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भारत की वजह से बांग्लादेश में महंगा हुआ प्याज़?
प्याज़ की क़ीमतों से भारत ही नहीं बल्की उसका पड़ोसी देश बांग्लादेश भी परेशान है. भारत में जहां प्याज़ 70-80 रुपए प्रति किलो बिक रहा है तो वहीं बांग्लादेश में इसकी क़ीमतों ने नए रिकॉर्ड ही क़ायम कर दिए हैं.
बांग्लादेश में प्याज़ लगभग 240 टका किलो यानी भारतीय मुद्रा में क़रीब 200 रुपए किलो बिक रहा है. जबकि आमतौर पर बांग्लादेश में प्याज़ की क़ीमत 30 से 40 टका यानी 25 से 35 रुपये तक रहती थी.
बढ़ी हुई क़ीमतों के चलते लोगों ने अब प्याज़ का इस्तेमाल करना भी कम कर दिया है. आख़िर बांग्लादेश में प्याज़ की बढ़ती क़ीमतों के पीछे क्या वजह है. यह जानने के लिए बीबीसी हिंदी की संवाददाता कमलेश मठेनी ने बीबीसी बांग्ला सेवा की सहयोगी फ़रहाना परवीन से बात की.
फ़रहाना परवीन ने बताया कि बांग्लादेश में दाम बढ़ने की सबसे अहम वजह है सितंबर में भारत की तरफ़ से बांग्लादेश में प्याज़ के निर्यात पर लगाया गया प्रतिबंध.
असल में बांग्लादेश अपने लगभग 40 प्रतिशत प्याज़ दूसरे देशों से मंगवाता है. इसमें से भी 95 प्रतिशत प्याज़ का निर्यात अकेले भारत से ही होता है. ऐसे में जब भारत ने बांग्लादेश को प्याज़ भेजना बंद किया तो इसका सीधा असर बांग्लादेश के प्याज़ स्टॉक पर देखने को मिला.
सरकार क्या कोशिशें कर रही है?
प्याज़ की क़ीमतें बढ़ने के पीछे एक वजह यह भी बताई जाती है कि बड़े व्यापारी प्याज़ को अपने गोदामों में रख लेते हैं और बाज़ार में उसकी कमी महसूस होने पर उनके दाम बढ़ जाते हैं. हालांकि फरहाना बताती हैं कि अभी तक बांग्लादेश के बाज़ार में उन्हें इस तरह की कालाबाज़ारी के सबूत देखने को नहीं मिले हैं.
भारत की तरफ़ से लगे प्रतिबंध के बाद बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत के दौरे पर आईं और उन्होंने यह मुद्दा भारतीय अधिकारियों और सरकार के सामने उठाया.
फ़रहाना बताती हैं कि बांग्लादेश की सरकार सितंबर महीने से ही प्याज़ आयात करने के लिए दूसरे देशों से भी संपर्क कर रही है. जिनमें तुर्की, म्यांमार और मिस्र शामिल हैं.
इसके अलावा सरकार देश में मौजूद बड़े प्याज़ व्यापारियों से भी बातचीत कर रही है जिससे दामों को नियंत्रित किया जा सके.
बांग्लादेश की सरकार प्याज़ के दामों को नियंत्रित करने के लिए कुछ क़दम ज़रूर उठा रही है लेकिन फ़िलहाल उनके प्रयासों का असर बाज़ार पर पड़ता हुआ महसूस नहीं हो रहा है.
बांग्लादेश कैसे बढ़ाए प्याज़ का उत्पादन?
प्याज़ के दामों की वजह से आम जनता में बहुत ग़ुस्सा देखने को मिल रहा है. दुकानदार और ग्राहक दोनों को ही इन दामों से नुक़सान उठाना पड़ रहा है. भारत की तरफ़ से लगे प्रतिबंध के अलावा बांग्लादेश में बारिश की कमी का असर प्याज़ की पैदावार पर पड़ा है.
अपनी ज़मीन में बांग्लादेश महज़ 60 प्रतिशत प्याज़ ही उगाता है, लेकिन कम बारिश की वजह से उसमें भी बहुत कमी आई है. बांग्लादेश प्याज़ के लिए दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर है.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बांग्लादेश आयात पर निर्भरता कम करके अपना प्याज़ उत्पादन बढ़ा सकता है.
बीबीसी बांग्ला संवाददाता संजना चौधरी ने इस संबंध में बांग्लादेश कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर मोहम्मद ज़हीरुद्दीन से बात की.
प्रो. ज़हीरुद्दीन ने बताया कि देश में प्याज़ का उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है, लेकिन किसानों को इस फ़सल के उत्पादन में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.
ज़हीरुद्दीन बताते हैं कि बांग्लादेश के किसान प्याज़ की जगह चावल के उत्पादन पर अधिक ज़ोर देते हैं क्योंकि उसमें उन्हें अधिक फ़ायदा मिलता है.
बांग्लादेश में, आमतौर पर सर्दियों में प्याज़ उत्पादन किया जाता है. लेकिन अब गर्मियों में भी प्याज़ की नई क़िस्मों का उत्पादन होने लगा है.
हालांकि इन नई क़िस्मों को लंबे समय तक संग्रहित नहीं किया जा सकता है. इसके अलावा बारिश के कारण भी प्याज़ बर्बाद हो जाता है.
प्रोफ़ेसर ज़हीरुद्दीन बताते हैं कि बांग्लादेश में प्याज़ के कोल्ड स्टोरेज की भी बहुत कमी है. जिस कोल्ड स्टोरेज में आलू रखा जाता है वहां प्याज़ को स्टोर नहीं कर सकते.
वो बताते हैं, ''प्याज के भंडारण में कोल्ड स्टोरेज में 5% नमी की आवश्यकता होती है, इसलिए तापमान 8 डिग्री से 12 डिग्री सेल्सियस तक रहना चाहिए. यह स्तर आलू के कोल्ड स्टोरेज से अलग है.''
ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ़ बांग्लादेश (TCB) के अनुसार, बांग्लादेश हर साल लगभग 1 से 5 लाख टन प्याज़ का उत्पादन करता है, जो कि कुल मांग का महज़ 60% है. बाक़ी का 40 प्रतिशत प्याज़ दूसरे देशों से आयात किया जाता है. इसमें भी लगभग 95 प्रतिशत प्याज़ सिर्फ़ भारत से ही आयात किया जाता है.
बांग्लादेश भारत से इतनी तादाद में प्याज़ इसलिए आयात करता है क्योंकि भारत से प्याज़ मंगवाना उसके लिए सस्ता और आसान है. इसकी तुलना में तुर्की या मिस्र से प्याज़ मंगवाना बांग्लादेश को महंगा पड़ता है.
फ़िलहाल बांग्लादेश में प्याज़ का जो संकट पैदा हुआ है उससे उबरने के लिए बांग्लादेश के विशेषज्ञों की राय है कि इसके लिए दीर्घगामी योजना बनाई जानी चाहिए.
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