इराक़: प्रधानमंत्री अब्दुल महदी ने इस्तीफ़ा देने की घोषणा की

इराक़ के प्रधानमंत्री अब्दुल महदी ने अपने पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की है. उनके दफ़्तर से जारी बयान के मुताबिक़ गुरुवार को सरकार विरोधी प्रदर्शन में 40 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने के बाद प्रधानमंत्री ने ये फ़ैसला किया है.

अक्तूबर से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन में गुरुवार का दिन सबसे ज़्यादा हिंसक था.

इराक़ के सर्वोच्च शिया धार्मिक नेता ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की है और नई सरकार के गठन का आह्वान किया है.

अक्तूबर से अबतक 400 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. शुक्रवार को कम से कम 15 लोग मारे गए हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो नौकरी, भ्रष्टाचार का ख़ात्मा और बेहत नागरिक सुविधाओं की माँग कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वो 'प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ लगातार हो रही गोलीबारी की ख़बरों से अत्यंत चिंतित हैं'. उन्होंने संयम बरतने की अपील की है.

प्रधानमंत्री अब्दुल महदी क्यों इस्तीफ़ा दे रहे हैं?

इराक़ में शियाओं के सर्वोच्च धार्मिक नेता अली अल-सिस्तानी के नए नेता चुने जाने के आह्वान के बाद प्रधानमंत्री ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है.

प्रधानमंत्री का हस्ताक्षर किया हुआ एक बयान जारी किया गया है जिसमें वो कहते हैं, ''सिस्तानी के इस आह्वान पर और इसे जल्द से जल्द लागू किए जाने के लिए मैं आज संसद से अपील करूँगा कि वो मेरा इस्तीफ़ा स्वीकार कर लें.''

हालांकि बयान में ये नहीं कहा गया है कि उनका इस्तीफ़ा संसद में कब पेश किया जाएगा. मौजूदा संकट पर विचार करने के लिए रविवार को संसद का आपातकालीन सत्र बुलाया गया है.

इससे पहले सिस्तानी ने कहा था कि ऐसा लगता है कि पिछले दो महीने की घटनाओं से निपटने में ये सरकार विफल रही है.

कर्बला में सिस्तानी के एक प्रतिनिधि ने उनका बयान टीवी पर पढ़कर सुनाया. उनके बयान में कहा गया था, ''संसद जिसने मौजूदा सरकार को बनाया था, उसे अपने फ़ैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए और उसे वही करना चाहिए जो इराक़ के हक़ में हो.''

मामले की पृष्ठभूमि

महदी लगभग एक साल पहले प्रधानमंत्री बने थे. उस समय उन्होंने जिन सुधारों का वादा किया था, वो पूरा नहीं हो सका. इसके विरोध में इराक़ी युवाओं ने अक्तूबर के पहले हफ़्ते में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया. पहले छह दिनों के प्रदर्शन में 149 आम शहरी मारे गए. प्रधानमंत्री ने कैबिनेट में बदलाव करने और बेरोज़गारी दूर करने के लिए कई योजनाओं को शुरू करने का वादा किया.

लेकिन प्रदर्शनकारियों के अनुसार सरकार ने उनकी कोई भी माँग नहीं मानी और वो अक्तूबर के आख़िर में दोबारा सड़कों पर उतर गए. सुरक्षाकर्मियों ने इसे कुचलने की पूरी कोशिश की लेकिन प्रदर्शन कई शहरों में होने लगे.

अक्तूबर के आख़िर में प्रधानमंत्री ने कहा कि वो अपना पद छोड़ने को तैयार हैं अगर तमाम पार्टियां किसी नए नेता को चुन लें.

ताज़ा घटनाक्रम

शुक्रवार को नासिरिया में 15 प्रदर्शनकारी मारे गए.

अब्दुल महदी के इस्तीफ़े की पेशकश की ख़बर सुनकर प्रदर्शनकारी बहुत ख़ुश हैं. बग़दाद में एक हिजार नाम के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि ये उनकी जीत है लेकिन उनकी माँगें अभी बाक़ी हैं.

गुरुवार को नजफ़ के गवर्नर ने इस्तीफ़ा दे दिया था. शुक्रवार को डिप्टी गवर्नर ने भी इस्तीफ़ा दे दिया. गुरुवार को नजफ़ में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार में शुक्रवार को हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया.

गुरुवार को नासिरिया में कम से कम 25 प्रदर्शनकारी मारे गए जब सुरक्षाकर्मियों ने उन पर गोली चलाई. नजफ़ में 10 लोग मारे गए. बग़दाद में चार लोग मारे गए.

प्रदर्शनकारियों ने ईरानी कंसुलेट को क्यों निशाना बनाया?

प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोगों में से अधिकतर इस बात से नाराज़ हैं कि ईरान, इराक़ के अंदुरुनी मामलों में दख़ल दे रहा है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इराक़ी सरकार के भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के लिए ईरान ज़िम्मेदार है. उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ नारा लगाते हुए नजफ़ स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास को आग लगा दी.

नजफ़, ईराक़ में शियाओं का सर्वोच्च धार्मिक केंद्र है और यहीं पर इमाम अली की मज़ार है. यहीं पर इस्लाम के आख़िरी पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की भी मज़ार है. तीन हफ़्ते पहले कर्बला में भी ईरान के एक दफ़्तर को निशाना बनाया गया था.

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