमान से तस्वीर ली थी उसमें ज्वालामुखी देखा जा सकता था.

न्यूज़ीलैंड के भूवैज्ञानिक और परमाणु विज्ञान संस्थान (जीएनएस) द्वारा जारी वीडियो में ज्वालामुखी से राख और भाप उठते देखी जा सकती थी.

जीएनएस की तस्वीर (नीचे वाली) में विस्फोट से पहले ज्वालामुखी को देखा जा सकता है.

नीचे वाली तस्वीर में व्हाइट आईलैंड से 40 किलोमीटर दूर कॉस्टगार्ड के बचाव दल की नाव को देखा जा सकता है.

उत्तरी आईलैंड की मुख्य भूमि पर बचावकर्मियों ने पीड़ितों का इलाज किया.

मंगलवार को व्हाइट आईलैंड के ज्वालामुखी से भाप उठते देखी जा सकती थी.

न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने वॉकाटाने के मेयर जूडी टर्नर के साथ प्रेस कॉन्फ़्रेंस की.

प्रधानमंत्री अर्डर्न ने कहा कि उनकी पीड़ित परिवारों से सहानुभूति है.

प्रधानमंत्री ने वोकाटाने के अग्निशमन स्टेशन के कर्मचारियों से भी मुलाक़ात की.

वोकाटाने में झंडे को आधा झुका भी देखा जा सकता था.

सिडनी में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने विदेश मंत्री मेरिस पेन के साथ मीडिया को संबोधित किया. ऑस्ट्रेलिया के 24 लोग इसमें प्रभावित हुए हैं.

टॉरुंगा के तट पर लोगों ने पीड़ितों को श्रद्धांजली दी. इस दौरान वो जहाज़ भी खड़ा था जो पर्यटकों को व्हाइट आईलैंड लेकर आया था.

व्हाइट आईलैंड को वकारी भी कहा जाता है. इस द्वीप पर देश के सबसे सक्रीय ज्वालामुखी हैं.

पर्यटक रॉन नील ने जनवरी 2017 में इस द्वीप का दौरा किया था और नीचे दी गईं तस्वीरें ली थीं.

नील ने कहा था, "ज्वालामुखी तक जाने के लिए हमें गैस मास्क और हेलमेट पहनने पड़े थे."

गैस मास्क पहने हुए नील.

नील कहते हैं कि उन्हें उस दिन द्वीप पर इसीलिए जाने की अनुमति थी क्योंकि विस्फोट का ख़तरा उस दिन बेहद कम था.

हालांकि, नील कहते हैं कि उस वक़्त सल्फर का धुआं सांस लेने में दिक़्क़त पैदा कर रहा था.

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